रिकवरी एजेंट का नाम सुनते ही दिमाग में एक हट्टे कट्टे, रफ ऐंड टफ बात करने वाले या किसी टपोरी जैसे व्यक्ति की तस्वीर आती है लेकिन इन सबकी फौज रखने वाली रिकवरी एजेंसियों को वसूली के मामले में पटखनी दी है एक ऐसी रिकवरी एजेंसी ने जिसमें एजेंट के रुप में काम करती हैं सिर्फ लड़कियां।
ये लड़कियां देखने में दूसरी लड़कियों की तरह ही नाजुक और खूबसूरत दिखती हैं, लेकिन उनके इरादे काफी सख्त होते हैं। सिर्फ सार्वजनिक बैंकों के लिए रिकवरी का काम करने वाली इस अधिकृत जब्ती एवं वसूली एजेंसी ने वित्त वर्ष 2007-08 में सरकारी बैंकों को 700 करोड़ रुपये वसूले हैं और इस वर्ष उसका लगभग 1000 करोड़ रुपये वसूलने का इरादा है।
एजेंसी की संयुक्त प्रबंध निदेशक मंजू भाटिया (22 वर्ष) कहती हैं कि वसूली का काम लड़कियों के जिम्मे रहता है। बैंक से निर्देश मिलते ही इन लड़कियों की एक टीम काम पर निकल पड़ती है। सबसे पहले उस एरिया की पुलिस को जानकारी दी जाती है, फिर कर्जदार के पास जाकर शिष्टता के साथ हम लोग पूछते हैं कि कर्ज न चुकाने के पीछे कारण क्या है। कर्जदार की परेशानी सुनने के बाद उसकी हरसंभव मदद भी हम लोग करते हैं। इनकी एक टीम में 8 से 10 लड़कियां, संबधित बैंक के अधिकारी और पुलिस का बैकअप रहता है।
मंजू जोर देकर कहती हैं कि हमारा उद्देश्य हमेशा यह रहता है कि पैसा भी निकल आए और लोगों को कम से कम परेशानी भी हो। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर के लिए मुंबई की एक चर्चित इमारत पर इन बालाओं ने कब्जा कर लिया जिसके लिए इन्हे अंडरवर्ड से धमकी भी मिली थी क्योंकि माना जा रहा हैं कि पॉश इलाके मालाबार हिल में स्थित लगभग 105 करोड़ रुपये वाली इस इमारत के तार सीधे डी कंपनी से जुडे हुए हैं।
रिकवरी जैसे जोखिम का काम करने वाली इन लड़कियों का कहना है कि यह काम गंदा नहीं हैं, हम तो बैंक और कर्जदार के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। इस व्यवसाय को कुछ बैंकों के रिकवरी एजेंटों ने बदनाम किया है जिसका खमियाजा कभी कभी हमें भी भुगतना पड़ता है। इस एजेंसी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक पराग शाह बताते हैं कि उन्होंने बचपन से देखा था कि लोग लड़कियों की बात मान लेते हैं। इसके पीछे वजह है लड़कियों की प्यार से बात करने की आदत।
उनका कहना है कि हम सिर्फ सरकारी बैंकों के लिए ही काम करते हैं और आगे भी करते रहेंगे क्योंकि इन बैंकों का जो बकाया होता है उसमें किसी तरह का धोखा नहीं रहता है। दो अक्टूबर 1998 में वसूली का काम शुरु करने वाली अधिकृत जब्ती एवं वसूली रिकवरी एजेंसी आज महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, गोवा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक और उड़ीसा जैसे 10 राज्यों में अपना जाल फैला चुकी है। इस समय 24 से ज्यादा सार्वजनिक बैंकों के डूबे हुए पैसे निकालने की जिम्मेदारी इस एजेंसी के पास है। एजेंसी में कुल कर्मचारियों की संख्या 250 है जिनमें 200 से अधिक लडक़ियां हैं।