रिलायंस इंडस्ट्रीज की 45वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में उत्तराधिकार के मुद्दों तथा विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों से जुड़े विविध प्रश्नों पर स्थिति स्पष्ट की गई। इस विविधतापूर्ण समूह की भविष्य की रणनीति के खाके को सकारात्मक ढंग से लेते हुए शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। समूह के 65 वर्षीय चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि उनके बड़े बेटे आकाश अंबानी डिजिटल कारोबार संभालेंगे जबकि उनकी जुड़वां बहिन ईशा खुदरा कारोबार देखेंगी। उनके छोटे भाई अनंत नवीनीकृत ऊर्जा कारोबार संभालेंगे। हालांकि तेल से लेकर रसायन शाखा जो आज भी राजस्व में बहुत बड़ी हिस्सेदार है, उसके बारे में वस्तुस्थिति अब तक स्पष्ट नहीं की गई है। जियो की 5जी सेवाएं दीवाली तक शुरू होनी हैं और कंपनी का इरादा दिसंबर 2023 तक पूरे देश में 5जी कवरेज देने का है। कंपनी ने क्लाउड-नेटिव 5जी बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए क्वालकॉम के साथ समझौता किया है। इससे भविष्य के उन्नयन में मदद मिलेगी। 5जी की पेशकश मौजूदा 4जी नेटवर्क के भरोसे नहीं की जाएगी। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए 10 करोड़ उपभोक्ताओं का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल इनकी तादाद 70 लाख है। इसकी शुरुआत के लिए दो लाख करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इसमें से 88,000 करोड़ रुपये की राशि स्पेक्ट्रम के लिए है।
नई ऊर्जा के क्षेत्र में आरआईएल पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अपनी पांचवीं ‘गीगा फैक्टरी’ शुरू कर रही है और 2024-25 तक या उससे पहले वह फ्यूल सेल, पीवी मॉड्यूल, हाइड्रोजन और बैटरियों का उत्पादन शुरू कर देगी। कंपनी का इरादा 2025 तक 20 गीगावॉट की सौर क्षमता विकसित करने का है। आरआईएल अपनी हरित ऊर्जा की सबसे बड़ी ग्राहक खुद होगी। कम से कम शुरुआती दौर में तो ऐसा ही होगा। कंपनी का इरादा यह भी है कि अपने हरित ऊर्जा उत्पादों के लिए आत्मनिर्भर मूल्य श्रृंखला तैयार की जाए। कंपनी जैव ऊर्जा, तटीय इलाकों में बहने वाली हवा से उत्पन्न पवन ऊर्जा तथा अन्य उन्नत नवीकरणीय माध्यम शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी का लक्ष्य 2025 तक पूरी तरह हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने का है। रूपांतरण को और बेहतर बनाने के लिए वह हेट्रोजंक्शन टेक्नॉलजी पर काम कर रही है। इसके अलावा पीवी की अवधि को 25 वर्ष से बढ़ाकर 50 वर्ष करने पर विचार हो रहा है। यह भविष्य की तकनीक पर एक बड़ा दांव है।
खुदरा कारोबार की बात करें तो आरआईएल दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं के कारोबार में उतर चुकी है और वह इस शाखा को कंपनी की सबसे बड़ी शाखा बनाना चाहती है। पेट्रोकेमिकल क्षमता को भी 75,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय से बढ़ाया जाएगा। इस क्षेत्र में भी इरादा परिवहन ईंधन से उच्च मूल्य उत्पादों की दिशा में बढ़ने का है। समूह की महत्त्वाकांक्षा कभी कम नहीं थी और हालिया एजीएम से यह स्पष्ट है कि कंपनी का इरादा इसी दिशा में बढ़ते रहने का है। प्रथम दृष्टया समन्वय की कमी नजर आती है लेकिन भविष्य की कई योजनाएं एक दूसरे से संबद्ध हैं। उदाहरण के लिए खुदरा और डिजिटल शाखाएं आरआईएल के साथ इस प्रकार संबद्ध हैं कि वे विशिष्ट रूप से एकीकृत ऑनलाइन और ऑफलाइन खुदरा सेवा देने की स्थिति में हैं और इसे कंपनी की अपनी दूरसंचार सेवाओं का समर्थन मिलेगा। दुनिया में कहीं किसी और कारोबार का ऐसा मॉडल नहीं है।
उच्च मूल्य वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों की ओर बढ़ते हुए आरआईएल के बिजली खपत वाले परिचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। यदि आरआईएल अपनी इच्छा के मुताबिक हरित हाइड्रोजन की मूल्य श्रृंखला स्थापित कर पाती है तो यह वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी घटना होगी। हालांकि निवेशक सोच रहे होंगे कि इन शाखाओं को अलग-अलग कंपनी के रूप में सामने लाया जाए। ऐसा करना उचित होगा क्योंकि ऐसा करके भविष्य में भाई-बहनों के बीच के सत्ता संघर्ष को रोका जा सकेगा। कुछ वर्ष पहले हम ऐसा संघर्ष देख चुके हैं। इसके बाद अलग-अलग कारोबार का बेहतर विश्लेषण और मूल्यांकन हो सकेगा। इससे समूह का बाजार मूल्यांकन भी बढ़ेगा।