सामान्य मनोरंजन चैनलों की श्रेणी में यह दसवां आगाज होगा। पिछले साल पीटर मुखर्जी का 9 एक्स आया तो उसके बाद एनडीटीवी इमेजिन ने सामान्य मनोरंजन चैनलों की श्रेणी में प्रवेश किया।
अब इस फेहरिस्त में नया नाम शामिल होने वाला है। यह नाम है वायकॉम-18 का ‘कलर्स’ जो जुलाई में शुरू होने जा रहा है। इस चैनल के लिए जानी-मानी मीडिया कंपनी वायकॉम और नेटवर्क 18 ने गठजोड़ किया है। वैसे पहले से ही बहुत प्रतिस्पर्धात्मक हो चली इस श्रेणी में अपनी पहचान बनाने के लिए इस चैनल ने कुछ खास तैयारियां की हैं।
चैनल के लोगों का दावा है कि उनका चैनल दर्शकों को सास बहू के नाटकों से निजात दिलाएगा। ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे कार्यक्रम दर्शकों को बहुत रोमांचित करेंगे और यह कार्यक्रम फीयर फैक्टर जैसे कार्यक्रम से अलग होगा। मीडिया में विज्ञापनों के लिए समय खरीदने वालों (मीडिया बायर्स)का मानना है कि इस चैनल में दम है और यह असरदार साबित होगा।
भारत में प्रमुख मीडिया बायर्स ‘ग्रुप एम’ के प्रबंधन में साझीदार प्रशांत कुमार कहते हैं कि अब सास बहू सीरियलों के दिन लद चुके हैं। ऐसे में यदि कोई चैनल अलग तरह के कार्यक्रम दिखाएगा तो निश्चित रूप से दर्शक उस चैनल की ओर मुखातिब होंगे। वैसे, कुमार का यह भी मानना है कि चैनल की सफलता उसके कार्यक्रमों की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी वितरण रणनीति पर भी निर्भर करेगी।
उनके मुताबिक शुरुआत में चैनल सभी जगह दिखना चाहिए, क्योंकि बाद में यह बात बहुत निर्णायक साबित होती है। उनकी बात सही भी लगती है क्योंकि जब कोई नया चैनल शुरू होता है तो दर्शकों की उस चैनल के बारे में उत्सुकता होती है और वे उसको देखना भी चाहते हैं। अगर चैनल उनको देखने को नहीं मिलता तो इधर-उधर से मिली जानकारियों से दर्शक उस चैनल के बारे में अपनी राय बना लेते हैं और चैनल को शुरुआती लाभ नहीं मिल पाता है।
खैर, चैनल वाले भी वितरण को लेकर गंभीर हैं। उनकी योजना वितरण के लिए सालाना तौर पर 50 करोड़ रुपये खर्च करने की है। वैसे वायकॉम और नेटवर्क 18 दोनों मिलाकर केबल और डीटीएच के जरिये देश में 9 चैनलों का प्रसारण करते हैं। इस नए चैनल के सीईओ राजेश कामत कहते हैं कि दोनों कंपनियों का अनुभव चैनल के बहुत काम आने वाला है और चैनल का वितरण सही होने से दर्शक इसको शुरू से ही देख पाएंगे।
कामत का कहना है कि शुरु के 3 से 6 महीने चैनल फ्री टू एयर रहेगा पर बाद में पे चैनल हो जाएगा। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि दर्शक शुरू से ही चैनल से जुड़ जाएं ताकि बाद में भी चैनल के साथ बने रहें। जहां तक चैनल पर विज्ञापनों का सवाल है, चैनल के लिए जो विज्ञापन बुक होंगे वह केवल ‘कलर्स’ पर ही दिखाए जाएंगे, समूह के दूसरे चैनलों पर नहीं।
मीडिया की भाषा में कहें तो विज्ञापनों के लिहाज से चैनल ‘स्टैंडअलोन’ रहेगा। कामत का मानना है कि चैनल पर विज्ञापनों की कीमत प्रतिस्पद्र्धा के आधार पर ही होगी। लेकिन वह सोचते हैं कि बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार वाले कार्यक्रम ‘खतरों के खिलाड़ी’ को बढ़िया विज्ञापन मिलेंगे। फिलहाल जी और स्टार जैसे चैनल प्राइम टाइम में 10 सेकंड के विज्ञापन के लिए 2.5 से 4 लाख रुपये तक वसूल कर रहे हैं।
चैनल के प्रचार के लिए नेटवर्क 18 और वायकॉम के चैनलों पर अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा नेटवर्क 18 बॉलीवुड के लोगों से अपने संबंधों का फायदा चैनल के प्रोमोशन के लिए करेगी। गौरतलब है कि नेटवर्क 18 हिंदी फिल्मों के निर्माण और वितरण से भी जुड़ी है। वैसे, सालाना 300 करोड़ रुपये की परिचालन लागत से मनोरंजन चैनल चलाना महंगा सौदा ही कहा जाएगा।
कुल दर्शकों की तुलना में इन चैनलों को 34 से 35 फीसदी भागीदारी मिल सकती है हफ्ते भर में इन चैनलों को 1,000 ग्रोस रेटिंग पॉइंट मिलते हैं। लेकिन इसमें भी स्टार और जी के चैनलों का ही दबदबा है। वैसे इन चैनलों में भी सफलता का कोई फॉर्मूला नहीं है। अभी हाल में नंबर वन चैनल पर बॉलीवुड के सुपर स्टार को लेकर बनाया गया शो सफल नहीं हो पाया। वैसे कामत खुद मानते हैं कि ऐसे माहौल में स्टैंड अलोन रूप में उतरना कारोबार के लिहाज से जोखिम भरा है।