अंधेरी जिंदगियों को रोशन करने के लिए मुफ्त सेवा देने वाला कोयंबटूर का संकरा आई केयर सालाना 10 लाख लोगों की आंखों की सर्जरी करने का लक्ष्य पूरा करने की राह की ओर बेहतर तरीके से बढ़ रही है।
संकरा पूरे देश में अपने इस काम को बढ़ाने की कवायद शुरू कर चुकी है। सामाजिक सेवा की राह पर बढ़ते हुए इसका लक्ष्य वर्ष 2020 तक विजन 2020 पाने का है। इसके तहत सलाना पूरे देश में सेंटरों में 10 लाख सर्जरी करने की है।
इस समूह ने कर्नाटक में अपने दो अस्पतालों के जरिए कदम रखा है जिसमें एक बेंगलुरु में और दूसरा शिमोगा में है। बेंगलुरु फैसिलिटी अस्पताल मई में खोला गया है और यह अस्पताल 8 दक्षिणी जिलों के लिए काम करेगा और शिमोगा भी ऐसे ही 8 जिलों के लिए काम करेगा। आज देश में कर्नाटक ऐसा तीसरा राज्य है जहां सबसे ज्यादा लोग अंधेपन की बीमारी से ग्रस्त हैं जो इलाज से ठीक हो सकते हैं।
अपने आप में बहुत सक्षम इस चेन का समान मॉडल बेंगलुरु में भी बनाया जा रहा है। इस चेन के तहत एक मरीज जो अपने ईलाज के लिए पैसा दे सकते हैं और चार वैसे मरीज जो पैसा नहीं दे सकते इस अनुपात के साथ काम को पूरा करते हैं। इसके जरिए लागत में कमी लाने का फायदा भी मिलता है। तमिलनाडु के कोयंबटूर और कृष्णन कोविल के 3 केंद्रों और आंध्र प्रदेश के गुंटुर केंद्र में सलाना 75,000 सर्जरी की जाती है। पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ ने भी संकरा को अस्पताल बनाने के लिए निमंत्रित किया है।
संकरा को एक अस्पताल बनाने में लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत आती है। हालांकि बेंगलुरु फैसिलिटी बनाने में 20 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। संकरा ने अपने कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए राबर्ट बॉश फाउंडेशन के साथ तालमेल बिठाया है। इन्फोसिस फाउंडेशन ने कम्यूनिटी आई केयर सेंटर बेंगलुरु फैसिलिटी में बनाया है। संकरा आई केयर इंस्टीटयूशन के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. आर. वी. रमानी का कहना है, ‘हम स्थानीय लोगों के जरिए ही अपना काम करना चाहते हैं। इसीलिए अस्पताल के हमारे सभी स्टाफ आस पास के इलाकों से ही आते हैं।’
यह अस्पताल कुछ युवा और सेल्फ हेल्प ग्रुप की मदद से गरीब मरीजों को ढुंढती है और उनका इलाज करते हैं। इसके अलावा गरीबों के आने-जाने के लिए और रहने के लिए वाहन और रहने के लिए मुफ्त इंतजाम भी करती हैं। इस अस्पताल चेन के सामने फिलहाल अपने फंड को बढ़ाने की चुनौती भी है ताकि इसके जरिए वे अपने प्रोजेक्ट को विस्तार दे सकें। इसके लिए वे विदेशों में रहने वाले भारतीयों के जरिए भी फंड का इंतजाम करना चाहते हैं।
इसके तहत एसोशिएशन ऑफ कन्नड कुटास ऑफ अमेरिका (एकेकेए) बनाया गया है जो बिना किसी मुनाफे के काम करने वाला संगठन है जो उत्तरी अमेरिका में शैक्षणिक, भाषागत और सांस्कृतिक संगठन है। कर्नाटक में एकेकेए कई तरह के धमार्थ काम के लिए पैसे जुटाने के लिए पूरे उत्तरी अमेरिका में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करती है। संकरा भी आंखों की रोशनी के लिए देश के दक्षिणी क्षेत्रों में काम कर रही है लेकिन अब उसकी कोशिश उत्तर में भी अपनी पैठ बनाने की है।
संकरा आणंद में संकारा आई हॉस्पीटल खोल रही है। इस प्रोजेक्ट के लिए फंड का इंतजाम करने के लिए विदेश में रहने वाले इस राज्य के गुजरातियों से भी संपर्क साध रहे हैं। दरअसल संकरा आई फाउंडेशन अमेरिका का एक संगठन है जो बिना किसी लाभ के काम करती है। इस संगठन की स्थापना 1998 में सैन जोस, कैलीफोर्निया में हुई है। इसे कुछ स्वयंसेवी समूह के लोगों द्वारा ही चलाई जाती है और इसके साथ ही भारत में स्थित संकरा आई हॉस्पिटल को भी पूरा सहयोग दिया जाता है।
सामाजिक सरोकार की पहल
सामाजिक सेवा की राह पर बढ़ते हुए इसका लक्ष्य वर्ष 2020 तक विजन 2020 पाने का है। इसके तहत सालाना देश भर में10 लाख सर्जरी करने का लक्ष्य है। इस समूह ने कर्नाटक में अपने दो अस्पतालों के जरिए कदम रखा है।