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व्यापार गोष्ठी: सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से लौटेगी तेजी?

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 5:05 PM IST

अकेला चना भाड नहीं फोड़ता
जया तलेजा, बांद्रा, मुंबई


णसार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के आईपीओ आने से बाजार में पिछले कुछ महीनों से चल रहे ठंडेपन में थोडी ग़र्माहट तो जरूर आएगी, क्योंकि सरकारी योजना के अनुसार इन कंपनियों के 10 फीसदी शेयरों को भी सार्वजनिक किया जाएगा। लेकिन निवेशकों को एक बात ध्यान रखनी होगी कि अकेला चना भाड नहीं फोडता। बाजार के दूसरे पहलू सकारात्मक रुख अख्तियार करते हैं, तो ये आईपीओ बाजार के लिए सहायक होंगे नहीं तो इनका भी वही हाल होगा जो निजी कंपनियों का हुआ है।

निजी-सार्वजनिक उपक्रमों में न बांटे
कमल कुमार,  सॉफ्टवेयर इंजीनियर, वेंचुरा सिक्योरिटीज, लखनऊ

शेयर बाजार केवल सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बल पर ही नहीं चल रहे हैं। बाजार की मंदी वैश्विक है, इसे निजी और सार्वजनिक उपक्रमों में न बांटे तो बेहतर होगा। कई सार्वजनिक उपक्रमों के निर्गम ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है और कई निजी क्षेत्र के आईपीओ ने अच्छा प्रदर्शन किया है। सार्वजनिक उपक्रम के जो कुछ आईपीओ आ रहे हैं, वे बढ़िया हैं। जब भी बाजार में कोई नया पब्लिक इश्यू आता है तो उसका पूर्व का प्रदर्शन व भविष्य की संभावनाएं देखनी चाहिए। मात्र सार्वजनिक उपक्रम होना बाजार की तेजी की गारंटी नहीं है।

गारंटी मिले, तब लगाएंगे लोग पैसा
ओम प्रकाश मालवीय, भोपाल, मध्य प्रदेश

आज के माहौल और हालात को देखते हुए कुछ भी नहीं कहा जा सकता है कि सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से बाजार में तेजी आएगी या नहीं। आज के समय में हर इंसान को सोच-समझ से आगे बढ़ना चाहिए। सरकारी नीतियों से जनता का भरोसा उठ चुका है। ऐसे समय में अगर सरकार का यह कदम है, तो हो सकता है कि भारत की जनता को फायदा मिले।

अगर इस बात की सौ फीसदी गारंटी मिलती है कि सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से बाजार में तेजी आएगी तब ही आम जनता, कारोबारियों और नौकरी पेशा लोग पैसा लगाने को तैयार होंगे। अगर सरकारी उपक्रमों के आईपीओ पर जनता विश्वास कर लेती है तो निश्चित ही बाजार में तेजी आएगी।

थोड़े समय के लिए राहत मिलेगी
डॉ. सतीश कुमार शुक्ल, भारतीय आर्थिक सेवा के पूर्व सलाहकार, कॉटन एक्सचेंज बिल्डिंग, मुंबई

सरकारी उपक्रमों के आईपीओ आने से निश्चय ही बाजार को थोड़े समय के लिए राहत मिलेगी। सरकारी उपक्रम सरकार की प्रतिष्ठा और विश्वास का प्रतीक हैं। हालांकि इनके कार्य व्यवहार पर प्रश्न चिन्ह उठाए जाते रहे हैं, फिर भी इससे बाजार की सुस्ती दूर होगी और बाजार के प्रति आशा की नई किरण जगेगी। अर्थव्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करना बहुत जरूरी है। सरकारी उपक्रमों के आईपीओ इस दिशा में सरकारी पहल का प्रतीक होगी।

इस कदम से दोबारा विश्वास लौटेगा
मुनीश्वर, बेगूसराय, बिहार

वामपंथियों के समर्थन वापसी के बाद अपनी नई टीम के साथ विश्वासमत प्राप्ति के बाद उत्साह से लबरेज केंद्र सरकार देश में तेजी से सुधार-कार्यक्रमों को लागू करने के लिए तत्पर दिख रही है। इसी दिशा में कदम उठाते हुए सरकारी उपक्रमों द्वारा आईपीओ लाने की तैयारी चल रही है। बाजार की अस्थिरता, प्रक्रियात्मक निर्णयों व कर्मचारी संगठनों के संशयों को देखते हुए सरकार ने आईपीओ लाने का फैसला किया गया है। हालांकि इसमें कुछ देरी हो सकती है लेकिन लाखों कर्मचारियों, निवेशकों, कंपनियों व सरकार के हित में यह नीति काफी लाभदायक साबित होगी।

बाजार में बहेगी धन की गंगा
आशा जैन, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश

जब सरकार को पैसे की आवश्यकता होती है, तो वह कोई खास सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का कुछ प्रतिशत आईपीओ के माध्यम से जनता के बीच लगा सकती है, जिससे सरकारी उपक्रम धन उगाही कर सके। इसमे कोई शक नहीं कि सरकारी आईपीओ से शेयर बाजार में धन की आवक लौटेगी और इससे निश्चित तौर पर तेजी भी देखने को मिलेगी। इससे निवेशकों को भी फायदा होगा।

बारीकी से निपटने की जरूरत
राजेंद्र प्रसाद मधुबनी, व्याख्याता मनोविज्ञान, मधुबनी, बिहार

कड़ी मौद्रिक नीति से पूरा देश आहत हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र में दिख रहा विकास और इसके बल पर विश्व फतह की लालसा तत्काल रुक सी गई है। इस मनोवैज्ञानिक दबाव से बड़े बारीकी से निपटने की जरूरत है। आर्थिक मंदी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत वृध्दि और परमाणु करार से सरकार हिलने लगी थी।

सभी का कलेजा धड़क रहा था कि महंगाई की चपेट में आए देश की जनता चुनाव को कैसे झेल पाएगी। सभी तरफ दिख रहे विकास का स्तर स्टॉक बाजार की तरह धाराशायी होकर गिरने लगा था। ऐसी परिस्थिति में शायद ही कोई अपनी कंपनी का आईपीओ लाकर जोखिम उठाएगा और असफल होने की स्थिति में अपनी साख खोना चाहेगा।

उम्मीद की एक किरण
निशा गोर, कांदिवली, मुंबई

बाजार में मंदी का दौर खत्म होने के साफ संकेत दिखाई दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का उफान लगभग शांत हो गया है। सोने में स्थिरता के आसार लग रहे हैं। कमोडिटी जिंसो की तेजी भी थम गई है। वैश्विक स्तर पर छाए महंगाई के बादल छंटने लगे हैं। सेबी ने अपनी गाइड लाइन से बाजार को बांधकर निवेशकों को भरोसा दिलाया है। ऐसे समय में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के यदि आईपीओ आते हैं तो लम्बे समय से मंदी के डर से बाजार से दूरी बनाए निवेशक बाजार एक बार फिर से सक्रिय हो जाएंगे, जिससे बाजार में तेजी आना तय है।

दीवाली का नया तोहफा
गुलाबचंद वात्सल्य, बुधवारी बाजार, विकास ऑफसेट, छिन्दवाड़ा, मध्य प्रदेश

वामपंथियों के हस्तक्षेप के कारण सरकारी उपक्रमों के जो आईपीओ रूके हुए थे, अब आने वाले हैं। हाइड्रो पावर, आईल मार्केटिंग, आरआईटीएस को अनुमति मिल चुकी है और वे इसी साल आ रहे हैं। बीएसएनएल का मेगा आईपीओ आने की बाट जोह रहा है।

इस तरह सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से निश्चित ही आर्थिक-सुधारों को गति मिलेगी तथा सरकार के राजकोषीय घाटे में कमी आएगी, देश के औद्योगिक विकास दर में वृध्दि होगी और बाजार में जो एक सुस्ती का माहौल है, उसके दूर होने में भी मदद मिलेगी। बेहतर होगा कि ये आईपीओ इस साल दिसंबर तक आ जाएं तो सरकार की तरफ से औद्योगिक जगत को दीवाली का यह नायाब तोहफा होगा।

यह भी है एक तरह का झांसा
श्याम प्रकाश शर्मा, एडवोकेट, शर्मा कॉलोनी, गांधी नगर बस्ती, जनपद-बस्ती, उत्तर प्रदेश

किसी न किसी बहाने बाजार में आई अप्रत्याशित गिरावट का शिकार आईपीओ भी होते ही हैं। नामी-गिरामी आईपीओ, जिनसे लोगों की बहुत उम्मीदें थी उन्होंने भी अपनी लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को निराश किया। सरकारी उपक्रमों से भी किसी जादुई करिश्मे की उम्मीद नहीं है। आम निवेशक इस बात को भली प्रकार समझ चुका है कि लोगों को सोने का कड़ा दिखा कर झांसे में लेकर शिकार करने वाले शेर की स्थिति ही सरकारी उपक्रमों के शेयरों की है। इसलिए इससे बाजार में तेजी आने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। आईपीओ को निवेशकों का विश्वास अर्जित करने में काफी वक्त लगेगा।

सार्वजनिक उपक्रम एक बड़ा सहारा
भुवन चंद्र जोशी, ऑफि स एक्जेक्यूटिव, लखनऊ

ऐसे में जब बाजार में स्थिरता ही नहीं है तो सार्वजनिक उपक्रम के आईपीओ से ही उम्मीद है। कई अच्छे सार्वजनिक उपक्रमों के आईपीओ आ रहे हैं। जनता इन पर भरोसा कर सकती है। मंदी से उबरने के लिए सार्वजनिक उपक्रम एक बड़ा सहारा बन सकता है। बाजार को आज सार्वजनिक उपक्रमों के आईपीओ के सहारे की सख्त आवश्यकता है।

अब तो सिर्फ इनका ही सहारा
ज्योति प्रकाश, शिक्षिका, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ

जब शेयर बाजार का चरित्र असंतुलित हो जाए तो ऐसे में सार्वजनिक उपक्रम का ही सहारा बचता है। नौकरी पेशा वर्ग काफी सोच समझ कर शेयर बाजार में पैसा निवेश करता है और सार्वजनिक उपक्रम से बेहतर विकल्प आज की तारीख में उसके पास कोई नहीं है। शेयर बाजार की जो रौनक निजी क्षेत्र ने छीनी है, उसे सार्वजनिक उपक्रम के आईपीओ ही वापस लाएंगे। शेयर बाजार में निवेश कोई बैंक का सावधि जमा नहीं है जहां रिटर्न की गारंटी होती है। जरूरत है तो बस भरोसा बनाए रखने की है। बाजार का तेजी भरा दौर जरूर वापस आएगा।

जीतेगा वही, जिसमें होगा दम
मुकुंद माधव, एकाउंटेंट, इंडस्विफ्ट फार्मा लि., रामदरबार, फेज-2, चंडीगढ़

सरकारी कंपनियों द्वारा आईपीओ जारी करने से ज्यादा परेशान होने की बात नहीं है। लिहाजा शेयर बाजार की उठा-पटक के बीच यह कयास तो लगाए ही जा रहे थे कि अब सरकारी कंपनियां भी अपना आईपीओ जरूर लाएंगी। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता आएगी। आज हर कंपनियां चाहती है कि उनकी कंपनी में आम लोगों की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा हो।

इस लिहाज से आईपीओ के जरिये कंपनी का हिस्सा बनना आजकल थोड़ा ज्यादा आसान हो गया है। ऐसे में अगर सरकारी कंपनियां समय के नब्ज को समय रहते समझने की पहल कर रही है, तो इसमें बुराई ही क्या है ? इससे निजी, सार्वजनिक और सरकारी तीनों क्षेत्रों की कंपनियों को आमने-सामने आने का मौका मिलेगा और इस खुली प्रतिस्पर्धा में जीत उसी की होगी जिसमें दम होगा। सरकारी कंपनियों की इस पहल से एक नई और स्वस्थ परंपरा को बल मिलेगा।

पहले ही उठाना था यह कदम
सरिता कुमारी, बनगांव, सहरसा, बिहार

सरकारी कंपनियों ने आईपीओ लाने की जो पहल अब की है, वह उसे काफी पहले कर देना चाहिए था। आज कई निजी क्षेत्र की ऐसी कंपनियां हैं, जो बड़ी से बड़ी सरकारी कंपनियों को पीछे छोड़ चुकी है। ऐसे में सरकारी कंपनियों के लिए यह मजबूरी ही कही जाएगी कि फंड जुटाने के लिए उसे आईपीओ लाना पड़ रहा है।

हमारी सरकारी कंपनियां पीछे रह जाती है। चाहे वह प्रदर्शन की बात हो या संसाधन की, ये कंपनियां हर मोर्चे पर मार खा जाती है। इसलिए अगर इन सरकारी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में टिके रहना है, तो उस तरह की हर प्रक्रिया को क्रियान्वित करना होगा, जिसे अपनाकर आज निजी कंपनियां सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रही है।

खोया हुआ विश्वास जल्दी नहीं लौटता
कुमारी शक्ति उपाध्याय, 8262-बैरिहवां, गांधी नगर, जनपद-बस्ती, उत्तर प्रदेश

आईपीओ के अच्छे रिटर्न की उम्मीद के साथ पैसा लगाने वाले निवेशकों के साथ हुई जो नाइंसाफी कई आईपीओ के आबंटन में सामने आई है। उससे सरकारी उपक्रमों के आईपीओ का बच पाना भी संभव नहीं लगता है। इसलिए बाजार को संजीवनी देने के लिए तेजी लौटाने के लिए सरकारी उपक्रमों के आईपीओ को चमत्कार कर पाने में कामयाब होंगे, जो लोग ऐसी सोच रखते हैं वे गलतफहमी के शिकार हैं।

उन्हें यह बात अच्छी तरह जाने लेनी चाहिए कि खोया हुआ विश्वास जल्दी नहीं लौट पाता है और रही बात शेयर बाजार की तो इसने एक के बाद एक कई बार किसी न किसी बहाने शेयर बाजार में निवेश करने वालों को कंगाल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पुरस्कृत पत्र

दूध के जले हैं तो छाछ भी फूंक…
कृष्ण कुमार उपाध्याय
एडवोकेट, 8262-बैरिहवां, गांधी नगर, जनपद-बस्ती, उत्तर प्रदेश

बड़ी-छोटी कंपनियों द्वारा पिछले दो वर्षों में लाए गए आईपीओ में से लगभग 80 फीसदी में निवेशकों को घोर निराशा ही हाथ लगी है। एक आंकड़े के मुताबिक ज्यादातर लोगों का 70 से 80 फीसदी पैसा तो डूब चुका है जबकि केवल 20 से 30 फीसदी पैसा ही निवेशकों के पास बचा है। ऐसे में निवेशक उसी तरह संभालकर चल रहे हैं, जिस तरह दूध की जली बिल्ली छाछ भी फूंक-फूंक कर ही पीती है।

यही सही तरीका भी है कि निवेशक सोच-विचार करके ही आईपीओ में निवेश करें। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो घाटे का सामना करने के लिए तैयार रहें। बहरहाल, सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से बाजार में तेजी लौटने की उम्मीद कम ही है। क्योंकि आज के दौर में सरकारी उपक्रम भी बहुत भरोसे के नहीं रह गए हैं और निवेशकों में विश्वास बनाने में थोड़ा समय लगेगा।

अन्य सर्वश्रेष्ठ पत्र

आम लोगों को है इन पर भरोसा
उपमा बाजपेयी
गृहिणी, लखनऊ

बाजार को इस समय सार्वजनिक उपक्रम ही मंदी से उबार सकते हैं। आम जनता आसानी से सार्वजनिक उपक्रमों में निवेश कर सकती है। निजी क्षेत्र के शेयरों में निवेश पर जनता को अभी भरोसा करने में समय लगेगा। ज्यादातर सार्वजनिक उपक्रम ब्लू चिप की श्रेणी में आते हैं। लिहाजा आने वाले समय में निवेश का सुनहरा मौका है। आने वाले सुनहरे कल की इबादत अभी से दीवार पर पढ़ी जा सकती है। जब किसी को शेयर बाजार में ही निवेश करना है तो सार्वजनिक उपक्रम एक बेहतर विकल्प है।

सरकार ने ही तो बिठाया है भट्ठा
सुनील जैन ‘राना’
छत्ता जम्बू दास, सहारनपुर

सरकारी नीतियों से बाजार का भट्ठा बैठा है, ऐसे में सरकारी उपक्रम के आईपीओ से निवेशकों को कोई तेजी की संभावना नजर नहीं आती है। वैसे भी रिलायंस पावर के आईपीओ के बाद निवेशकों का आईपीओ से ही विश्वास उठ गया है। ऐसे में सरकारी आईपीओ से राहत मिलना मुश्किल लगता है। सरकारी उपक्रम के आने वाले आईपीओ में बीएसएनएल, जिससे सरकार 40 हजार करोड़ रुपये जुटाने की फिराक में है, वह पूरा बिक जाए, यही गनीमत होगी। चुनावों तक स्थिति बहुत बेहतर नहीं कही जा सकती है।

बहुत उम्मीद करना ठीक नहीं
प्रमोद तिवारी
निदेशक-सनमीडिया, कॉटनग्रीन, मुंबई

पिछले कुछ महीनों से बाजार जिस तरह से हिचकोले ले रहा है, उसको देख कर तो यह अनुमान लगाना कि किस समय बाजार में कितनी गिरावट होगी और उसके अगले दिन बाजार कितना सुधर जाएगा नामुकिन लग रहा है। बाजार से पैसा वसूलने और निवेशकों के बीच विश्वास जगाने के लिए लाये जा रहे सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से बाजार में तेजी आने की बहुत ज्यादा उम्मीद करना भी सही नहीं है। लोकसभा के चुनावी नतीजों के बाद ही सरकारी उपक्रमों के आईपीओ बाजार में कुछ असर छोड़ पाएंगे।

कोमा में बाजार को ऑक्सीजन
दिनेश चंद्र मिश्रा
म.न.-58210, हुसैन गंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

वर्तमान समय में शेयर बाजार में तेजी आने की संभावनाएं कम ही दिखाई पड़ रही हैं। चारो तरफ निराशाजनक माहौल छाया हुआ है। शेयर बाजार से उठते विश्वास से नए डीमैट एकाउंट्स के खुलने में भी तेजी से कमी आई है। इन परिस्थितियों में करारा झटका खाया आम निवेशक अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के आईपीओ से बाजार में तेजी लौटेगी, इसकी संभावनाएं कम ही जान पड़ती हैं। हां , यह संभव है कि ‘कोमा’ में चल रहे सेंसेक्स को थोड़ी सी ऑक्सीजन मिल जाए।

बकौल विश्लेषक

कुछ तो होगा मगर बहुत कुछ की उम्मीद करना ठीक नहीं
आशीष कपूर
सीईओ, इन्वेस्ट शॉपी, नई दिल्ली

नहीं लगता कि सरकारी उपक्रमों द्वारा आईपीओ लाए जाने से शेयर बाजार में बहुत ज्यादा परिवर्तन देखने को मिलेगा। साल 2000-2003 के बीच भी मंदी का दौर आया था और उस वक्त भी बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने आईपीओ लेकर आई थीं। लेकिन शेयर बाजार में बहुत ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला।

हालांकि इसका मतलब यह भी नहीं है कि बाजार में थोड़ी-बहुत भी बढ़त देखने को नहीं मिलती है। अगर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) जैसी कोई बड़ी सरकारी उपक्रम अपने आईपीओ लाती है तो निस्संदेह बाजार में थोड़ी तेजी तो देखने को जरूर मिलेगी।

बहरहाल, आईपीओ के लाने से सबसे ज्यादा फायदा सरकारी उपक्रमों को ही होगा और अगर सरकारी उपक्रम अपने कर्मचारियों को भी शामिल करती है तो निस्संदेह उन कर्मचारियों का फायदा होगा। एसबीआई 1993 में 100 रुपये में अपने आईपीओ लेकर आई थी। आज के मंदी के दौर में भी उसका शेयर 1400-1500 रुपये का है। एसबीआई से निवेशकों को काफी अच्छा रिटर्न मिल रहा है।

निजी कंपनियों के मुकाबले वे काफी कम दरों पर अपने आईपीओ लाती है। अगर बीएसएनएल, नवरत्न सरीखी कंपनियों के आईपीओ की बात करें तो निवेशक इस ओर तेजी से आकर्षित होंगे और इस बात की भी उम्मीद है कि निवेशकों को बेहतर रिटर्न भी जरूर मिलेगा। अगले साल होने वाले आम चुनाव में अगर कोई सरकार बेहतर नीतियों के साथ आती है तो शायद बाजार में जल्द सुधार देखने को मिले और नहीं तो 2010 तक स्थिति सामान्य होनी ही है।
बातचीत: पवन कुमार सिन्हा

सरकारी आईपीओ की कतार से लौटेगी बहार
सुरेश कुमार चौधरी
विशेष सलाहकार, ऑस्ट्रल कोक एंड प्रोजेक्ट लिमिटेड, मुंबई

बाजार की तेजी या मंदी का रुख प्राइमरी मार्केट से नहीं बल्कि सेकेंडरी मार्केट की चाल के आधार पर तय होता है। सेकेंडरी मार्केट में सुधार के इस समय पूरे लक्षण दिखाई देने लगे हैं। आने वाले तीन महीनों के अंदर बाजार में पूरी तरह से स्थिरता का माहौल कायम हो जाना चाहिए। इसके बाद बाजार में सुधार की प्रक्रिया चालू हो जाएगी।

एक साथ कई सार्वजनिक उपक्रमों के आईपीओ आने की खबर से सुधार को और बल मिलेगा। सेंसेक्स भी 15000 अंकों के आस पास ही रहने वाला है। धीरे-धीरे वैश्विक स्थितियां भी सुधरने लगी हैं। मैं मानता हूं कि अभी थोड़ा-बहुत बाजार में हिचकोले देखने को मिल रहे हैं, वह अगले तीन महीनों में शांत हो जाएंगे। इस स्थिति को जानते हुए विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार की ओर फिर से रुख करने लगे हैं।

आम लोगों के मन में एक बात और घर करने लगी थी कि सरकार में जब तक वामपंथी रहेगें, सरकार सुधार के कोई भी कदम नहीं उठा पाएगी। इस समय ऐसी संभावना है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों को आईपीओ लाने के प्रस्तावों को मंजूरी देगी। चुनाव के पहले सरकार सुधार कार्यों में कुछ तेजी जरूर लाएगी।

यह एक बात और कि सरकार आईपीओ से आने वाले धन का इस्तेमाल सामान्य खर्चों में न करके राजकोषीय घाटे को कम करने की बात कर रही है। जिससे लोगो के बीच में इसके दूरुपयोग होने का संदेश भी नहीं जाएगा। यूपीए सरकार द्वारा इस रकम के लिए अलग से एक एकाउंट (राष्ट्रीय निवेश फंड) खोलने की योजना लोगों के विश्वास को और बढ़ाएगी। कहा जा सकता हैं कि सरकारी उपक्रमों के आईपीओ से बाजार में तेजी लौटेगी।
बातचीत:सुशील मिश्र

…और यह है अगला मुद्दा

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First Published : August 18, 2008 | 3:47 AM IST