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दोहरी डिग्री में देश और विदेश का मजा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 7:05 AM IST

अब केवल एक मैनेजमेंट डिग्री से काम नहीं चल रहा है, भले ही उस पर किसी अच्छे भारतीय या विदेशी कॉलेज का ठप्पा ही क्यों न लगा हो।


नौकरी देने वाले लोग ऐसे छात्रों को पसंद कर रहे हैं जिनकी शिक्षा विविध आयाम से जुड़ी हो। ऐसे में कुछ संस्थान विदेशी संस्थानों की मदद से दोहरी डिग्री वाले पाठयक्रम चला रहे हैं। इस तरह के पाठयक्रमों के छात्र, पहले साल का पाठयक्रम भारत में पूरा करते हैं और दूसरा साल विदेशी संस्थान में गुजारते हैं।

मिसाल के तौर पर भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (आईआईएम-ए) ने पहला दोहरी डिग्री वाला पाठ्क्रम शुरु किया है। आईआईएम-ए ने इसेक बिजनेस स्कूल पेरिस के साथ साझेदारी में 2006 में यह पाठयक्रम शुरू किया। आईआईएम-ए ने दो डिग्री वाले पाठयक्रम के लिए इटली की बोकोनी विश्वविद्यालय के साथ भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और जल्द ही वह टैक्सस विश्वविद्यालय के साथ इसी तरह का समझौता करने वाली है।

शैक्षणिक जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की दोहरी डिग्री वाले कार्यक्रमों के लिए लोगों का रुझान बढ़ना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। छात्र को दुनिया के सबसे टॉप मैनेजमेंट स्कूल से दो मैनेजमेंट डिग्री हासिल करने का मौका मिलता है। वे कहते हैं कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का एक्सपोजर काफी मायने रखता है। ईआईएम लखनऊ  ने भी इस तरह के चलन को शुरू किया।

उसने 2003 में यूरोपियन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (ईएससीपी-ईएपी) के साथ मिलकर दोहरी डिग्री वाले कार्यक्रम को लॉन्च किया। हर साल कम से कम 6 छात्र इस कोर्स को करते हैं। आईआईएम लखनऊ  में वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय संबधों के अध्यक्ष देवाशिष दासगुप्ता के मुताबिक पहले साल के शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर छात्रों को चुना जाता है।

इस चयन में इस बात का ख्याल रखा जाता है कि वे दुनिया में संस्थान के चेहरे को पेश करने की क्षमता रखते हों और उन्हें पहले से ही विदेश का एक्सपोजर मिला हो। दासगुप्ता का कहना है, ‘हमारे टॉप 6 छात्र दोहरी डिग्री के लिए चुने जाते हैं जबकि ईएससीपी-ईएपी में 1 से लेकर 3 छात्र भेजे जाते हैं। इस तरह की साझेदारी के जरिए छात्रों को अंतरराष्ट्रीय जगत का एक्सपोजर तो मिलता ही है ।’इस तरह के कार्यक्रमों की टयूशन फीस को दोनों संस्थान मिलकर तय करते हैं ।

प्रतिभाशाली छात्र इस तरह के कार्यक्रमों के तहत पूरा या फिर आधी छात्रवृत्ति पा सकते हैं। देश में तेजी से विस्तार कर रहा इंस्टीटयूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च जल्द ही दोहरी डिग्री वाले कार्यक्रम स्कॉटलैंड के स्टर्लिंग विश्वविद्यालय के साथ मिलकर लॉन्च करने वाला है। इस तरह का ट्रेंड दूसरे तरह के संस्थानों में भी मशहूर हो रहा है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई ने भी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के साथ दोहरी डिग्री वाले कार्यक्रम के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी तरह इंस्टीटयूट ऑफ क्लिनिकल रिसर्च  भी ब्रिटेन की क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी के साथ दोहरी डिग्री वाला कार्यक्रम चला रहा है।

First Published : June 24, 2008 | 10:44 PM IST