Categories: लेख

रिटेल के रण में आती कंपनियां

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 2:04 AM IST

अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद (इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस यानी इक्रियर) ने हाल ही में बड़े रिटेल स्टोरों के आने से पड़ने वाले प्रभावों पर अध्ययन किया है।


रिपोर्ट के मुताबिक संगठित रिटेल श्रंखलाएं अपना कारोबार बढ़ाने के लिए नई और कारगर रणनीति अख्तियार कर रही हैं। दरअसल वे तेजी से बढ़ते इस बाजार में आगे निकलना चाह रही हैं।

इस रिपोर्ट में सुभिक्षा, टाटा की रिटेल इकाई ट्रेंट, फ्यूचर समूह, आईटीसी, स्पेंसर, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और मदर डेयरी के रिटेल स्टोरों को शामिल किया गया है।

ये कंपनियां बाजार में पैठ बनाने के लिए हर तरह का व्यापार मॉडल अपना रही हैं और अपनाने को तैयार दिख रही हैं, फिर चाहे  वह अपने दम पर अपना ब्रांड चमकाना हो, किसी दूसरी कंपनी से गठजोड़ करना हो, बैकवर्ड इंटीग्रेशन मॉडल, सहकारी मॉडल हो या कोई और मॉडल, ये कंपनियां बाजार में जमने के लिए किसी भी तरह का मॉडल अपनाने को तैयार हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार चेन्नई की रिटेल कंपनी सुभिक्षा की रणनीति कम कीमत पर अधिक से अधिक चीजें बेचने की है। सुभिक्षा के स्टोर बहुत सजे-धजे नहीं दिखते हैं, लेकिन कंपनी अपनी कम कीमत वाली रणनीति के साथ ही बाजार जीतना चाहती है। सुभिक्षा की रणनीति छोटे आकार के स्टोर खोलने की है। वह यह भी चाहती है कि उसके दो स्टोरों के बीच अधिक दूरी न हो। सुभिक्षा के स्टोर 1,000 से 15,000 वर्ग फीट में हैं और ये घनी आबादी के बीच ही हैं।

आरपीजी समूह के रिटेल स्टोर ‘स्पेंसर’ ने बाजार को साधने के लिए दूसरी रणनीति अपनाई है। कंपनी कुछ बड़ी जगहों पर बड़ा स्टोर खोल रही है जबकि छोटी-छोटी जगह ‘स्पेंसर्स डेली’ और ‘स्पेंसर्स एक्सप्रेस एंड फ्रेश’ नाम से छोटे स्टोर खोल रही है। स्पेंसर अपने स्टोरों में बेचने के लिए विदेशों से अच्छी क्वालिटी वाला सामान मंगा रही है। कंपनी का मानना है कि इससे वह ग्राहकों को आकर्षित करने में कामयाब रहेगी। वह अपने पुराने नाम ‘स्पेंसर एंड कंपनी’ नाम से लोगों को लुभा रही है।

इस होड़ में टाटा की ‘ट्रेंट’ भला क्यों पीछे रहे। ‘ट्रेंट’ अकेले अपने दम पर बाजार में दबदबा बढ़ाना चाहती है। कंपनी उच्च मध्य वर्ग और मध्य वर्ग के ग्राहकों पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहती है। इसके लिए ‘ट्रेंट’ बढ़िया क्वालिटी वाले उत्पादों को किफायती कीमतों में लोगों तक पहुंचाना चाहती है। उसके स्टोरों में रोजाना औसतन 800 से 3,000 लोग आते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार किशोर बियाणी का फ्यूचर समूह आक्रामक रणनीति अपनाए हुए है। बियाणी का ‘बिग बाजार’ हर उम्र और हर वर्ग के ग्राहक को अपनी ओर खींचना चाहता है। बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कंपनी देश भर में अपने रिटेल स्टोरों की संख्या बढ़ाना चाहती है। कंपनी के एक लाइफ स्टाइल स्टोर में औसतन 1,000 लोग रोज आते हैं जिनमें से 350 लोग खरीदारी भी करते हैं।

वैल्यू सेगमेंट में तकरीबन 3,000 ग्राहक रोजाना आते हैं और उनमें से 220 से 250 लोग रोजाना खरीद करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006-07 में रिटेल में 6472 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। यदि प्रति वर्ग फीट के हिसाब से बिक्री को देखें तो यह 8,298 रुपये प्रति वर्ग फीट के आसपास बैठती है। इस रिपोर्ट में 1,070 स्टोरों पर अध्ययन किया गया है जो लगभग 53 लाख वर्ग फीट जगह में फैले हुए हैं।

कंपनियों की योजना 2010 तक इन स्टोरों की संख्या बढ़ाकर 6,600 करने की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रिटेल स्टोर तीन तरीकों से आगे बढ़ रहे हैं। पहला तो अधिग्रहण- जिसमें इनको जमा-जमाया कारोबार मिल जाता है जिससे बहुत फायदा होता है। इसके जरिये इन कंपनियों को कर्मचारी, बुनियादी ढांचे और और प्रॉपर्टी ढूंढने की दिक्कत खत्म हो जाती है। इनमें भी अधिकतर कंपनियां विदेशी होती हैं, जबकि कुछ कंपनियां तो अधिग्रहण के साथ-साथ संयुक्त उपक्रम वाले मॉडल अपना रही हैं।

First Published : May 28, 2008 | 11:52 PM IST