हर साल जगन्नाथ यात्रा के दौरान हावड़ा मैदान में लोगों का हुजूम देखने लायक होता है और उनमें गजब का जोश और उत्साह होता है।
इस मेले में प्लास्टिक की थैलियों में गोल्ड फिश बेचने वाले हॉकर से पूछें कि क्या उसे देश की अर्थव्यवस्था की बिगड़ती स्थिति की जानकारी है। और अगर देश में जो चल रहा है उसके बारे में उसे पता भी है तो उस पर इसका कितना फर्क पड़ रहा है।
इस मैदान में एक ओर इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्रों पर पॉप संगीत सुना जा सकता है तो दूसरी ओर आपको खास बंगाली अंदाज में लाउडस्पीकर पर एक आवाज सुनाई दे जाएगी , ‘सरकार, सरकार… पी सी सरकार… जादू सरकार, करिश्माई सरकार…’ इस भीड़ भाड़ वाले बाजार में शरत सदन में प्रवेश पाने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगने लगी है।
खासतौर पर कतार में जो बच्चे खड़े हैं उनका जोश तो देखते ही बनता है और उन्हें तब तक चैन नहीं आता जब तक नए ऑडिटोरियम में अंदर चले नहीं जाते। बाहर थोड़ी बारिश हो रही है और ऑडिटोरियम की सीटों को भरने में थोड़ा समय लग जाता है। हॉल के अंदर जगमगाती रोशनी है और साथ ही लेजर लाइट रुक रुक कर हर दिशा को चीर रही है। आखिरकार रोशनी कुछ मध्यम हो जाती है और पी सी सरकार जूनियर लोगों के सामने आते हैं। पी सी सरकार जूनियर महान जादूगर पी सी सरकार सीनियर के बेटे हैं। और इस तरह जादू के इस बादशाह के आते ही शुरू होती है करिश्माई शाम की शुरुआत।
इस भीड़ भाड़ वाली शाम के बाद अगले दिन हम पहुंचते हैं कोलकाता के ठीक बीचोंबीच स्थित बालीगंज में इस ‘जादूगर के घर’ में। यहां हर किसी को इस जादूगर के घर इंद्रजाल के बारे में पता है और उस गली का भी जो इस घर के नाम पर रखा गया है। पी सी सरकार का घर यूं तो शहर की भीड़भाड़ से अलग सुकून वाले इलाके में बना है पर अब उनके मकान के सामने एक नया शॉपिंग मॉल खुलने जा रहा है। शो के दौरान जिस पी सी सरकार जूनियर को चमकते धमकते लिबास में देखा जाता है (शेरवानी और पगड़ी), आज वह इससे बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं।
कॉटन की टी शर्ट और ट्राउजर में तो एकबारगी उन्हें पहचान पाना भी मुश्किल है। सरकार का पालतू शेर जो पहले उनके घर में साथ रहता था, उसे उनके फार्महाउस में भेज दिया गया है। इसी फार्महाउस में सरकार की जादुई प्रयोगशाला भी है। हम जिस कमरे में बैठे थे उसमें पी सी सरकार सीनियर की एक बड़ी सी तस्वीर लगी हुई है। सरकार सीनियर की मौत 1971 में हृदयाघात से उस समय हो गई थी जब वह टोक्यो में एक शो में परफॉर्मेंस दे रहे थे। सरकार जूनियर यह जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर क्यों मैं दूसरे शहर से चलकर इस शहर में उनका शो देखने आया हूं।
मैंने उन्हें बताया कि मुझे इस बात पर आश्चर्य होता है कि आज की दुनिया में जबकि मनोरंजन के ढेरों साधन उपलब्ध हैं तो आखिर क्यों लोग उनका शो देखने के लिए बेताब रहते हैं और आखिर ऐसी क्या वजह है कि देश के किसी भी कोने में जब भी उनका शो होता है तो लोग उनके परफॉर्मेंस से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। बड़ी खुशी के साथ वे बताते हैं, ‘जितने भी लोग लाइव परफॉर्मेंस देते हैं उनमें से सबसे अधिक विदेशी मुद्रा की कमाई मुझे ही होती है।’ थोड़ा रुक कर वह फिर कहते हैं, ‘भारत में मेरे शो हमेशा हाउसफुल रहते हैं।’
मुख्यधारा मीडिया में जिस तरीके का मनोरंजन पेश किया जा रहा है, सरकार उससे काफी अलग हैं। स्टेज पर उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वह किसी पुराने जमाने से आए हैं। उसके बाद भी उनके शो के दौरान ऑडिटोरियम की सीटें भरने में कामयाब रहते हैं। सरकार कहते हैं, ‘मनोरंजन का सबसे सस्ता साधन जादू है।’ वह कहते हैं कि जादू से लोग सपनों की दुनिया में खो जाते हैं और खयालों में डूब जाते हैं। पी सी सरकार जूनियर ने काफी ऊंची शिक्षा प्राप्त की है, उन्होंने एपलाइड मनोविज्ञान में पीएचडी की है और साथ ही उनके पास रसायनशास्त्र की डिग्री भी है।
सरकार से जब बातें होती हैं तो ऐसा लगता है कि वे आपके मन को पढ़ रहे हों और हो भी क्यों नहीं, उनमें एक मनोवैज्ञानिक जो छिपा है। पर बातों बातों में वह मुझसे ही पूझ बैठते हैं कि जादू क्या है? वह उपनिषद से एक उद्धरण देते हुए कहते हैं ‘मैं कोई जादूगर नहीं हूं, मैं तो केवल एक जादूगर की भूमिका निभा रहा हूं।’ मैंने अब चर्चा को उनकी जादू की ओर मोड़ने की कोशिश करता हूं। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने दावा किया था कि वे एक बार वह ट्रेन और एक बार ताजमहल को हवा में गायब कर चुके हैं, क्या ये सही हैं। उन्होंने कहा कि हां वे ऐसा कर चुके हैं, पर जब मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा कैसे किया तो वह नहीं बताते।
सरकार के शो को दर्शक कितना पसंद करते हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर साल सरकार 400 शो करते हैं और इनमें से सारे के सारे हाउसफुल रहते हैं। सरकार जब भी मंच पर होते हैं तो वह अपने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं, पर शरत सदन में 12,00 सीटों पर बैठे लोगों को अपने मोहपाश में जकड़ लेना इतना आसान तो नहीं होता है। सरकार पूछते हैं कि- क्या आपको पता है कि मेरे पिता आखिर इतने शाही अंदाज में क्यों कपड़े पहनते थे। और इसका जवाब भी खुद उन्हीं की तरफ से आता है, वह कहते हैं कि मेरे पिता जादू के शहंशाह रहे हैं इसी वजह से उनकी वेश भूषा भी कुछ इसी तरह की होती है।
सरकार कहते हैं कि उनके पिता के कारण ही उन्होंने हमेशा शाही अंदाज में ही जिंदगी जी है। वह कहते हैं कि जब उनके पिता मंच पर बोलते थे तो उनकी आवाज में एक अजीब सी कशिश होती थी जो सबका मन मोह लेती थी। पर खुद के बारे में अभी भी वह कई बार सोचते हैं कि उनके पिता ने जादू का जो साम्राज्य खड़ा किया है कि क्या वह उसी अंदाज में उसे आगे ले जा पा रहे हैं? सरकार को जादू के अलावा एक खास तरीके का शौक और है, अखबार पढ़ने का। वह अपने घर में 27 अखबार मंगाते हैं और जब भी उन्हें अखबार में कुछ अच्छा लगता है तो वह उसकी कटिंग अपने पास रख लेते हैं।
पढ़ने का शौक उन्हें इस कदर है कि जब भी उन्हें कोई ऐसी किताब मिलती है जो थोड़ी बहुत रोमांचक होती है तो वह उसे खरीद लेते हैं। अपने दफ्तर में भी उन्होंने एक लाइब्रेरी तैयार कर रखी है और दीवारों पर महंगाई का आंकड़ा दर्शाता एक चार्ट लगा है। सरकार कहते हैं कि वह बहुत जल्द महंगाई को लेकर एक स्टेज शो करने की योजना बना रहे हैं। उनकी इस लाइब्रेरी में ‘टॉप सीक्रेट’ नाम की एक किताब है जिसमें उनके रोज के जादू के शो से जुड़ी जानकारियां हैं। क्या होगा अगर ये किताब मेरे या फिर किसी और के हाथ लग जाए?
सरकार हंसते हुए कहते हैं ‘कुछ नहीं क्योंकि इसमें जो भी जानकारियां हैं वह एक खास तरीके के कोड में लिखी गई हैं जिसे मैंने ही तैयार किया है।’ वह कहते हैं कि इसे सिर्फ वही पढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही उनकी लाइब्रेरी की सारी किताबें डिजिटल रूप ले लेंगी और तब इन फाइलों की छुट्टी कर दी जाएगी। ऐसा नहीं है कि सरकार के शो देश के छोटे और मध्यम श्रेणी के शहरों तक ही सीमित रहते हैं। जापानी और स्पैनिश भाषाओं में दक्ष सरकार इन दोनों ही देशों में शो करते रहते हैं और सेविला तो उनकी पसंदीदा जगह है जहां वह 49 से ज्यादा शो कर चुके हैं।
पर सरकार को लास वेगस और मक्का में शो करना कुछ खास पसंद नहीं है क्योंकि इन दोनों ही जगहों पर जितने दर्शक आते हैं उनमें से आधे से अधिक शराब के नशे में धुत्त होते हैं। अपने कुछ खास शो का जिक्र करते हुए सरकार बताते हैं कि एक बार असम में उत्साहित दर्शकों ने उनसे मांग की कि वह अपने जादू को धीरे धीरे करके दिखाएं ताकि वे समझ सकें कि सरकार इन्हें कैसे कर रहे हैं। सरकार ने अपने यहां 156 लोगों को स्थायी तौर पर नियुक्त कर रखा है। सरकार का अगला मुकाम देश में शिलांग और मुंबई है जबकि विदेशों में वह क्योटो और बार्सिलोना में अगला शो करने वाले हैं।
सरकार की पत्नी जयश्री कोरियोग्राफी में उनकी मदद करती हैं और उनकी तीन बेटियों- मेनका, मोउबानी और मुमताज ने भी उनसे जादू के कुछ गुर सीखे हैं। ओहियो विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री पा चुकी मेनका अपने पिता के साथ स्टेज पर प्रोग्राम पेश कर चुकी है जबकि बाकी दोनों का जुड़ाव थिएटर और नृत्य से है। सरकार से मैंने पूछा कि आखिर क्यों उनके पिता और खुद वह विदेशों में अपने समकालीन डेविड ब्लेन या डेविड कॉपरफील्ड की तरह प्रख्यात छवि नहीं बना पाए हैं। दरअसल इन दोनों ही कलाकारों को आइकन की तरह से देखा जाता है।
जवाब में सरकार कहते हैं कि ये दोनों ही कलाकार 20 मिनट के छोटे कार्यक्रम पेश करते हैं जबकि उनके शो में अधिक समय लगता है। सरकार कहते हैं कि लगातार शो करते रहना उनकी पहचान का हिस्सा है। हालांकि अब भी ऊंचे वर्ग के लोगों के बीच उनकी पैठ उतनी अधिक नहीं हो पाई है जितनी निचले और मध्यम तबके के बीच देखने को मिलती है। वह कहते हैं कि कॉरपोरेट शो बिजनेस को समझ नहीं पाते। उन्हें लाइव कार्यक्रमों का औचित्य समझ नहीं आता है।
सरकार की उम्र 55 साल से भी अधिक की होगी पर जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो वह उलटा मुझसे ही प्रश्न पूछते हैं कि मेरे इस धरती पर जन्म लेने का क्या सबूत है। हां पर हावड़ा में अपने पहले शो के बारे में सरकार बड़ा चहक कर बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि यही वह जगह है जहां से उन्होंने अपने करतब के गुर सीखे हैं पर शुरुआती दिनों में यहां हॉल नहीं होने के कारण वह शो नहीं कर पाते थे।
ऑडिटोरियम में मेरी सीट के पीछे वाली लाइन में एक परिवार के आठ सदस्य बैठे थे जिन्होंने इस शो के टिकट के लिए 1,200 रुपये खर्च किए थे। शो खत्म होने पर मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने अभी अभी जो देखा क्या वह जादू था। उन्होंने कोई जवाब तो नहीं दिया, बस जोर जोर से ठहाके लगाने लगे। अगर यह सिर्फ मनोरंजन भी है तो जादूगरी के अंदाज में।
सरकार की अर्थव्यवस्था
भारत में
शो की न्यूनतम अवधि- 10 दिन
हर शो के लिए लेते हैं 50,000 रुपये से अधिक।
अगर जरूरी हो तो कुछ मौकों पर छूट भी दी जाती है।
टिकटों की कीमत 20 रुपये से शुरू होकर 200 रुपये तक होती है।
विदेश में
शो की न्यूनतम अवधि- छह हफ्ते
हर शो के लिए लेते हैं 25,000 डॉलर से अधिक।
हर साल लगभग 400 शो करते हैं।
मनोरंजन पर 20 फीसदी अग्रिम कर चुकाते हैं।
स्थायी तौर पर 156 कर्मचारी इनके साथ काम करते हैं जबकि जरूरत के मुताबिक और लोग भी इनके साथ जुड़ते हैं।