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शाही मस्जिद का शहंशाही कायाकल्प

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 6:46 PM IST

इतिहास के पन्नों को पलटें तो इसमें शाहजहानाबाद शहर का जिक्र मिलेगा जिसे हम आज पुरानी दिल्ली के नाम से जानते हैं।


वही शहर जिसे मुगल सम्राट शाहजहां ने 17वीं शताब्दी में बसाया था और जो 19वीं शताब्दी तक मुगल शासन के दौरान भारत की राजधानी थी। पुरानी दिल्ली का जिक्र करते ही चांदनी चौक, लाल किला, दिल्ली गेट, मीना बाजार और जामा मस्जिद की तस्वीर आंखों के सामने घूमने लगती है।

जहां दिल्ली आने वाला हर शख्स इन ऐतिहासिक स्मारकों को अपनी आंखों में कैद करने से नहीं चूकता, वहीं एक सच्चाई यह भी है कि इनमें कुछ ऐसी भी इमारतें हैं जिनकी रंगत हर गुजरते दिन के साथ ढलती जा रही है।

भारत के सबसे बड़े इबादतगाहों में से एक जामा मस्जिद भी इससे अछूता नहीं रहा है और लंबे अर्से तक उपेक्षा का शिकार रहने के बाद खुद दिल्ली सरकार को यह लगने लगा कि इस ऐतिहासिक स्मारक की रौनक को अगर लौटाना है तो उसके पुनरुद्धार पर काम किया जाना जरूरी है।

साल 2004 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय को इस बात का एहसास हुआ कि 1650 में शाहजहां ने शाहजहानाबाद के सबसे ऊंचे स्थान पर शुक्रवार की नमाज के लिए जिस भव्य इबादतगाह को बनवाया था उसके रख रखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

अदालत ने यह माना कि यही वजह है कि जहां लालकिला, ताजमहल जैसी इमारतों के प्रति पर्यटकों का आकर्षण बना हुआ है वहीं जामा मस्जिद अपना आकर्षण खोता जा रहा है। तभी उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को यह आदेश दिया कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी)और दिल्ली शहरी कला आयोग (डीयूएसी) की सहायता से जामा मस्जिद क्षेत्र का पुनर्विकास किया जाए।

विकास परियोजना के लिए मई, 2006 में उच्च न्यायालय ने एमसीडी और डीयूएसी को 24 महीनों का समय दिया था जिस दौरान विकास योजना तैयार कर उस पर काम पूरा किया जाना था। पहली बार नवंबर, 2006 में विकास परियोजना के लिए मसौदा प्रस्ताव सौंपा गया था, पर उसमें कुछ फेरबदल के लिए इसे वापस कर दिया गया।

तब से लेकर अब तक इसमें समय समय पर संशोधन किए गए हैं और मास्टर परियोजना सौंपे जाने के बाद भी अभी यह मंजूरी की बाट जोह रहा है। परियोजना के संयोजक और सिटी जोन के उपायुक्त विजय सिंह बताते हैं कि डीयूएसी के सामने मास्टर प्लान रखा जा चुका है और 19 अगस्त को इसे लेकर डीयूएसी की बैठक भी हो चुकी है पर अभी इस पर हुए आखिरी फैसले के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।

उन्होंने उम्मीद जताई की 26 अगस्त को डीयूएसी की एक बार फिर बैठक होगी जिसमें प्लान को लेकर आखिरी फैसला लिया जाएगा। दरअसल, 1975 में मस्जिद के सामने वाले हिस्से को 15 फीट तक गहरा खोद दिया गया था ताकि मीना बाजार की दुकानों को जगह मिल सके। खुदाई की वजह से सामने का हिस्सा काफी ऊंचा नीचा हो गया है और इससे स्मारक की सुंदरता पर भी असर पड़ा है।

विकास परियोजना के तहत इस जमीन को वापस से भरने का प्रस्ताव है। लाल पत्थर और संगमरमर से बने इस इबादतगाह को देखें तो पता चलेगा कि कोई इमारत भव्यता का लिबास ओढ़ने के बाद भी कितना सामान्य और शालीन नजर आ सकता है। अब भी लोगों के पास शाहजहानाबाद की पर्याप्त जानकारियां नहीं हैं और इसकी वजह है कि यहां सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए कोई ठोस मंच उपलब्ध नहीं है।

इसी को ध्यान में रखते हुए मस्जिद के सामने खाली जमीन पर मुगल शासन की जानकारी देने के लिए हेरिटेज कॉम्पलेक्स बनाने की योजना है जिसमें एक संग्रहालय, आर्ट गैलरी, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम और आर्ट स्टूडियो बनाने का प्रस्ताव है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक पर्यटन सूचना केंद्र भी बनाया जाना है जो पर्यटकों को शहर से जुड़ी तमाम जानकारियां उपलब्ध कराएगा।

यूं तो इस मस्जिद में एक साथ 25,000 लोग नमाज पढ़ सकते हैं पर ईद के मौके पर मस्जिद के आस पास सड़कों तक लाखों की संख्या में नमाजी सिर झुकाने आते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसा प्रस्ताव रखा गया है कि विशेष मौकों पर ज्यादा से ज्यादा नमाजियों को इबादतगाह में जगह मिल पाए।

अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है और इसके अनुसार काम पूरा कर लिया जाता है तो अगली बार आप मीना बाजार आएं तो आपको यहां की तंग गलियां नहीं बल्कि  करीने से सजी हुईं एक मंजिला दुकानें मिलेंगी जिनकी छतों पर बागवानी नजर आएगी।

जिस इबादतगाह को बनाने में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे और इसके पुनरुद्धार के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया है। विजय सिंह ने बताया कि परियोजना में निवेश के लिए दिल्ली सरकार की ओर से कुछ मदद की जा सकती है, जबकि एमसीडी की ओर से भी सहायता की उम्मीद है।

मास्टर प्लान को आखिरी मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद है कि 6 से 7 महीनों में जामा मस्जिद और इसके आसपास के इलाकों की रंगत जो कुछ फीकी पड़ गई थी वह वापस से सुर्ख हो जाएगी।

First Published : August 26, 2008 | 10:57 PM IST