कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच एक नए रिश्ते की शुरुआत भले ही हुई हो, पर कई लोग ऐसे होंगे जिन्हें यह रिश्ता हजम नहीं हो पा रहा होगा।
पर ऐसे लोगों को अपने दिमाग पर ज्यादा जोर देने की जरूरत नहीं है क्योंकि शायद वे यह भूल रहे हैं कि राजनीति में न तो कोई किसी का दोस्त होता है और न दुश्मन। अगर कुछ सबसे पहले होता है तो वह है अपना हित।
अपने निजी स्वार्थ को साधने के लिए इस दुनिया (राजनीति) में कोई कभी भी किसी का भी हाथ थाम सकता है। पर हम एक झटके में उन पुरानी यादों को भूल नहीं सकते जो इन दोनों पार्टियों के बीच की रंजिश की याद दिलाता है। इतिहास गवाह है कि इसी समाजवादी पार्र्टी के नेता कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते आए हैं। पर अगर अब कोई इन पुरानी घटनाओं का जिक्र अमर सिंह के सामने कर दे तो यह उन्हें नागवार गुजरता है।
हाल ही में एक टीवी चैनल ने अमर सिंह के पुराने बयानों का प्रसारण किया तो वे इतने खफा हो गए कि उन्होंने उस चैनल के रिपोर्टर को अगले दिन संवाददाता सम्मेलन में आने तक नहीं दिया। ऐसा नहीं है कि केवल समाजवादी पार्टी को कंाग्रेस से परेशानी रही है, खुद सोनिया गांधी भी कई पुरानी बातों को अब याद रखना नहीं चाहती होंगी। पर शायद रह रह कर उन्हें अब भी वह बात कचोटती होगी जब करीब एक दशक पहले समाजवादी पार्टी पर भरोसा करते हुए ही वे लोकसभा में सरकार बनाने चली थीं, पर ऐन मौके पर समाजवादी पार्टी ने ही उनका साथ छोड़ दिया था।
उसके बाद भी तकरार का यह सिलसिला रुका नहीं था। गांधी परिवार की एक चाय पार्टी में अमर सिंह को न्योता नहीं दिया गया था और इसकी आम जनता के बीच काफी चर्चा हुई थी। अब आप या तो ये कह सकते हैं कि इन राजनीतिज्ञों का दिल इतना बड़ा है कि वे किसी बड़े मुद्दे पर अपनी व्यक्तिगत लड़ाई को भूल जाते हैं या फिर आप यह कहेंगे कि सत्ता का मोह इतना बड़ा होता है कि दिलों में आई दरार को भी भर देता है। यहां वाम दलों की चर्चा करना भी जरूरी है जिसके बिना यह कहानी पूरी ही नहीं हो सकती।
वाम दलों ने समर्थन वापस खींचने की धमकी देकर जो तुरुप का पत्ता फेंका था, वह भी बेकार चला गया। ऐन मौके पर समाजवादी पार्टी कांग्रेस सरकार को समर्थन देने के लिए आगे आ गई और अब वाम दलों के समर्थन वापस लेने के बाद भी कांग्रेस यह दावा कर रही है कि वह लोकसभा में बहुमत साबित कर देगी। और अगर ऐसा हो जाता है तो वाम दलों और बीजेपी के मुंह पर ताला लग जाएगा जो अब तक यही दोहराते आए हैं कि कांग्रेस सरकार बिना बहुमत के अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर कदम आगे बढ़ा रही है।
समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस सरकार को बिना किसी शर्त के समर्थन दे , ऐसा मुमकिन नहीं है। अमर सिंह खुद राजनीतिक तिकड़मों में काफी माहिर हैं औैर उन्हें अपना हित साधना आता है। पर कांग्रेस से यह उम्मीद तो है कि वह जायज और नाजायज मांगों में फर्क कर सके।