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सिर चढ़कर बोलता गूगल का देसी जादू

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 06, 2022 | 11:01 PM IST

गूगल का जादू अब इस कदर दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है कि उसके फैंस ने तो उसे भगवान का दर्जा दे दिया है।


वैसे, दैवीय ताकत इसमें है या नहीं यह तो नहीं पता, लेकिन उसे ताबड़तोड़ पैसे कमाने का जादू बहुत ही अच्छी तरीके से आता है। आज इस गजब के जादूगर के पिटारे में आपको मैप्स, ईमेल, विडियो, अल्टरनेटिव एनर्जी इनवेस्टमेंट जैसे कमाल के औजार मिल जाएंगे। यह बात हम नहीं, बल्कि हावर्ड बिजनेस रिव्यू कह रहा है।


इसलिए इस बात पर ताज्जुब भी नहीं होना चाहिए कि उसने अपने सुपरहिट विडियो शेयरिंग वेबसाइट, यूटयूब के भारतीय संस्करण का लॉन्च एक जादूगर के हाथों से ही करवा। यह जादूगर हैं सुहानी शाह। यूटयूब के जरिये लोग-बाग दुनिया भर के लोगों द्वारा पोस्ट किए गए वीडियोज को ऑनलाइन देख सकते है।


साथ ही, वे चाहें तो अपने विडियो भी इस वेबसाइट पर पोस्ट कर सकते हैं। इस वेबसाइट को अक्टूबर, 2006 में गूगल ने खरीदा था। शाह को इस वेबसाइट के भारतीय वर्जन के लॉन्च के मौके पर कोई शो करने के लिए नहीं बुलाया गया था। यह बाला तो वहां यह बताने पहुंची थी कि कैसे यूटयूब की वजह से दु्निया भर के लोगों ने उसके बारे में जाना। सुहानी उस मौके पर मौजूद पांच बिजनेस पार्टनर्स में से एक थी।


वहां पर यूटयूब की दूसरी बिजनेस पार्टनर थी एनडीटीवी, जो अपने एक नए प्रोग्राम के लिए यूटयूब के वीडियोज का अच्छा-खासा इस्तेमाल करती है। एनडीटीवी नेटवर्क्स के सीईओ विक्रम चंद्रा ने स्वीकारा कि , ‘मुझे यहां कई ऐसे जबर्दस्त विडियो मिले, जिससे उम्मीद है कि मैं एक दिन काफी अच्छी गिटार बजाना सिख जाऊंगा।’


इस वेबसाइट पर तो आईआईटी, मद्रास ने भी अपने 1600 लेक्चर डाल रखे हैं। इस प्रीमियर शिक्षण संस्थान की योजना तो इन लेक्चर्स की तादाद को इस साल के अंत तक 6000 करने की है। ‘मैंने प्यार किया ‘ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाने वाली राजश्री फिल्म प्रोडक्शन कंपनी की एक नई कंपनी राजश्री मीडिया ने तो अकबर-बीरबल की कहानियों पर 90 एपीसोड बनाने का फैसला किया है, जिसे वह यूटयूब पर डालेगी।


इस मौके पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय में संयुक्त सचिव लीना नंदन ने कहा कि उनका मंत्रालय दुनिया की पहली सरकारी एजेंसी जिसने अपने किसी कैंपेन के प्रचार-प्रसार के लिए इस वेबसाइट का सहारा लिया हो। पर्यटन मंत्रालय ने अपने अतुल्य भारत कैंपेन के लिए यूटयूब का सहारा लिया था।


अनोखी पहल


इस वक्त यूटयूब कई ऐसे गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) से बात कर रही है, जो उत्तर प्रदेश के गांवों के स्कूल में पढ़ा रहे टीचरों का विडियो बनाने के काम में जुटी हुई है। अगर यह बातचीत कामयाब रही तो इन वीडियो को ऐसे गांवों में दिखाया जाएगा जहां स्कूल नहीं हैं, ताकि वहां भी शिक्षा की ज्योत जलाई जा सके।


अमेरिकी शहर सैन ब्रुनो में 2005 में जन्में यूटयूब का यह भारतीयकरण हो रहा है। बॉम्बे यूनिवर्सिटी में पढ़ी यूटयूब की इंटरनैशनल मैनेजर सकीना अर्सीवाला का कहना है कि,’यूटयूब के भारतीय साइट में हिन्दुस्तानी लोगों के लिए खासतौर पर बनाई गईं चीजें होंगी।


साथ ही, हम इसके जरिये भारतीय कंटेंट को भी दुनिया तक पहुंचाएंगे।’ इस बात से गूगल इंडिया के मैनेजिंग डाइरेक्टर शैलेश राव भी इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है कि, ‘यह दुनिया के लिए एक बड़ी सेवा होगी। दुनिया भर के लोग-बाग भारत के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। सचमुच यह एक काफी बड़ी कम्युनिटी के बनाने की शुरुआत है।’


भारत की खोज


पिछले दो सालों में तो गूगल इंडिया ने तो यही कम्युनिटी बनाने का काम ही तो किया है। इस काम मुमकिन हो पाया उसके भारत को अपनाने के बारे में बातें करने के बजाए उसे सचमुच अपनाकर। आज की तारीख में गूगल.को.इन पर आप हिन्दी, बंगाली, मराठी, तमिल और तेलुगू भाषा में बड़े मजे के साथ सर्च कर सकते हैं।


उसे पता है कि भारत में से केवल 13 फीसदी लोग-बाग ही अंग्रेजी जानते हैं। इसलिए तो उसने पांच मई को गूगल ट्रांसलेशन सर्विस की शुरुआत की है। इससे बस माउस पर क्लिक करते ही आप अंग्रेजी में लिखी गई चीजों को हिन्दी में तब्दील कर सकते हैं। अगर आप चाहें तो यह तो आपके लिए पूरे के पूरे वेबपेज को ही हिन्दी में तब्दील कर देगा।


ऐसी बात नहीं है कि इससे केवल अंग्रेजी को ही हिन्दी तब्दील किया जा सकता है। आप चाहें तो आप हिन्दी में कुछ लिखकर उसे अंग्रेजी में भी तब्दील कर सकते हैं। अगर किसी मुद्दे पर आपके मन में विचार कुलबुला रहे हैं, तो आप ब्लॉग बनाकर उसके बारे में हिन्दी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम भी लिख सकते हैं। अब गूगल ने लोकल सर्च भी साइबर स्पेस में उतार दिया है। साथ ही, आप चाहें तो अब एसएमएस के जरिये भी गूगल सर्च का फायदा उठा सकते हैं।


हिन्दुस्तान की अहमियत


क्या आपको पता था कि गूगल का बेंगलुरु का दफ्तर उसका अमेरिका के बाहर बनाया गया पहला रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर है। इसे बनाया गया है कि वर्ल्ड क्लास नए उत्पादों को बनाने और उन्हें दुनिया भर के बाजार में लॉन्च करने के लिए।


जिस गूगल इंडिया लैब की घोषणा पिछले साल की गई थी. वह आज की तारीख में इस कंपनी ने ऐसे उत्पादों का टेस्टिंग ग्राउंड बन गया है. जो अभी विकास की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और जिनके बेहतरी के लिए मार्केट से फिडबैक चाहिए। अमेरिका, चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स और स्पेन के बाद भारत आठवां ऐसा देश जिसमें गूगल ने खास उसी देश के लिए अपना कंट्री फोकस्ड लैब खोला है।


भारत में गूगल के लैब उसके खास तौर भारतीय बाजारों के लिए बनाए गए उत्पादों को टेस्ट किया जाता हैं मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी में आईटी सेक्टर के प्रमुख राजेश जैन का कहना है कि, ‘गूगल ने कम्युनिटी बनाने की जरूरत को काफी अच्छी तरह से पहचाना है। यह इंटरनेट सर्च के मामले में जाहिर तौर पर लोगों की पहली पसंद बन चुका है। अपनी इस पोजिशन का इस्तेमाल उसने अपने दूसरी इंटरनेट सर्विसेज को पॉपुलर बनाने में किया है।’


जरा हटकर हैं हम


कुछ देशों में कंपनियों को खुद को वहां के हालात के मुताबिक ढालने की जरूरत होती है। भारत में तो यह जरूरत काफी हद तक महसूस की जाती है। इसकी वजह है, यहां बोली जाने वाली तरह-तरह की जुबान और संस्कृति। साथ ही, अपने देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने का प्रोफाइल पश्चिमी मुल्कों से काफी हटकर है।


दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट मार्केटों में से एक होने के बावजूद भारत इकलौता ऐसा मुल्क है, जहां इंटरनेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल दफ्तरों, स्कूलों और साइबर कैफे में होता है।  राव का कहना है कि, ‘हर देश की अपनी अलग परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए तो इनफॉर्मेशन जुटाने के लिए एक ऐसे तरीके की जरूरत है, जो तर्कसंगत हो, उपयोगी हो और लोगों के लिए मतलब रखती हो।’


अपने देश की इन्हीं अलग परिस्थितियों की वजह से तो कई बड़ी कंपनियों को यहां आने के अपने प्लान को ठंडे बस्ते को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। अपने देश में केवल 5.3 फीसदी आबादी की पहुंच इंटरनेट तक है, जबकि अमेरिका में तो 71 फीसदी आबादी की पहुंच इंटरनेट तक है। ब्राजील और चीन जैसे विकासशील देश भी भारत से इस मामले में कोसों आगे हैं।


ब्राजील में 22.4 फीसदी और चीन की 15.9 फीसदी आबादी की पहुंच इंटरनेट तक है। ब्रॉडबैंड के मामले में तो अपना मुल्क और भी फिसड्डी है। यहां केवल इसकी पहुंच केवल 2-3 फीसदी लोगों तक है, जबकि द. कोरिया में इसकी पहुंच 90 फीसदी आबादी तक है। वहां इसकी असल वजह लोगों की गेमिंग को लेकर दीवानगी है। इसी वजह से तो भारत में इंटरनेट पर विज्ञापनों से कमाई भी काफी कम होती है।


पिछले साल इंटरनेट पर विज्ञापन से होने वाली देसी कमाई केवल 225 करोड़ रुपये थी, जबकि अमेरिका में तो यही कमाई 60 हजार करोड़ रुपये की थी। हालांकि, गूगल वहां से सोचना शुरू करती है, जहां कई लोग सोचना बंद कर देते हैं। कंपनी के ग्लोबल ऑपरेशंस के चीफ एग्जिक्यूटिव इरिक स्कडमिट का कहना है कि दुनियाभर से सूचनाओं को इकट्ठा करने और इसे हर शख्स तक मुहैया कराने के कंपनी के मिशन में लगभग 300 साल का समय लगेगा।


कंपनी को आगे बढ़ाने के तहत इस तिमाही के लिए उन्होंने कई लक्ष्य तय किए हैं। यूटयूब इंडिया के मामले में कंपनी के रूख को भी देखकर यह बात पता चलती है। राव और अर्सीवाला का कहना है कि उनका फोकस राजस्व के बजाय कम्युनिटी पर है।


ऑनलाइन मदद


गूगल इंडिया में इस बाबत रणनीति पहले ही बन चुकी है। रणनीति के तहत ऑनलाइन विज्ञापनों को मदद पहुंचाने के लिए बिजनेसों को गाइड करने की योजना है। विज्ञापन संबंधी रणनीति के तहत कंपनी ने 5 टूल तैयार किए हैं।


फाइनैंशल सर्विसेज, लोकल एंड क्लासिफाइड, मीडिया एंड एंटरनेटमेंट और टेक्नोलोजी, हेल्थ एंड कम्युनिकेशन। इन सेवाओं की देखरेख संबधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों द्वारा की जाती है। इसके अलावा विज्ञापन और मीडिया की खरीदारी से जुड़ी एजेंसियों को सलाह देने के लिए टीम का भी गठन किया है।


इन एजेंसियों को यह बताया जाता है कि किस तरह ऑनलाइन विज्ञापन उनकी मीडिया प्लानिंग का हिस्सा बन सकता है। इसके बाद एडवड्र्स और एडसेंस जैसे अभियान भी चलाए जा रहे हैं। एडवड्र्स के तहत कॉस्ट-पर-क्लिक के जरिये विज्ञापनों को खरीदा जा सकता है। साथ ही.  इसमें बजट लेवल तय करने और इसमें फेरबदल की भी गुंजाइश होती है। एडवड्र्स के विज्ञापन गूगल सर्च रिजल्ट के साथ नजर आते हैं।


ये सर्च के साथ कंटेट साइटों पर भी होते हैं। गूगल की टेक्नोलोजी काफी कारगर है और एडवड्र्स पब्लिशर्स की वेबसाइट से जुड़ जाता है। गूगल विज्ञापन मुहैया कराता है और पब्लिशर्स को विज्ञापन प्रदाताओं के संबंध में कोई चिंता करने की जरूरत नहीं होती। किसी दिन यूटयूब पर यूजर चार्ज शुरू हो जाएगा।


अर्सीवालिया तुरंत इस उम्मीद पर अपनी प्रतिक्रिया देने से नहीं चूकतीं। भारत में यूटयूब के 50 लाख यूजर्स हैं। पिछले साल से हर महीने इसके यूजर्स में 2 लाख की बढ़ोतरी हो रही है। इस बढ़ोतरी के मद्देनजर भारत कंपनी के टॉप 30 बाजारों की सूची से उछलकर टॉप 15 बाजारों में शुमार हो गया।


उज्जवल भविष्य


यहां यूटयूब इंडिया भविष्य के बारे में सवाल उठना लाजिमी है। अगर सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाए तो यह बहुत बुरा नजर नहीं आता। राजश्री मीडिया के प्रबंध निदेशक रजत बड़जात्या कहते हैं कि आने वाले दिनों में बच्चे टीवी के बजाय इंटरनेट पर अपना ज्यादा वक्त गुजारेंगे।


केपीएमजी के जैन के मुताबिक, इंटरनेट विज्ञापन का बाजार भले ही अभी बहुत छोटा हो, लेकिन  5 साल में इसका विकास 50 फीसदी सालाना की चक्रवृध्दि दर से होने की उम्मीद है। अर्सीवाला कहती हैं कि यूटयूब के मामले में मैंने जो एक बात सीखी है, वह यह कि इसके बारे में आप कभी भी कोई भविष्यवाणी नहीं करें।


वह कहती हैं कि आपको हमेशा डेटा सेंटर और बैंडविड्थ अनुमान से 10 गुना ज्यादा खरीदना चाहिए। उन्होंने 2005 में गूगल जॉइन किया था और जनवरी, 2007 में वह यूटयूब में शिफ्ट कर गईं।

First Published : May 12, 2008 | 11:10 PM IST