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बेघर बच्चों को मिला अनोखा सहारा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 1:04 PM IST

बाल विकास बैंक (सीडीबी)।  यह नाम है एक ऐसे बैंक का जो बच्चों द्वारा बच्चों के लिए ही चलाया जाता है। बच्चे ही इस बैंक के कैशियर और ग्राहक हैं।


तकरीबन एक दशक पहले एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा शुरू किया गया यह बैंक आज कई देशों में बेघर बच्चों को नई राह दिखा रहा है। दिल्ली में वर्ष 2000 में ‘बटरफ्लाईज’ नामक एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा शुरू की इस पहल से हजारों बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।

राजधानी में इस अनोखे बैंक की उपस्थिति चांदनी चौक, फतेहपुरी, निजामुद्दीन दरगा, कनाट प्लेस, आईएसबीटी, जामा मस्जिद, कश्मीरी गेट, ओखला मार्केट, करोल बाग समेत कई इलाकों में है। बटरफ्लाईज की प्रबंधक सुमन सचदेवा ने ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ से कहा कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भारत, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में भी सीडीबी संचालन में हैं।

इन देशों में सीडीबी के संचालन के लिए बटरफ्लाईज को कई संगठनों की मदद मिल रही है। विश्व के कई अन्य हिस्सों से भी अच्छी प्रतिक्रियाओं के आधार पर संगठन ने निकट भविष्य में अन्य देशों में भी इस पहल को शुरू करने की योजना बनाई है। सचदेवा के मुताबिक कोई भी बेघर या असहाय बच्चा सीडीबी में रुपये जमा करने के लिए बटरफ्लाईज के कार्यकर्ताओं से संपर्क कर सकता है। बैंक अपने ग्राहकों के लिए दो तरह के खाते ‘जमा खाता’ और ‘चालू खाता’ के तहत राशि का लेन-देन मुहैया कराता है।

बैंक का कामकाज शाम 6 बजे राजधानी के विभिन्न नाइट शेल्टरों में शुरू हो जाता है और तकरीबन रोजाना एक घंटे तक इसका कामकाज चलता है। शाम का समय इसलिए भी चुना गया है क्योंकि अधिकांश बच्चे कामकाज निपटा कर शाम को अपनी कमाई का कुछ हिस्सा आसानी से जमा कर सकें। यह बैंक ग्राहकों को अपने खाते आंध्रा बैंक या आईसीआईसीआई बैंक में स्थानांतरित करने का भी विकल्प मुहैया कराता है। ये दोनों बैंक सीडीबी के भागीदार बैंक हैं।

जमा की गई इस राशि का ब्यौरा ग्राहक की पासबुक में दर्ज किया जाता है। बैंक के टाइमिंग के अलावा कुछ अन्य शर्तें भी रखी गई हैं। जैसे, बैंक का सदस्य बनने के लिए बेघर बच्चे की उम्र 9 साल से 14 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा बैंक की सदस्यता चाहने वाला बच्चा चोरी या अन्य अपराध में लिप्त नहीं रहा हो। उसके पास अपना घर नहीं हो। इस बैंक की सदस्यता को लेकर एक खास बात यह भी है कि जब इस बैंक के सदस्य की उम्र 18 वर्ष हो जाती है तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाती है।

यही नहीं, बच्चों द्वारा इस बैंक में जमा की जाने वाली राशि पर ब्याज भी मिलता है। इसके अलावा बैंक ने दुकान आदि खोलने के लिए ऐसे बच्चों के लिए लोन भी मुहैया कराता है। लोन के लिए किए गए आवेदन पर संगठन के सदस्य तहकीकात करते हैं। इसके बाद जरूरतमंद बच्चे को लोन मुहैया करा दिया जाता है।

उन्होंने बताया कि पूरे एशिया में सीडीबी के सदस्यों की संख्या तकरीबन 8,000 है। अकेले दिल्ली में इस अनोखे बैंक से तकरीबन 1300 बच्चे अब तक जुड़ चुके हैं। राजधानी दिल्ली में 11 शाखाओं के अलावा कोलकाता, चेन्नई, बिहार के मुजफ्फरपुर और श्रीनगर में भी यह अनोखा बैंक बेघर बच्चों को राह दिखाने में लगा हुआ है।

First Published : July 25, 2008 | 12:10 AM IST