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खरीदार को मंदी की आस, बाजार चाहे तेजी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 12:04 AM IST

आम जन के लिए मुश्किल हुआ मकान


प्रॉपर्टी का बुलबुला जरूर ही फूटेगा और महंगाई कहीं न कहीं इस बुलबुले को दबाने की कोशिश कर रही है।

उल्लेखनीय है कि भवन निर्माण के लिए बेहद जरूरी सीमेंट और स्टील के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में मकानों के दामों में उछाल आना स्वाभाविक है। नतीजतन आर्थिक दृष्टिकोण से संपन्न लोगों के लिए तो मकान खरीदना भले ही मुश्किल न हो लेकिन आम इंसान के पहुंच से यह जरूर दूर होता जा रहा है। इसके अलावा, बैंको द्वारा भी होम लोन में यदि बड़े पैमाने पर छूट देने की पेशकश की जा रही है तो इससे आम इंसान पूर्णत: अनभिज्ञ है। – परेश पाटिल, साइट इंजीनियर, पेनिनसुला लैंड लिमिटेड, मुंबई

सरकार की घोषणाओं से आएगी तेजी

झोपड़ों और चालों में रहनेवाले लोग अब गगनचुंबी इमारतों में जाने का ख्वाब संजो रहे हैं। सरकार भी चाहती है कि आम इंसान की आम जिंदगी का स्तर सुधरे। मसलन इसी प्रयास के तहत एसआरए योजना के तहत लोगों को 270 वर्गफीट का बिल्ट अप एरिया और 350 वर्गफीट का कारपेट एरिया दिए जाने का फैसला किया गया है। यह घोषणा इसी बात को दर्शाती है कि प्रॉपर्टी की तेजी में बेशुमार गति आने की संभावना है। – आनंद यादव, प्रबंध निदेशक, हर्षा डेवलपर्स एंड कंस्ट्रशन, मुंबई

मुंबई में तो फूट ही चुका बुलबुला

प्रॉपर्टी की तेजी का बुलबुला फूट रहा है और इसका नजारा मुंबई के सभी इलाकों में साफ देखा जा सकता है। जिन इलाकों में मुंबइकर रहने के लिए कतराते थे, वर्तमान परिस्थिति में ऐसे इलाकों में ढूंढने से भी घर नहीं मिल रहे हैं। अमूमन यही हाल मुंबई के उपनगरों में भी साफ नजर आ रहा है।

साथ ही झोपड़पट्टी पुर्नवसन योजना ने प्रॉपर्टी के दामों को इस कदर बढ़ा दिया है कि आम लोगों के लिए किराये के मकान में रहना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। परिणामस्वरुप प्रॉपर्टी का बुलबुला वाकई में फूट चुका है। – श्रीपाद नायक, रियल इस्टेट कंसल्टेंट, मुंबई

मंदी का असर नहीं इस सेक्टर पर

अगर चंडीगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में स्थित रियल एस्टेट सेक्टर की बात करें तो बढ़ती हुई महंगाई और अन्य कारकों का इस सेक्टर पर बहुत ज्यादा प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है।

यहां के रियल एस्टेट मार्केट पहले की तरह ही मजबूत दिखाई पड़ रहे हैं और यह कहना की प्रापर्टी की तेजी का बुलबुला फूटने वाला है, बिलकुल गलत होगा। जहां तक इस सेक्टर में मंदी छाने की बात है तो उसके  लिए मुख्य रूप से मुनाफे के लिए निवेश करने वाले खरीदार जिम्मेदार हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि अब ऐसे निवेशकों का ध्यान प्रापर्टी बाजार से हट चुका है और यही कारण है कि वे इस सेक्टर में निवेश नहीं कर रहे हैं।  – अशोक शर्मा, प्रापर्टी कंसल्टेंट, चंडीगढ़

डिमांड और सप्लाई में हुआ बहुत अंतर

बीते कुछ सालों में तीन शहरों (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकुला) के रियल एस्टेट सेक्टर में जबर्दस्त बूम देखने को मिला है। इन शहरों में बहुत सारी आवासीय परियोजनाएं लाई गईं।

परिणामस्वरूप यहां फ्लैटों की सप्लाई और डिमांड में बहुत ज्यादा अंतर आ गया है। इसमें कोई शक नहीं कि इस अंतर की वजह से यहां के कुछ डेवलपरों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। साथ ही एक सच्चाई यह भी है कि मुनाफे के लिए निवेश करने वाले निवेशकों ने भी इस सेक्टर से निवेश करने से अपने हाथ खींच लिए हैं।

इस वजह से भी  इस क्षेत्र में थोड़ा मंदी का दौर चल रहा है। हालांकि प्रापर्टी और रियल एस्टेट सेक्टर में महंगाई की एक खास वजह आवश्यक बुनियादी जरूरतों (सीमेंट और स्टील) की कीमतों में बढ़ोतरी होना है। – स्मृति शर्मा, गृहिणी, चंडीगढ़

उलटी गिनती शुरू हो चुकी है

साल 2000 में यूनिटेक लिमिटेड ने देश को सबसे पहले ‘रियल एस्टेट’ शब्द दिया। फिर रातों-रात कुकुरमुत्ते की तरह अनेक कंपनियों ने जन्म लिया। माल संस्कृति, रिटेलर शॉप, अनाज भंडारगृह हेतु हर छोटे बड़े गांव-शहर में जमीन की कीमतें रातों-रात आसमान छूने लगीं।

जब निवेशक को समय पर सही सेवा-सुविधाएं प्राप्त नहीं हुई तो ‘शिकायतों’ से कानून व सरकार का शिकंजा कसता गया। आज निवेशक प्रापर्टी क्रय से पूर्व ‘सौदा अनुबंध’ के अनुसार सब कुछ सुनिश्चित करने के बाद ही सौदा करने लगा है, जिससे रियल एस्टेट बूम उल्टी गिनती गिनने लगा है और प्रापर्टी की तेजी का बुलबुला अंतिम सांस ले रहा है।  – संतोष मालवीय ‘प्रेमी’, आरएमएस कॉलोनी चौराहा, 222, मालवीय गंज, इटारसी

उतार-चढ़ाव तो चलता ही रहता है

कोई भी बाजार हमेशा एक जैसा नहीं होता। बाजार में उतार-चढ़ाव होना लाजिमी है। जो बाजार चढ़ता है वह उतरता भी है। पिछले तीन सालों में प्रॉपर्टी बाजार में काफी बूम रहा।

दिल्ली के विकसित व अधिकृत इलाकों में प्रॉपर्टी के बाजार में तीन सालों में चार से पांच गुना तक कीमत में बढ़ोतरी हुई। प्रॉपर्टी बाजार में तेजी बाजार में तरलता की अधिकता के कारण हुई थी। पैसा अधिक होने के कारण व लोन सस्ता होने के  चलते प्रॉपर्टी की जमकर खरीदारी हुई। साधारण कमाने वाले इंसान भी लोन लेकर मकान खरीद लिया।   – दर्शन सिंह, प्रॉपर्टी डीलर, दिल्ली

पंचर है, पर फूटा नहीं है बुलबुला

प्रॉपर्टी बाजार पंचर जरूर हो गया है लेकिन इसका बुलबुला नहीं फूटा है। बाजार में बुलबुला कायम है। इतना जरूर है कि बैंक अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है तो यह बुलबुला फूट सकता है। ऐसा होने पर नए ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।

पांच साल पहले प्रॉपर्टी बाजार में जो बूम आया था वह मुख्य रूप से बैंक के ब्याद की दरों में कमी के कारण ही था। सीआरआर में बढ़ोतरी के कारण आज नहीं तो कल बैंक दरों में बढ़ोतरी भी निश्चित है। कुल मिलाकर आने वाले समय में भी प्रॉपर्टी बाजार की स्थिति अच्छी नजर नहीं आ रही है। – पीयूष कोचर, व्यवसायी, नई दिल्ली

निवेशक हाथ खींच रहे हैं


बाजार जब सख्त होता है तो खरीदारी जरूरत के हिसाब से होती है। मंदी होगी तो आने वाले समय में रोजगार में भी कटौती होगी जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ता है। चाहे वह प्रॉपर्टी बाजार हो या कोई अन्य। रहने के लिए तो घरों की खरीदारी जारी रहेगी लेकिन निवेश के लिहाज से फिलहाल ऐसा नहीं होगा। बूम तभी तक रहता है जब तक बाजार में निवेशकों की संख्या अधिक होती है। प्रॉपर्टी बाजार के निवेशक धीरे-धीरे अपना हाथ खींच रहे हैं। – एसएस इंदौरा, बैंककर्मी, नई दिल्ली

नकली तेजी आई थी पहले

कुछ दिनों पहले तक प्रॉपर्टी बाजार में जो तेजी थी वह कृत्रिम थी। जिनके पास पैसे अधिक थे या जिनके पास काला धन था, उन्होंने प्रॉपर्टी की जमकर खरीदारी की। हर इलाके में चंद पैसेवालों ने मिलकर वहां की अधिकतर बिकाऊ प्रॉपर्टी को खरीद लिया। उसके बाद वे अपने हिसाब से उस प्रॉपर्टी को बेचने लगे।

जब आपके बगल का मकान 40 लाख रुपये में बिकेगा तो जाहिर तौर पर आपके मकान की कीमत भी 40 लाख रुपये हो जाएगी। असली खेल यही हुआ। और इन दिनों यही हो रहा है। – सुबोध कुमार पाठक, अधिवक्ता, दिल्ली

कुछ लोगों का खेल था तेजी

प्रॉपर्टी का बाजार निश्चित रूप से लुढक़ चुका है। पिछले साल-दो साल से जो तेजी नजर आ रही थी वह तो कुछ लोगों ने की थी। बाजार में असली खरीदार नहीं था। कुछ पैसे वाले या यूं कह लीजिए कुछ सटोरिए आपस में ही प्रॉपर्टी का खेल खेल रहे थे।

इन दौरान अगर कोई असली खरीदार फंस जाता था तो वह हलाल हो जाता था। हालांकि यह बात भी सही है कि अर्थव्यवस्था में मजबूती के कारण मोटी तनख्वाह वाले लोगों की संख्या बढ़ गयी। मांग बढ़ने से तेजी जरूर आयी लेकिन इसमें और तेजी इन सटोरियों की वजह से हुई। – आरएस पांडेय, अधिवक्ता, दिल्ली

आगे हालत और नाजुक होगी

प्रॉपर्टी का बाजार धराशायी हो चुका है। वैसे देखा जाए तो कोई भी बुलबुला हमेशा के लिए नहीं रह सकता है। उसका फूटना तय है। यही इस बाजार के साथ भी हुआ है। आने वाले समय में स्थिति और नाजुक हो जाएगी।

क्योंकि बाजार के हालात को देखते हुए ब्याज दरों का बढना निश्चित लग रहा है। ब्याज दरें बढ़ेंगी। लोग किस्त नहीं चुका पाएंगे। मंदी गहराते ही लोगों की नौकरियां जाएंगी। कोई भी बाजार हमेशा के लिए कृत्रिम रूप से तेज नहीं हो सकता है। असली खरीदार व विक्रेता तो होने ही चाहिए।  – संजय, व्यवसायी, नई दिल्ली

मांग में कमी नहीं आई है

गत दो वर्षों में इस उद्योग के हालात बहुत बदले हैं। दो साल पहले हमने 10,000 रुपये प्रति गज के हिसाब से जमीन खरीदी थी वहीं अब जमीन के  लिए 25,000 रुपये प्रति गज तक भुगतान करना पड़ रहा है। इसी दौरान सीमेंट और स्टील जैसी बुनियादी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

साथ ही साथ मजदूरी के लिए भी ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि लागत में काफी इजाफा हुआ है। लेकिन तसल्ली की बात यही है कि मांग में कोई कमी नहीं आई है।  – आनंद प्रकाश गुप्ता, लोनी, गाजियाबाद

गिरावट है मगर मंदी नहीं

प्रॉपर्टी बाजार की मात्रा में जरूर गिरावट आयी है। तीन-चार महीने पहले तक जहां हम महीने में 20 प्रॉपर्टी का सौदा करवाते थे वह घटकर 12-13 पर आ गया है। जमीन की कीमत जरूर कम हुई है। लेकिन अच्छे इलाकों में मकानों की कीमत वैसी ही बनी हुई है। असलियत का पता बेचने वाले या खरीदने वालों को ही होता है। – श्याम, प्रॉपर्टी डीलर, नई दिल्ली

मांग घटने का तो सवाल ही नहीं उठता

पिछले कुछ समय से कीमतों में तो बेतहाशा तेजी आई है लेकिन इसके बावजूद भी मांग कम नहीं हुई है। यदि पिछले एक या डेढ़ साल का ही रुझान देखें तो मांग बढ़ी ही है। दरअसल कीमतें बढ़ रही हैं तो दूसरी ओर लोगों की आमदनी भी बढ़ रही है।

लोगों के पास ऊंची कीमत में भी जमीन-जायदाद खरीदने के लिए पैसा है। एक बात तो सभी जानते हैं कि दिल्ली जैसे शहरों में जमीन की किल्लत है और रहने और ऑफिस स्पेस के लिए जगह की मांग बढ़ती जा रही है। मांग घटने का सवाल ही नहीहै। – मनीष अरोड़ा, सौरव प्रॉपर्टीज, पांडव नगर, दिल्ली

कौन कह रहा है बुलबुला फूटा है

प्रॉपर्टी की कीमत कम हुई है लेकिन जब आप खरीदारी करने जाएंगे तो इसमें कोई कमी नजर नहीं आती है। मैं पिछले बीस सालों से प्रॉपर्टी का काम कर रहा हूं। जिसे रहने के लिए मकान की खरीदारी करनी है उसके लिए कीमत में कोई कमी नहीं आयी है।

पचास लाख की खरीदारी पर अधिक से अधिक दो लाख का डिस्काउंट मिल जाएगा। इसका मतलब यह नहीं है कि प्रॉपर्टी में तेजी कम हो गयी है। आप देखेंगे कि जहां कही भी डेवलपर्स काम करा रहे हैं वहां न तो उनका काम रुका है और न ही बुकिंग में कोई कमी है। फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि प्रॉपर्टी बाजार का बुलबुला फूट गया है। – महिंदर गोयल, प्रॉपर्टी डीलर एंड डेवलपर, दिल्ली

पुरस्कृत पत्र

फूटने नहीं बल्कि पिचकने का इंतजार


यह अर्थशास्त्र का प्रमाणित नियम है कि हर क्षेत्र में तेजी के बाद मंदी व मंदी के बाद तेजी का दौर आता है। ऐसे में प्रॉपर्टी की तेजी का बुलबुला फूटना ही है।

पिछले वर्षों में प्रापर्टी क्षेत्र में जो आसामान्य तेजी आई थी उसके लिए भू-माफियों व राजनीतिबाजों की सांठगांठ, प्रशानिक अधिकारियों की भ्रष्टता, तथाकथित विकास की ऊंची दर की जानबूझ कर पैदा की गई भ्रम की स्थिति, बैंकों से कम ब्याज दरों में असामान्य वृध्दि, शेयर बाजार में आई तेजी से बिना मेहनत के हुई कमाई एवं एक सीमा तक विदेशी विनियोजकों की भारत के प्रति आस्था जैसे कारण जिम्मेदार रहे हैं।

प्रॉपर्टी बूम के कारण मांग से अधिक मकान बन गए हैं। ऐसे में प्रापर्टी की तेजी से बुलबुले की हवा तो तेजी से निकलने लगी है। इंतजार उसके फूटने का नहीं बल्कि पिचकने
का है।  – प्रो.मानचंद खंडेला, निदेशक, सुबोध प्रबंध संस्थान, जयपुर

सर्वश्रेष्ठ पत्र

चोटी के बाद तो ढलान ही होगी

इसमें कोई दो राय नहीं है कि पिछले कुछ वर्षों से प्रॉपर्टी में बहुत तेजी आई है। औद्योगीकरण के कारण जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। पहले छोटे किसानों ने पैसे के लालच में औने-पौने दामों में अपनी जमीनें बेच दी।

आज उसी जमीन की कीमत सात-आठ गुना है। हरिद्वार में पिछले 5-6 वर्षों में जमीन की कीमतें कई गुना बढ़ी हैं। देश के महानगरों व बड़े शहरों में लोग जमीन को बेचना व खरीदना तक भूल गए हैं। प्रापर्टी डीलरों का धंधा भी मंदा पड़ गया है।पहाड़ की चोटी के बाद ढलान शुरू होती है। – मनोज कुमार, शोधार्थी एवं प्राध्यापक, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार

मुंहमांगी कीमतों पर लगा ब्रेक

प्रॉपर्टी के बाजार में बीते दिनों लोग मुंहमांगी कीमत मांगने लगे थे। जिस पर अब ब्रेक लग गया है। इससे बाजार में नकारात्मक रुख ज्यादा हावी हो गया। बाजार से क्रेता व विक्रेता दोनों ही गायब हो गए।

और जब बाजार से क्रेता व विक्रेता दोनों ही गायब हो जाएंगे तो स्वाभिवक रूप से जो बुलबुला था, वह नहीं रहा। अभी सिर्फ वही लोग प्रॉपर्टी की बिक्री कर रहे हैं, जिन्हें जरूरत है। दिल्ली में रेट टूटने का असर एनसीआर पर भी पड़ेगा। दिल्ली में कम कीमत पर प्रॉपर्टी उपलब्ध होने पर लोग एनसीआर का रुख क्यों करेंगे।  – नरेश गुप्ता, जय श्री कृष्णा प्रॉपर्टीज एंड बिल्डर्स, नई दिल्ली

स्टील और सीमेंट की मार पड़ी है

अमेरिका अपना अनाज बायो ईंधन और जानवरों को खिला कर खत्म कर रहा है और पेट भरने के लिए वह भारत और चीन जैसे देशों की ओर ताकता है। सही है कि भारत में खेती का स्तर सुधारने की कोशिश नही की गयी। खेती को उन्नत नही किया गया पर अमेरिकी आरोप सरासर गलत है।

आस्ट्रेलिया का सूखा, विकसित देशों में घटती खेती इसके लिए ज्यादा दोषी हैं। आंकड़े बता रहे हैं कि भारत में अनाज की खपत अमेरिका की तुलना में कम बढ़ी है। साथ ही भारत में बीते 3 सालों से उपज भी ठीक है।  – श्रवण कुमार, माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल

बुलबुला छोटा हुआ है, फूटा नहीं

मेरा मानना है कि प्रॉपर्टी बाजार में थोड़ी स्थिरता जरूर है लेकिन इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। कोंडली में मैं सोसायटी बना रहा हूं और आज भी रोजाना बुकिंग का काम हो रहा है। प्रॉपर्टी का बुलबुला फूटा नहीं है। इसका आकार जरूर छोटा हो गया है।

दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल तक प्रॉपर्टी का बाजार गर्म रहेगा। मुद्रास्फीति की बढ़ती दरों को देखते हुए बाजार आने वाले समय में ब्याज दरों के रुख को भांपने में लगा है। ब्याज दर की स्थिति साफ होने के बाद ही प्रॉपर्टी बाजार का असली रुख सामने आएगा।  – सुरिंदर, जेके अग्रवाल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली

बकौल विश्लेषक

निवेशक भले ही हों नदारद, वास्तविक खरीदार अभी हैं


प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट सेक्टर में दो तरह के खरीदार हैं। एक जो निवेश करते हैं और प्रापर्टी की कीमत बढ़ने के साथ ही उसे ऊंची कीमत पर बेच देते हैं और दूसरे, वास्तविक खरीदार हैं, जिन्हें वास्तव में घर की आवश्यकता है।

इसमें कोई शक नहीं कि इस सेक्टर में निवेश करने वालों में कमी देखने को मिल रही है और इस कमी के लिए मौजूदा स्थिति (आर्थिक मंदी) को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन जहां तक वास्तविक खरीदार की बात है तो उसमें कमी नहीं आई है। यह सही है कि पिछले कुछ सालों में होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हुई है लेकिन यह आज भी सबसे सस्ता लोन है।

आज सीमेंट, स्टील, सरिया आदि के दाम आसमान छू रहे हैं। इसके साथ-साथ इस सेक्टर में डिमांड और सप्लाई में भी अंतर देखने को मिल रहा है। बिल्डर भी स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी जितनी सप्लाई है उस हिसाब से घरों की डिमांड उतनी नहीं है। यह एक वजह हो सकती है, जिसके कारण यहां मंदी देखने को मिल रही है। इस सेक्टर में बीएचके (बेडरूम, हॉल, किचेन) की मांग अधिक है जबकि लक्जरी हॉउसिंग की मांग ज्यादा नहीं है।

लिहाजा बिल्डर भी अपेक्षाकृत कम कीमत वाले घर बनाने की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। शहरों में आमतौर पर पति-पत्नी दोनों कमाई करते हैं और उनके पास अतिरिक्त आय है तो वे सबसे पहले घर खरीदने की सोचते हैं। लिहाजा भविष्य में कोई मंदी नहीं आने वाली है। –     वी. के. खन्ना, प्रबंध निदेशक, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड

बातचीत: पवन कुमार सिन्हा

फिलहाल मंदी, पर जल्द ही लौटेगी पुरानी हरियाली


भारत सहित पूरी दुनिया में जिस तरह के मौजूदा हालात बने हुए हैं, उससे सभी सेक्टरों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है और प्रापर्टी एवं रियल एस्टेट सेक्टर इससे अछूता नहीं है। इस सेक्टर में एक-दो साल पहले जो बूम देखने को मिल रहा था, उसमें थोड़ा फीकापन जरूर आया है।

बहरहाल, इस सेक्टर में आई मंदी बहुत ज्यादा समय के लिए नहीं रहेगी। वर्तमान में लोगों की आय जिस तरह बढ़ी है, उससे उनकी जरूरतें भी बढ़ी हैं। किसी भी व्यक्ति की सबसे दिली-तमन्ना होती है, उसका अपना घर हो। इस लिहाज से आने वाले समय में घर की मांग में फिलहाल कोई कमी नहीं आएगी।

हां यह हो सकता है, क्योंकि इस वक्त मंदी का दौर चल रहा है तो लोग थोड़ा इंतजार करना चाहेंगे। लेकिन जैसे ही स्थिति सामान्य होगी लोग घर लेने की ओर भागेंगे और तब इस सेक्टर में एक बार फिर बूम देखने को मिलेगा। मुझे लगता है कि आने वाले 6-8 महीनों में इस सेक्टर के दिन फिरेंगे। इस सेक्टर में निवेश करने के लिए यह सबसे सही समय है, क्योंकि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में फिर से हरियाली दिखाई देगी।

आज की तारीख में संयुक्त परिवार की अवधारणा खत्म हो चुकी है और लोग मूल परिवार (न्यूक्लियर फैमेली) में रहना चाहते हैं। ऐसे में घरों की डिमांड में कमी नहीं आएगी बल्कि डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। इसमें कोई शक नहीं कि सीमेंट और स्टील की बढ़ती कीमतों ने इस क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। यही सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं, जिसकी वजह से इस सेक्टर पर मंदी की मार पड़ रही है।  – श्रीनिवास शर्मा, प्रबंध निदेशक, श्रीनि इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड

बातचीत: पवन

…और यह है अगला मुद्दा

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First Published : May 19, 2008 | 4:18 AM IST