एक छोटी लड़की पहाड़ियों के बीच जल की धारा में कागज की नाव बहाती है। यह नाव आगे बढ़ने लगती है।
जल्द ही यह नाव एक चट्टान से टकरा कर रुक जाती है, लेकिन इसकी ओर मदद के हाथ बढ़ते हैं और यह फिर से आगे बढ़ने लगती है। इस नाव को आगे पानी के तेज प्रवाह का सामना करना पड़ता है और यह नाव एक झरने की चपेट में आने लगती है।
विपरीत परिस्थितियों के बीच यह नदी के किनारे तक पहुंचने का प्रयास जारी रखती है। फिर से इस नाव को एक बुजुर्ग व्यक्ति की मदद मिलती है। पास में ही एक नाव में सो रहा यह बुजुर्ग व्यक्ति इस नाव को डूबने से बचाता है और आगे बढ़ा देता है। अगली बाधा तब पैदा हो जाती है जब यह नाव एक टहनी से उलझ जाती है। लेकिन एक पेड़ पर बैठे दो लड़के इसे बचा लेते हैं।
रात्रि के दौरान एक युवक दीया जला कर नदी में छोड़ता है और नाव धीरे धीरे इस लैम्प की ओर पहुंचने लगती है। 60 सेकंड का यह विज्ञापन कागज की कई और नावों एवं जलते दीयों के साथ समाप्त हो जाता है। इस दौरान पार्श्व संगीत गूंजता है जिसका भाव है-‘हमारे रास्ते में कोई भी आए, यात्रा जारी रहनी चाहिए।’
हालांकि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा अपने बीमा गोल्ड प्लान के लिए अपना अभियान शुरू किए केवल एक साल ही हुआ है, कंपनी ने अपने 22 करोड़ ग्राहकों के साथ संपर्क किए जाने की जरूरत महसूस की है। सात वर्ष से भी अधिक का वक्त बीत गया है जब कंपनी ने उत्पाद आधारित विज्ञापनों के लिए एक ब्रांड फिल्म तैयार की थी। कई कंपनियां अपने ब्रांड अभियानों पर ध्यान केंद्रित करती रही हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एलआईसी की बाजार भागीदारी 70 प्रतिशत है, वहीं निजी कंपनियां इस क्षेत्र में धीमा प्रदर्शन कर रही हैं। वर्ष 2000 में इस क्षेत्र में निजी कंपनियों ने अपनी भागीदारी 12 से बढ़ा 16 कर ली। देश की सबसे बड़ी निजी बीमा कंपनी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल से एलआईसी को कड़ी चुनौती मिल रही है। जहां एलआईसी ने पिछले वर्ष 3.76 करोड़ पॉलिसी कीं वहीं आईसीआईसीआई ने 65 लाख पॉलिसी जोड़ीं।
इस उद्योग के अनुमानों के मुताबिक निजी बीमा कंपनियों की बाजार भागीदारी में बढ़ोतरी हुई है। निजी बीमा कंपनियों की 2002 में 4 प्रतिशत की बाजार भागीदारी 2007 में बढ़ कर 10 प्रतिशत हो गई। इनमें आईसीआईसी प्रूडेंशियल ने 29 प्रतिशत की भागीदारी हासिल की और मार्च 2003 और मार्च 2007 के बीच अपनी प्रीमियम आय में तकरीबन 100 प्रतिशत तक का इजाफा किया। इस बीच एलआईसी की बाजार भागीदारी में गिरावट आई है।
फरवरी 2004 में एलआईसी की बाजार भागीदारी 87.22 प्रतिशत थी जो इस वर्ष घट कर 70 प्रतिशत रह गई है। वहीं आईसीआईसीआई इस दिशा में तेजी से अग्रसर हो रही है। आईसीआईसीआई ने कई बड़े कदम उठाए हैं। यह बैंक शीर्ष विज्ञापनदाताओं में शामिल है और यह अपने नए कारोबार के प्रचार अभियान पर अच्छी-खासी रकम खर्च कर रही है।
आईसीआईसीआई के ‘जीते रहो’ जैसे अभियान बेहद तर्कसंगत हैं। इसके विपरीत अपने नए अभियान से एलआईसी ने और अधिक उत्पाद जोड़ने के क्रम में एक शानदार प्रयास किया है। एलआईसी की क्रिएटिव एजेंसी मुद्रा गु्रप के चीफ क्रिएटिव ऑफीसर बॉबी पवार कहते हैं, ‘यह एक महत्वपूर्ण ब्रांड फिल्म है क्योंकि यह एक प्रोडक्ट या ऑफरिंग के बारे में नहीं है। यह एक ब्रांड के बारे में है।’
एलआईसी के कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट कम्युनिकेशन) राजेश खंडेलवाल भी इस तथ्य पर सहमति जताते हैं। वे कहते हैं, ‘यह फिल्म काफी अलग है। यह बेहद भावनात्मक और दार्शनिक है।’ एलआईसी के नए अभियान के लिए इससे अनुकूल समय नहीं हो सकता जब सार्वजनिक क्षेत्र की इस बीमा कंपनी की 50वीं वर्षगांठ इसी साल मनाई जा रही है।
खंडेलवाल कहते हैं, ‘यह ब्रांड एक अम्ब्रेला की तरह है और इसके नीचे प्रोडक्ट हैं। एलआईसी एक आइकॉनिक ब्रांड है और तकरीबन सभी परिवार एलआईसी से परिचित हैं। इसलिए हमने अपने ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ाने का फैसला किया है। प्रत्येक ब्रांड को स्पष्टता की जरूरत होती है। हम पिछले 50 वर्षों से लोगों के संपर्क में हैं। इसके अलावा हमने प्रतिस्पर्धा से स्वयं को अलग करने की जरूरत महसूस की और इस फिल्म के साथ हम इस बाधा को समाप्त कर देंगे।’
पिछले 10 वर्षों से एलआईसी के क्रिएटिव पार्टनर के रूप में मुद्रा कम्युनिकेशन की सराहनीय भूमिका रही है। बॉबी पवार कहते हैं, ‘एलआईसी आपको जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करने का भरोसा देती है।’ मुद्रा कम्युनिकेशंस और उसकी इस क्लाइंट ने कागज की एक नाव के जरिये जीवन की यात्रा को व्यक्त करने के श्रेष्ठ तरीके पर सहमति जता दी।
इस नाव की यात्रा एक स्थान से शुरू होती है और कहीं दूर जाकर समाप्त होती है। लेकिन एलआईसी के समर्थन के साथ कोई भी आसानी से जिंदगी के उतार-चढ़ाव का सामना कर सकता है। ‘द बोट-जर्नी ऑफ लाइफ’ फिल्म एक कॉरपोरेट फिल्म है। इस फिल्म का मकसद जनता के बीच एलआईसी की पहुंच बढ़ाना है।
इस फिल्म को बनाने में 10 दिन का समय लगा। इसकी शूटिंग हरिद्वार, ऋषिकेश और कोलकाता में की गई। इस फिल्म को लेकर कंपनी की टेलीविजन पर निर्भरता बढ़ गई है और इसके किसी प्रिंट को बेचने की योजना नहीं बनाई गई है। लेकिन प्रतिस्पर्धा और तेजी से बढ़ती कीमतों के साथ एडवरटाइजिंग को अधिक आक्रामकता हासिल हो रही है और निजी कंपनियां शत-प्रतिशत वृद्धि दर्ज कर रही हैं।
किसने क्या किया
क्लाइंट: भारतीय जीवन बीमा निगम
एजेंसी: मुद्रा कम्युनिकेशंस
क्लाइंट सेवाएं: जॉयदीप दासगुप्ता, युगांधर मदीदी, कपिल भाटिया ओर रामदास अय्यर
क्रिएटिव : बॉबी पवार, अनिल वर्मा