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अब कोच्चि बंदरगाह छाएगा दुनिया के नक्शे पर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 4:40 PM IST

दुनिया में बेहद मशहूर ‘वोल्वो ओशियन रेस’ अब पहली बार भारत में भी 3 दिसंबर को दस्तक देने वाली है।


यह मौका रेस शुरु होने के 35 साल बाद भारत में आ रहा है। इस अद्भुत नौका रेस में 7 नौकाएं शामिल हैं जो दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन से चलकर कोच्चि बंदरगाह तक आएंगी। कोच्चि में इन नौकाओं के नाविक यहां 10 दिनों तक ठहरेंगे उसके बाद फिर यह रेस सिंगापुर के लिए शुरु होगी।

गौरतलब है कि यह रेस पहली बार 1973 में व्हिटब्रेड राउंड दी वर्ल्ड रेस के  नाम से शुरु हुई थी। इस रेस के यहां होने की वजह से कोच्चि अब दुनिया के नक्शे पर उभर कर आ गया है। इस रेस के लिए केरल पर्यटन विभाग और कोचीन पोर्ट ट्रस्ट दोनों मिलकर 30 करोड़ रुपये खर्च करने वाले हैं। यहां नाविकों और दर्शकों और मीडिया की आवभगत के लिए सारी तैयारियां चल रही हैं।

इस रेस को 180 देशों के 180 करोड़ दर्शक देख पाएंगे। इस वजह से अधिकारी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। इसी वजह से लंगर डालने वाली जगहों को एक नया रूप दिया जा रहा है। जब यहां से रेस वाली नौकाएं चली जाएंगी तब बड़े समुद्री जहाज भी लंगर डाल सकेंगे। इसका एक और फायदा यह होगा कि यहां परंपरागत नौकाओं को भी पर्यटकों को लुभाने के लिए रेस आयोजित करने की अनुमति मिल जाएगी।

केरल के बैकवॉटर में चलने वाली हाउस बोट (केटुवल्लम) एक बार फिर से नजर आएंगी। वोल्वो ओशियन रेस के आयोजकों ने रेस के लिए बेहतर जगह ढूंढने के लिए पश्चिम एशिया के कई भागों का दौरा किया था लेकिन उन्हें मालाबार का रत्न कोच्चि ही सबसे बेहतर जगह लगी। उनके इस फैसले की एक और वजह यह हो सकती है कि इस साल मार्च में ही वोल्वो कार ने भारतीय कार बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

वोल्वो को उम्मीद है कि पहले साल में ही देश में 500 कारें बिक जाएंगी। फिलहाल इस कार के डीलर दिल्ली, चंडीगढ़ और बेंगलुरु में हैं जहां अब तक 100 से ज्यादा कारों की बिक्री हो चुकी है। फोर्ड कंपनी की कार वोल्वो फिलहाल देश में मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी के साथ प्रतियोगिता में शामिल है। हालांकि इन तीनों ब्रांड ने देश में बेहतर विज्ञापनों के जरिए अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है जबकि वोल्वो अभी बहुत नई है।

वोल्वो ओशियन रेस एक तरह से अपनी ब्रांड इमेज को बनाने की कोशिश भी कही जा सकती है। यह दुनिया की  सबसे बेहतर नौका रेस के  इवेंट के तौर पर मानी जाती है। दूसरी रेस स्पेन में 4 अक्टूबर से स्पेन के एलीकैंट से शुरू होगा और अगले साल 27 जून को सेंट पीटर्सबर्ग में खत्म होगी। इस दौरान इस नौका रेस में हिस्सा लेने वाली टीमें 39,000 समुद्री मील की दूरी तय करेंगी और 11 बंदरगाहों पर भी रुकेंगी।

यह अब तक होने वाली रेसों में सबसे लंबी रेस होगी। हर नौका में 10 नाविकों का समूह होगा और पहली बार इसमें पत्रकार भी होंगे। इस रेस के दौरान नौकाएं 20 से ज्यादा दिनों तक अपनी निर्धारित जगहों पर ठहरेंगी। इस रेस में मुकाबले के लिए तैयार नाविकों को समुद्री झंझावात को झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा।

नाविकों को अपने इस समुद्री सफर के दौरान आंधी, तूफान, समुद्री मलबे, हिमखंडों और व्हेल जैसे जंतुओं का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के आयोजनों के जरिए दुनियाभर के नौका रेस के दीवानों को लुभाया जा सकता है। उन कद्रदानों में से 38 लाख रुपये से 54 लाख रुपये वाले वोल्वो कार के कुछ भावी ग्राहक भी बन सकते हैं।

इस तरह की कीमत देने वाले लोगों की उम्मीद यह होती है कि ऐसी गाड़ियां  आधुनिकतम तकनीक से लैस हों। मसलन इसमें डीजल पार्टिकल को खुद ही फिल्टर करने की सुविधा हो। इस तरह की तकनीक में बहुत ज्यादा तापमान में डीजल बिना किसी हानिकारक धुआं के जल जाता है। भारत में लक्जरी कारों के बढ़ते बाजारों के देखते हुए पहली बार वर्ष 2004 में वोल्वो का ध्यान इस ओर गया।

इसी वजह से पहली बार पॉल डी वोई को बाजार का अंदाजा लगाने के लिए भेजा गया। दो साल पहले जब वोल्वो ने कार लॉन्च करने से पहले अपनी मशीनों को टेस्ट करने के लिए दो कारों को भारत भेजा जिससे 100,000 किलोमीटर की दूरी तय की गई। इसके टेस्ट का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या वोल्वो का बेहतरीन इंजन लोकल डीजल के बलबूते चल पाएगा?

दूसरे देशों में इस तरह के 100,000 किलोमीटर की दूसरी वाले टेस्ट ड्राइव में चार महीने लगते हैं। हालांकि भारत में इसके प्रयोग के तौर पर सिंथेटिक ल्युब्रीकेंट का इस्तेमाल किया गया जो इस कार की पहली जरूरत थी। साल के अंत में इस कार के टायर को छोड़कर इसके इंजन में कोई खराबी नजर नहीं आई।

First Published : August 11, 2008 | 10:39 PM IST