इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों ने जहां टेलीविजन की अहमियत को एक बार फिर से बढ़ाया है वहीं एफएम रेडियो चैनलों के लिए भी अपने ब्रांड की छवि को नायाब बनाने के साथ-साथ मुनाफा कमाने का बेहतर मौका मिलने की उम्मीद कायम की है।
रेड एफएम कोलकाता प्रमुख जिम्मी टांगरी कहते हैं,’आईपीएल के जरिए एक बेहतर मौका मिल रहा है जिससे एफएम स्टेशन को काफी मुनाफा मिल सकता है।’ हालांकि एफएम रेडियो कंपनियां मुनाफे के बारे में खुलकर नहीं बोलना चाहती हैं।
आने वाले दिनों में एफएम रेडियो चैनल अपने लिए कितना मुनाफा कमा सकती हैं, इस पर रेडियो इंडस्ट्री के विश्लेषक भी कुछ बोलने से साफ मना कर देते हैं हालांकि वे यह इनकार नहीं कर पाते कि रेडियो चैनल को अच्छा फायदा होगा। रेडियो इंडस्ट्री के एक सूत्र के मुताबिक देश के कई रेडियो स्टेशनों ने आईपीएल प्रमोशन के लिए 25 लाख से बढ़कर अधिकतम 75 लाख रुपये तक की कमाई की है।
एक सीनियर मीडिया खरीदार के मुताबिक रेडियो स्टेशन में एक महीने के लिए चलने वाले विज्ञापन मसलन वनिला ऐंड कैंपेन से भी औसतन 9 लाख रुपये मिलते हैं। मीडिया बाईंग एजेंसी मैक्सस के प्रबंध निदेशक अजीत वर्गीज कहते हैं,’रेडियो पर अपने ब्रांड कैंपेन के लिए सामान्य ब्रांड कैंपेन के मुकाबले हमेशा ही ज्यादा खर्च करना होता है। अगर आप यह सोचें कि दो महीने के लिए कोई अभियान रेडियो पर चलता है तो वह खुद ही ज्यादा खास बन जाता है।’
एक सूत्र का कहना है कि यह आसान नहीं है कि आप एक तयशुदा राशि पर बात करें लेकिन कई बार यह लेन-देन और छूट के मुताबिक भी तय होती है। अगर किसी कैंपेन के लिए 50 लाख रुपये की राशि दी जानी चाहिए उसमें एफएम रेडियो स्टेशन 10 लाख रुपये या इससे ज्यादा की छूट भी दे सकती है। लेकिन यह सारी बातें रेडियो कंपनी के अधिकार क्षेत्र की बात है। इसकी वजह यह भी है कि रेडियो चैनल की पहुंच हर जगह और सभी लोगों तक है।
ये रेडियो चैनल किसी खास टीम को कैंपन के जरिए फायदा तो पहुंचाते ही हैं और कई चीजें साफ तौर पर नजर आती हैं। यह बात बिल्कुल साफ है कि आईपीएल और रेडियो की साझेदारी से एक दूसरे को फायदा तो मिलेगा ही। रेडियो सिटी के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट और सेल्स के प्रमुख असित कुकियान किसी आंकडे में जवाब देने के बजाए कहते हैं कि एफएम चैनल को जल्द ही हर महीने 4-5 प्रतिशत तक का मुनाफा होगा जो कि औसत से ज्यादा होगा।
इस समझौते के लिए रेडियो स्टेशनों ने आईपीएल के साथ अपना गठजोड़ करने के लिए सभी बाधाओं को दूर कर दिया है। टांगरी का कहना है, ‘इसकी गतिविधियां भी एक दूसरे के सहयोग और बातचीत के आधार पर तय की गई है।’ उन्होंने रेड एफएम के स्टूडियो की बाहरी गतिविधियों की मिसाल भी दी। टांगरी का कहना है मुंबई के उनके चैनल ने मुंबई इंडियन के साथ साझेदारी की है।
इसने एक बड़े होर्डिंग के जरिए यह बात कही है कि मुंबई इंडियन को अपना सपोर्ट देने के लिए चैनल ने नीला रंग अपना लिया है। कोलकाता में इसने बेलमोंटे की फ्रेंचाइजी के साथ अपना गठजोड़ किया है। अब रेडियो स्टेशन क्लबहाउस की टिकटें भी देने लगे। इसके अलावा उन्होंने रोड शो और कई प्रतियोगिताओं के जरिए इस अभियान को यादगार बनाया।
रेड एफएम की टीम कोलकाता नाइट राइडर और मुंबई इंडियन को उनके अपने शहर में प्रोत्साहित करते नजर आती हैं। टांगरी अपनी टीम की प्रशंसा करते हुए कहते हैं,’हम मैदान में अलग रंगों की छटा बिखेरते हैं, और हम चीयरलीडर के एक छोटे समूह के जरिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए मौजूद होते हैं। इसके जरिए स्टेडियम की भीड़ में भी अपनी अलग पहचान बना लेते हैं।’
रेडियो सिटी ने अपनी एक टीम रेडियो सिटीजन भी बनाई है। इसके साथ ही उसका बेहद खास गठजोड़ रॉयल चैलेंजर के साथ भी हुआ है। इस रेस में भला फीवर 104 कैसे पीछे रहता। उसने दिल्ली डेयरडेविल के साथ अपना गठजोड़ किया है। उनके इस अभियान को नाम दिया गया है ‘डेयरडेविल दीवानगी’ जिसमें कैप्टेन नॉक का एक पैकेज दिया जा रहा है जिसके तहत खिलाड़ी श्रोताओं के घर जाते हैं ताकि उन्हें सिटी मैच के लिए आमंत्रित किया जा सके।
फीवर एफएम के प्रमुख(मार्केटिंग ऐंड प्रमोशन) गौरी कापरे का कहना है,’हमारी पहल को बेहतर रिस्पांस मिला है और आईपीएल एक अच्छा मौका है जिससे हम अपने श्रोताओं से सीधे जुड़ सकें।’ रेडियो के जरिए इस तरह के कार्यक्रमों के प्रसारण से प्रायोजकों को भी अपने बिजनेस के लिए प्रोत्साहन मिलता है। मैक्सस वर्गीज का कहना है,’रेडियो की सबसे बड़ी भूमिका यह है कि इसके प्रमोशन के जरिए भी लोग स्टेडियम में खिंचे चले आएंगे।’
आईपीएल टीम के मालिक को 80 प्रतिशत सीटों की टिकट की कमाई का अधिकार है। ऐसे में यह महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि दर्शकों को खेल के मैदान तक जाने के लिए उत्साहित किया जाएं ताकि लागत के मुताबिक मुनाफा भी कमाया जा सके। कई प्रायोजको ने अपने शहर के रेडियो स्टेशन से संपर्क किया है इसकी वजह है आईपीएल का बढ़ता क्रेज और रेडियो माध्यम तक लोगों की पहुंच। इससे भारत के बाहर किसी देश से साझेदारी में भी परेशानी हो रही है।
ज्यादातर शहरों में रेडियो स्टेशन और टीम या आईपीएल के साथ कोई खास गठजोड़ नहीं बना है। एक वरिष्ठ मीडिया बायर का कहना है,’अलग क्षेत्रों में रहने वाले ज्यादातर दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए सभी प्रमुख रेडियो स्टेशनों को कुछ उपाय करना होगा।’ कुछ रेडियो स्टेशनों का दावा है कि उन्हें इससे कुछ खास फायदा नहीं पहुंचा है। रेडियो सिटी के कुकियन और फीवर104 के कापरे का कहना है कि आईपीएल से उनके कारोबार में कोई खास मुनाफा नहीं हुआ है।
कापरे का कहना है,’सच्चाई तो यह है कि आईपीएल ने रेडियों के ज्यादातर विज्ञापनों को छीन लिया है। अब तो पैसे टीवी पर विज्ञापन देने के लिए खर्च किए जाते हैं। फिलहाल स्थिति ऐसी आ गई है कि कोक और हीरो होंडा ने तो दूसरे खर्चो को बंद कर केवल आईपीएल पर ही अपना ध्यान केंद्रित किया है।’ लेकिन एफएम स्टेशनों को अब भी उम्मीद है कि उनका मिला-जुला समसामयिक कार्यक्रम और आईपीएल का दौर खत्म होने के बाद मीडिया विमर्श ही उनके लिए राह तैयार करेगी।
कुकियन यह आशा जताते है कि दूसरे सीजन से रेडियो स्टेशनों की मासिक आय में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। कापरे को भी यह उम्मीद है,’आईपीएल के लिए एक सोच के साथ मीडिया प्लानिंग भी काफी बेहतर हो रही है। हम उम्मीद करते हैं कि रेडियो स्थानीय स्तर की मार्केटिंग के लिए काफी फायदा दे सकती है। हालांकि रेडियो को भी आईपीएल की सफलता को भुनाने के लिए अपनी कुशलता दिखानी होगी और बेहतर उपाय करने होंगे।’