राष्ट्रमंडल खेलों के स्वयंसेवक की भूमिका निभाने में अब कई बड़े नाम उभर कर आ रहे हैं। जी हां, अब स्वयंसेवकों में अंजलि भागवत, मधुर बजाज और धनराज पिल्लई जैसे नाम शामिल हों तो आपको बेहद हैरानी भी हो सकती है।
लेकिन यह सच है, ऐसा कहना है राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के मुख्य परिचालन अधिकारी विजय गौतम का। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स का आयोजन 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक होने वाला है इसमें ही लगभग 6000 स्वयंसेवकों का चयन किया गया है।
इन स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण का जिम्मा संभाल रहा है सिंब्यॉसिस इंस्टीटयूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट। इन स्वयंसेवकों को अंग्रेजी सिखाने के साथ ही तहजीब भी सिखाने का काम चल रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में अंग्रेजीभाषी शिक्षकों और छात्रों की भूमिका भी काफी अहम होगी।
दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिश स्कूल के साथ मिलकर शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने के लिए एक समिति बनाई है। इस बात का खुलासा किया दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने।
उनका कहना है कि दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनजर राष्ट्रमंडल देशों की भाषा अंग्रेजी की बेहतर तैयारी के लिए ब्रिटिश स्कूल में अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और ये अध्यापक ही स्वयंसेवकों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
दिल्ली सरकार और केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय भी राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनजर कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (सीबीपी) पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि इस बार सरकार ने 2008-09 के लिए पर्यटन विभाग को 150 करोड रुपये मुहैया कराये हैं। पर्यटन विभाग ने भी गाइड को टूरिस्टों के साथ बेहतर तरीके से संवाद करने के लिए अंग्रेजी भाषा की ट्रेनिंग देने की तैयारियां कर रही है।
राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति भी भाषा के स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरे जोर-शोर से तैयारी कर रही है। गौतम का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान केवल आयोजन समिति को ही 15 हजार से 20 हजार स्वयंसेवकों की जरूरत होगी। ये स्वयंसेवक लगभग 34 तरह के काम के लिए चुने जाएंगे।
मसलन, ट्रांसर्पोटेशन, कैटरिंग जैसे काम। इसके लिए आयोजन समिति के एचआर कंसल्टेंट पूरी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ये सलाहकार सभी तरह के जॉब का निर्धारण करेंगे। उसके बाद उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोत का कहना है, ‘मुझे नहीं लगता है कि अंग्रेजी के लिए कोई खास समस्या होगी क्योंकि दिल्ली में अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या अच्छी खासी है। कुछ राष्ट्रमंडल देशों में फ्रेंच, स्पेनिश भाषा बोली जाती है तो उसके लिए दुभाषिया रखे जाएंगे।
हमलोगों की कोशिश यह है कि 6 महीने के अंदर स्वयंसेवक के लिए अखबारों में विज्ञापन दिए जाएंगे। इन स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण के लिए एजेंसियों से संपर्क किया जाएगा।’ आयोजन समिति के अलावा शहरी स्तर पर भी दिल्ली सार्वजनिक परिवहन निगम और पर्यटन विभाग भी भाषा के स्तर पर अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है।
दिल्ली पर्यटन विभाग के अनुमान के मुताबिक 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली में 20 लाख विदेशी पर्यटक और 35 लाख घरेलू पर्यटकों के आने की उम्मीद है। अब दिल्ली के गाइड, कैब ड्राइवर, वेटर और सिक्योरिटी स्टाफ को भी अंग्रेजी सिखाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए बकायदा प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाने की योजना पर अमल भी किया जा रहा है।
कोशिश ऐसी भी की जा रही है कि मार्च 2009 तक होटल, टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हों। इसके अलावा पंजीकृत टूर ऐंड ट्रैवल ऑपरेटर भी अपने स्तर से ड्राइवर को प्रशिक्षण दिलाएंगे। दिल्ली में कई जगह कैब ऑपरेटरों ने भी अपने ड्राइवरों को अंग्रेजी सिखाने की कवायद शुरू कर दी है। गौरतलब है कि दिल्ली में 20,000 कैब ड्राइवर हैं और 15,00 रेडियो कैब ड्राइवर हैं।
राष्ट्रमंडल आयोजन समिति के उपाध्यक्ष रणधीर सिंह का कहना है, ‘राष्ट्रमंडल देशों की मुख्य भाषा अंग्रेजी ही है तो हम स्वयंसेवकों को किसी दूसरी विदेशी भाषा के बजाय अंग्रेजी पर ही तवज्जो देने की बात कर रहे हैं। हम प्रशिक्षण के लिए एजेंसी से बात कर रहे हैं।’ इनके मुताबिक राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान 60 से 70,000 स्वयं सेवकों की जरूरत है। इन तैयारियों को देखकर ऐसा लगता है कि पूरी दिल्ली में अंग्रेजी अपना रंग जमा कर छोड़ेगी।