बाजार में हर जगह होड़ है, कुछ अलग दिखने की तो कुछ अलग दिखाने की। जी हां हम बात कर रहे हैं मीडिया और इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के एक खास हिस्से, न्यूज चैनल के बाजार की। इस बाजार में खबरों के बजाए मनोरंजन बिक रहा है।
खबरिया चैनलों के लिए मनोरंजन का तड़का इतना जरूरी हो गया है कि खबरों में कॉमेडी का पुट डाले बिना, तो कोई बात ही नहीं बनती। अगर आपको अब भी यकीन नहीं हो रहा है तो आप 2006-07 के आंकड़े देख सकते हैं। इसमें साफ दिखता है कि खबरों के इस बाजार में सिर्फ मनोरंजन ही बिक रहा है।
हिंदी न्यूज चैनलों में फिलहाल ‘आज तक’ और ‘हेडलाइंस टुडे’ की मालकिन कंपनी टीवी टुडे की सेहत सबसे बेहतर बताई जा रही है। इस कंपनी को 2006-2007 में केवल 31 करोड़ रुपये का ही मुनाफा हुआ। दूसरी तरफ, प्राइम टाइम (शाम के 7 से 11 बजे तक का वक्त) के के वल चार घंटे में ही सास-बहू की गाथा को दिखा कर बालाजी फिल्म्स को 79 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा मिला।
उसी तरह जी न्यूज को इसी अवधि में जहां 9 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जबकि जी के इंटरटेनमेंट चैनल को 166 करोड़ रुपये का मोटा-ताजा मुनाफा हुआ। आलम तो यह है कि खबरों में काफी संजीदगी बरतने वाले एनडीटीवी को 2007 में 6 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी तरफ, अगर इस साल मार्च तक के तिमाही नतीजों पर हम नजर डालें तो हालत थोड़ी अच्छी लग रही है।
जी न्यूज को 15 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, वहीं एनडीटीवी को 3 करोड़ रुपये का। दूसरी ओर इंटरटेनमेंट चैनलों मसलन जी इंटरटेनमेंट को इस साल के तिमाही नतीजों के मुताबिक 79 करोड़ और बालाजी फिल्म्स को 24 करोड़ का मुनाफा हुआ। इस बाजार में सबसे तेज, सबसे बेहतर खबर दिखाने का दावा होता है। खबर से आपको बांधे रखने के लिए कई तरह के दावे और वादे किए जाते हैं मसलन अब हम जो दिखाने जा रहे है वो खबर एक्सक्लूसिव है और आप सिर्फ हमारे चैनल पर ही इसे देख सकते हैं।
न्यूज चैनलों ने मनोरंजन के रंग में अपने आप को इस कदर रंगा है कि आपकी नजर और कान खबर को तरसते ही रह जाए। इन चैनलों की दुहाई यही है कि दर्शक कॉमेडी, सेक्स और अपराध की खबरों में ज्यादा रुचि लेते हैं। इस साल हिंदी भाषी क्षेत्रों में जनवरी-अप्रैल महीने में न्यूज चैनलों के मार्केट की बानगी देखें तो हम पाएंगे कि हिंदी खबरिया चैनल का मार्केट 6.5 फीसदी रहा है, जबकि अंग्रेजी न्यूज चैनल का बाजार केवल 0.5 फीसदी।
बिजनेस न्यूज चैनलों का मार्केट शेयर 0.6 फीसदी है वहीं क्षेत्रीय न्यूज चैनल के बाजार पर नजर डाले तो यह 1.7 फीसदी रहा है। आईबीएन 7 के आशुतोष कहते हैं कि, ‘हिंदी न्यूज चैनल का मार्केट अंग्रेजी के मुकाबले तो काफी बढ़ा है। केवल दिल्ली और मुंबई का न्यूज चैनल 40 फीसदी मार्केट कवर करता है। न्यूज चैनल बाजार में कंटेट की चुनौती सबसे बड़ी चुनौती है। कई टॉप चैनलों की खबरों में खबर होता ही नहीं है।’
टैम के मुताबिक एनडीटीवी इंडिया का 7 प्रतिशत, एनडीटीवी 24*7 का 23 प्रतिशत और एनडीटीवी प्रोफिट का 44 प्रतिशत मार्केट शेयर है । जहां तक इसके विज्ञापनों की बात है 2008 के वित्तीय वर्ष में विज्ञापनों के जरिए 18 प्रतिशत से ज्यादा की दर से 290 करोड़ की कमाई हुई। जी न्यूज के सीईओ बरून दास ऐसा मानते हैं कि बाजार में कंटेट को बेहतर बनाने की चुनौती तो है ही।
इस खबरिया चैनलों के बाजार में मुनाफा तो कमाना ही है हर कीमत पर। इस बाबत मीडिया विशेषज्ञ आलोक पुराणिक का कहना है कि न्यूज चैनल का बाजार मोटा मुनाफा दे रहा है, इस बात में संदेह है। हालांकि वह स्वीकारते हैं कि जैसे बाजार में कुछ बड़े अखबार हैं बावजूद इसके छोटे अखबारों का कारोबार भी चलता रहता हैं। उनका कहना है कि, ‘न्यूज चैनल बाजार में आते रहेंगे लेकिन वे बंद नहीं होंगे, मुझे लगता है कि अगर बाजार में कोई ऐसा खिलाड़ी आना चाहेगा जिसके पास पैसा होगा तो वह इन छोटे चैनलों के टेकओवर के जरिए बाजार में आने की कोशिश कर सकता है।’
न्यूज चैनलों के रंग रूप में बदलाव लाने में विज्ञापनों की भी भूमिका है। न्यूज चैनलों के टारगेट दर्शक ज्यादातर पुरुष वर्ग ही होते हैं इसीलिए विज्ञापन भी पुरुषों को लुभाने वाले ही होते हैं। जेनिथ ऑप्टीमीडिया की अनिता नायर का कहना है कि चैनल शेयर की जहां तक बात है टीआरपी रेटिंग कम होने से भी विज्ञापनों पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता । इसकी वजह यह है कि विज्ञापन चैनलों की साख, उसके कंटेट और न्यूज इंवायरमेंट पर निर्भर होती हैं।
अंग्रेजी न्यूज चैनल की रेटिंग कम होती है, लेकिन उनमें विज्ञापनों की कीमत ज्यादा होती है। चैनलों की मार्केट शेयर के हिसाब से प्रति रेटिंग के मुताबिक कीमतें तय की जाती है। उनके मुताबिक ‘आज तक’ पहले नंबर पर है तो दूसरे स्थान पर स्टार न्यूज, फिर जी न्यूज उसके बाद इंडिया टीवी। विज्ञापनों के लिए न्यूज चैनल की साख बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस साल 13 अप्रैल से 17 मई तक के टैम के आंकड़ों के मुताबिक आज तक सभी चैनलों में आगे रहा। उसका चैनल शेयर 18 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर इंडिया टीवी और स्टार न्यूज दोनों का चैनल शेयर 17 प्रतिशत रहा यानी वे दूसरे स्थान पर रहे। जी न्यूज का चैनल शेयर 11 प्रतिशत रहा जबकि एनडीटीवी का चैनल शेयर 8 प्रतिशत रहा और आईबीएन 7 का चैनल शेयर 7 प्रतिशत रहा।
अगर अंग्रेजी न्यूज की बात करें तो हम पाएंगे कि एनडीटीवी का 24*7 का इसी अवधि में चैनल शेयर 32 प्रतिशत था वही सीएनएन आईबीएन का 27 प्रतिशत रहा। खबरों के इस बाजार में प्रतियोगिता आने वाले वक्त में और भी गलाकाट होने वाली है। कुछ टॉप चैनल पहले से ही मौजूद हैं, तो कुछ नए चैनल लॉन्च हो चुके हैं तो कुछ लॉन्च होने वाले हैं।
हाल में लॉन्च हुए न्यूज चैनल हैं इंडिया न्यूज, न्यूज 24, सीएनईबी और वॉयस ऑफ इंडिया। कई चैनल लॉन्च होने की कतार में भी हैं मसलन सकाल का न्यूज चैनल, आईनेक्स का हिंदी न्यूज चैनल। न्यूज 24 की प्रमुख अनुराधा प्रसाद का कहना है कि सभी टॉप चैनलों के मुकाबले उनके चैनल की रेटिंग भी सही है क्योंकि अभी तो उन्होंने हाल में इस चैनल को लॉन्च किया गया है।
उनका मानना है कि बाजार में हमेशा बेहतर खिलाड़ी ही टिकते हैं। आशुतोष का कहना है कि कई चैनल के आने से बाजार में चुनौती तो है ही। ज्यादा विकल्प होने की वजह से बाजार और विज्ञापनों का हिस्सा भी बंट सा जाता है। आशुतोष कहते हैं कि, ‘नए और पुराने चैनलों के सामने प्राइम बैंड में बने रहने की भी चुनौती होती है। वैसे न्यूज चैनल जो खबर कम और मनोरंजन कार्यक्रम ज्यादा दिखाते हैं उन्हें न्यूज चैनल की श्रेणी से अलग करना चाहिए।’
इसी महीने त्रिवेणी मीडिया ने भी वॉयस ऑफ इंडिया नाम का हिंदी न्यूज चैनल लॉन्च किया है। इस चैनल के सीईओ राहुल कुलश्रेष्ठ का कहना है कि क्षेत्रीय बाजार में जाने की तैयारी हो रही है। हाल में लॉन्च हुए चैनल और आने वाले चैनलों की चुनौतियों के संदर्भ में राहुल कहते हैं कि चुनौतियां तो हर जगह होती हैं, यहां भी है। यहां मुनाफे की गुंजाइश है तभी तो कई चैनल लॉन्च हो रहे हैं। अपने चैनल के संदर्भ में राहुल कहते है कि चैनल को दर्शक देखे और यह फैसला ले कि यह चैनल कैसा है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में न्यूज चैनलों में बाजार में बने रहने के लिए कुछ ऐसी होड़ मची है कि खबर को खबर की तरह दिखाने की सीमाएं भी खत्म हो गई। इससे चैनलों की साख पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। बाजार में बने रहना है तो सब कुछ करना है इसी फंडे पर सभी चैनल अपनी कारीगरी दिखा रहे हैं। इस बाजार की रेस में बने रहने के लिए न्यूज चैनल अपने क्षेत्रीय रिर्पोटरों की मदद लेते हैं जिनके सामने कुछ अलग तरह की खबर लाने की चुनौती होती है। ऐसे में कई तरह की प्लांटेड स्टोरी का सहारा भी लिया जाता है।
एनसीआर चैनल एस1 के प्रमुख रवीन्द्र शाह का कहना है कि दिल्ली में सहारा एनसीआर, दिल्ली आजतक और टोटल टीवी एनसीआर की खबरें दिखाते हैं। उनका कहना है कि जैसे अखबारों के स्थानीय संस्करण बेहद जरूरी हो गए हैं वैसे ही न्यूज चैनल के स्थानीयकरण का दौर भी आने लगा है। यही वजह है कि अब कई शहरों में सिटी केबल के जरिए खबरें दिखाईं जा रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह चलन बढ़ता ही जाएगा।
बाजार में टैम के टीआरपी रेटिंग के आंकड़े पर भी कई सवाल उठाए जाते रहे हैं। न्यूज चैनल से ही जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि टैम के आंकड़े तो अपने आप में ही विश्वसनीय नहीं है। कई चैनल प्राइम बैंड में बने रहने के लिए भी कई हथकंडे अपनाते हैं। इस बाजार में कुछ ऐसे मीडिया हाउस हैं जिनका केवल न्यूज चैनल है वहीं कुछ ऐसे मीडिया हाउस हैं जिनका न्यूज के साथ इंटरटेनमेंट चैनल भी है।
बाजार में न्यूज के साथ इंटरटेनमेंट चैनल को लॉन्च करने का जो चलन चल पड़ा है उससे एक बात तो साफ तौर पर दिखती है कि अब मीडिया हाउस इस बात को समझने लगे हैं कि केवल न्यूज से काम नहीं चल सकता। इसीलिए अब न्यूज के साथ इंटरटेनमेंट चैनल भी लाने की कोशिश की जा रही है। मीडिया हाउस मानते हैं कि दर्शक मनोरंजन चाहता है, ऐसे में केवल न्यूज पर ही निर्भर रहने वाले चैनलों के लिए बाजार में टिकना काफी मुश्किल होगा।
देश में अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत होने की वजह से बाजार में कई बिजनेस न्यूज चैनल भी आ रहे हैं। इन चैनलों के मार्केट शेयर कुछ ऐसा रहा है, 2005 में 0.4 फीसदी तो 2006 में 0.5 फीसदी। पिछले साल भी बिजनेस चैनल का मार्केट शेयर 0.5 प्रतिशत ही रहा। राहुल कुलश्रेष्ठ मानते हैं कि भारत में न्यूज चैनल अपने प्रारंभिक दौर से गुजर रहा है यही वजह है कि इसमें नए प्रयोग हो रहे हैं। अभी इसे मैच्योर होने में थोड़ा और वक्त लगेगा।
न्यूज चैनलों के मार्केट शेयर
2005 2006 2007
हिन्दी न्यूज 3.4 3.8 4.2
अंग्रेजी न्यूज चैनल 0.6 0.8 0.9
(स्रोत: टैम मीडिया रिसर्च, आंकड़े प्रतिशत में )
न्यूज चैनलों में विज्ञापन के ट्रेंड
2005 2006 2007
अंग्रेजी न्यूज 9084 15293 21185
हिंदी न्यूज 23062 32156 41185
स्रोत: ऐडएक्स विज्ञापन के आंकड़े (सेकेंड और हजार में )