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फीका पड़ता जा रहा मोबाइल एंटरटेनमेंट

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 10:41 AM IST

कुछ महीने पहले तक कंटेंट मुहैया कराने वाली कंपनियां मोबाइल एंटरटेनमेंट के जरिए पैसे बनाने की होड़ में लगी हुई थीं लेकिन अब उन्होंने अपनी विस्तार की योजनाओं को फिलहाल छोड़ दिया है।


इस पर विचार करें। सबसे बड़ा प्रसारर्णकत्ता स्टार इंडिया मोबाइल इंटरैक्टिव डिवीजन के स्टार मोबाइल एंटरटेनमेंट ने मोबाइल उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए कुछ गंभीर कदम उठाया। इसमें स्टार मोबाइल एंटरटेनमेंट ने मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए एक ऐसी सेवा का विकल्प दिया जिसके जरिए वे स्टार इंडिया नेटवर्क के टीवी सीरियलों को मोबाइल पर भी देख सकते थे।

हाल ही में इसने अपनी यह योजना की समीक्षा की है। पिछले साल जब इस पहल की शुरुआत की गई थी तब उपभोक्ताओं को एक महीने मुफ्त सेवा लेने के बाद 30 रुपये प्रति महीने की दर से असीमित इस्तेमाल करने का ऑफर भी दिया गया था। यह एसएमएस और डेटा ट्रांजेक्शन के चार्ज जो 1 एमबी डेटा के लिए 10 रुपये था, उसके अतिरिक्त था। हालांकि थोडे दिनों बाद ही यह महसूस हो गया कि भारतीय बाजार इस तरह की सेवा के लिए बेहतर नहीं है। स्टार अब इस सेवा को मुफ्त मुहैया कराती है।

स्टार मोबाइल एंटरटेनमेंट के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट वीरेन पोपली का कहना है, ‘जब तक वितरण की क्षमता बढ़ाई नहीं जाती तब तक कोई भी बिजनेस मॉडल कारगर नहीं हो सकता। इसी वजह से मोबाइल पर सीरियल को लॉन्च करने की योजना को कुछ दिनों के लिए रोक दिया गया है।’ केवल स्टार ने ही ऐसा कदम नहीं उठाया है बल्कि हंगामा मोबाइल ने भी ऐसा ही किया है। पिछले साल इसने मोबाइल पर दस कहानियां लॉन्च की थीं और उनका अनुभव भी कुछ अच्छा नहीं रहा।

हंगामा मोबाइल के एमडी नीरज रॉय का कहना है, ‘हमने यह पाया है कि उपभोक्ता इस तरह के  कंटेट के लिए पैसे देने के लिए ज्यादा इच्छुक नहीं होता है। इसी वजह से ऐसे दौर में इस तरह के कंटेंट को बनाना व्यवसायिक रूप से बेहतर नहीं है।’ इस इंडस्ट्री से जुडे लोगों का ऐसे लोगों की इस बात पर सहमति है कि छोटी फिल्में और सीरियलों के लिए मोबाइल का प्लेटफार्म उतना बेहतर नहीं है। इस तरह के कंटेट मुहैया कराने वाले लोगों के लिए यह बेहद खास कदम है।

एक मीडिया एनालिस्ट का कहना है, ‘उपभोग के  तरीकों में बदलाव आ रहा है और छोटे कंटेट का जोर काफी बढ़ रहा है। हालांकि लोग इस तरह के कंटेट के लिए पैसे खर्च नहीं करना चाहते हैं। अब भी 2 से 3 साल लगेंगे जब लोग इस कॉन्सेप्ट को बेहतर मानने लगेंगे। इसके अलावा बुनियादी सुविधाओं को भी इन सेवाओं को सहयोग देना चाहिए।’ जीटीवी के प्रमोटर एस्सेल ग्रुप से ही जुड़े डिजिटल मीडिया कनर्वजेंस के सीईओ का कहना है, ‘इस तरह की सेवाओं के लिए लोगों के आकर्षण नहीं बढ़ने का कारण बुनियादी ढांचे का अभाव है।’

उनका कहना है, ‘वीडियो को मशहूर बनाने के लिए 3 जी टेक्नोलॉजी की जरूरत होगी। इसके लिए सरकार को स्पेक्ट्रम के  मुद्दों को हल करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा इसमें कोई सही मुनाफा कमाने का मॉडल भी नहीं है और कीमतों का मुद्दा अब तक विवादास्पद मुद्दा है। इसके अलावा मोबाइल उपभोक्ताओं को मोबाइल टीवी तक नहीं ले जाया जा सकता है।’  फिलहाल जी अपना मोबाइल टीवी सर्विस उत्तर भारत के बीएसएनएल उपभोक्ताओं को मुहैया कराती है। इसका बीटा वर्जन भी मुंबई में चलाया जा रहा है। डिजिटल मीडिया कनर्वजेंस टीवी के कुछ खास सीरियलों के एपीसोड यात्रा वृतांत, व्यंजन बनाने के तरीके और मूवी क्लिप दिखाने की सुविधा भी देती है।

First Published : July 10, 2008 | 11:17 PM IST