कोका-कोला ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को पूरा करने की कोशिश के तहत सुनामी की आपदा को झेलने वाले दक्षिण भारत के लोगों को 41 घर दिये हैं।
हालांकि यह कोई अलग कदम नहीं है। इससे पहले भी दो प्रोजेक्ट के तहत कोका-कोला ने सूनामी से प्रभावित क्षेत्र में में हजारों मछुआरों को जीविका का साधन मुहैया कराया है। गौरतलब है कि केरल के प्लाचीमादा पंचायत ने जमीन के पानी को प्रदूषित करने के लिए कंपनी के खिलाफ आरोप लगाया था।
यह सभी उपाय कंपनी ने उस जगह पर अपनी कंपनी की संघर्षशील स्थिति को सुधारने के लिए किया था। कोका-कोला की इस सामाजिक उदारता का फायदा उन्हें मिल रहा है जो लोग सुनामी के बाद बचे हुए लोगों में तो जरूर थे लेकिन स्थानीय प्रशासन की सूची में शामिल होने से बच गए थे। इस कंपनी ने रेडक्रॉस की मदद से उन लोगों को ढूंढ निकाला जो इससे अलग हो गए थे। यह प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के साथ जिला प्रशासन के सहयोग से पूरा किया गया। इसके तहत सुनामी पीड़ित वैसे लोगों को इस सूची में शामिल किया गया जो पहले की सूची में शामिल नहीं थे।
कोका-कोला के एक अधिकारी का कहना था, ‘हमलोगों ने रेडक्रॉस के साथ मिलकर कोलाचेल में 41 घरों को बेघरों के हवाले किया गया है। हमलोगों ने तमिलनाडु में पुनर्वास कार्यक्रम के तहत इस को शुरू किया था।’ साइमन कॉलोनी ऐसा इलाका है जहां सबसे ज्यादा बर्बादी हुई वहां 5 और नए मकान बनाए जा रहे हैं। के रल की राजधानी तिरूवनंतपुरम से कोलाचेल की दूरी 2 घंटे से भी कम की है और यह कन्याकुमारी के रास्ते में पड़ता है।
कोका-कोला ने इन मकानों के लिए 1 करोड़ रुपये खर्च किए हैं जबकि प्रशासन ने 10 लाख रुपये खर्च किए हैं। कन्याकुमारी की डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ज्योति कुमारी का कहना है, ‘कोका-कोला और रेडक्रॉस हाउसिंग सोसाइटी ने यहां काफी कुछ बदला है।’ इस प्रोजेक्ट के तहत कुड्डालुर में बंदरगाह भी बनाया जा रहा है। इससे स्थानीय मछुआरों को अपने नाव को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और उनके परिवहन संबंधी परेशानियां भी दूर होंगी। इसके साथ उनकी मछलियों को रखने और उनके भंडारण में भी मदद मिलेगी। इस तरह के बंदरगाह के जरिए इस क्षेत्र में रहने वाले 3000 परिवारों की जरूरतें पूरी हो सकती हैं।
कोका-कोला की दूसरी बड़ी आपदा राहत योजना वेलांकनी में ‘विद्यालयी नोकी’ के नाम से चल रही है, जहां लोगों को रोजगार दिलाने की कोशिश की जा रही है। दक्षिणी भारत के तटीय इलाके में सुनामी आपदा से बर्बाद हुए लोगों को राहत देने के लिए जिन कंपनियों ने कोशिश की है उनके साथ कोका-कोला भी मिलकर काम करना चाहता है। नासकॉम ने पहले अपने सहयोगी एचपी के साथ मिलकर योजनाओं पर काम किया, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विस और विप्रो के अलावा भी कई कंपनियों ने सुनामी पीड़ित लोगों को आवास दिलाने के लिए काम कर रही है।