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अब भदेस में करें परदेस की पढ़ाई

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 06, 2022 | 11:04 PM IST

हरियाणा के एक छोटे से गांव में अब अंग्रेजी में गीत गाया जा रहा है। यह सही है, लेकिन यह स्वाभाविक गीत नहीं है।


वहां के लोग गांव से कोसों दूर, चंडीगढ़ से कक्षा ले रहे शिक्षकों के साथ सुर में सुर मिला रहे हैं। वहां कोई स्कूल या कक्षाएं नहीं हैं, लेकिन हरियाणा के तमाम गावों में छात्र जरूर हैं।


शाम के चार बजते ही कक्षाएं शुरू हो जाती हैं। वहां पर लाइव कक्षाएं शुरू होती हैं और छात्र सुर में सुर मिलाने लगते हैं। छात्र-छात्राएं कॉलेजों से वापस आते हैं और हरियाणा के 5 जिलों में फैले 300 ई-दिशा केंद्रों पर पहुंचते हैं। उनके पहुंचने के बाद कक्षाएं शुरू हो जाती हैं। आइये चलते हैं रोहतक जिले के संपला ब्लॉक के संपला गांव में।


गर्मी के मौसम में सूरज की किरणें हर तरफ से पहुंच रही हैं। कंप्यूटर के स्क्रीन पर शिक्षक, कक्षा की शुरुआत गुड आफ्टरनून से करते हैं। कंप्यूटर पर सूरज की किरणों और गरमी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, चार उत्साही लड़कियों का एक समूह शिक्षा देने लगता है। सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू होता है। शिक्षिकाएं सवाल पूछती हैं और छात्र-छात्राएं उसका तत्काल जवाब देते हैं। 


शिक्षक उनकी प्रतिक्रिया से खुश हैं।  अब वे चाहती हैं कि उन शब्दों पर बातचीत शुरू की जाए, जिससे जो रिश्तों में अक्सर प्रयोग किए जाते हैं। उसके बाद बच्चे नीस (भतीजी), नेफ्यू (भतीजा), ब्रदर (भाई) और अन्य शब्द कहते हैं। कक्षाएं 6 बजे तक चलती हैं। उन्हें दूसरे दिन के लिए गृहकार्य भी दिया जाता है।


शिक्षा का सिलसिला दूसरे दिन तक के लिए बंद कर दिया जाता है। हरियाणा के गावों में अंग्रेजी की शिक्षा के लिए बीबीसी के सहयोग से हजेज कम्युनिकेशंस इंडिया लिमिटेड वीसैट द्वारा ई-दिशा को उपलब्ध कराया जाता है।


इससे वहां के लड़के लड़कियां शिक्षा प्राप्त करते हैं। इस तरह के 1200 केंद्र देश के कई हिस्सों में चलाए जा रहे हैं, जिसमें कर्नाटक, हरियाणा, सिक्किम, त्रिपुरा, और उत्तर प्रदेश के करीब 7,000 गांव शामिल हैं। इसकी नई शाखाएं पूर्वोत्तर और उत्तरांचल में भी खोली जानी हैं। इनमें से सभी केंद्र भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सीएसई योजना के तहत नहीं आते। 


इनमें से कुछ का संचालन कोमाट स्वतंत्र रूप से करता है।  हैदराबाद की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों ने नॉस्काम फाउंडेशन द्वारा संचालित केंद्र से शिक्षा पाकर अपनी पहली एनिमेशन फिल्म बनाई थी।  नॉस्काम फाउंडेशन का संचालन कुछ आईटी कंपनियां सामाजिक दायित्व के तहत करती हैं।


यहां भी वीसैट सेवा हजेज ही प्रदान करती है। नॉस्काम फाउंडेशन के चेयरमैन सौरभ श्रीवास्तव बताते हैं कि अब उत्तर प्रदेश में भी कुछ नॉस्काम नालेज सेंटर और प्राथमिक शिक्षा तथा स्किल डेवलपमेंट केंद्र खोले जा रहे हैं। हरियाणा के जाजपुर जिले के भड़सा गांव में ई-दिशा में आसपास के विद्यालयों के तमाम छात्र-छात्राएं कंप्यूटर की प्राथमिक शिक्षा ले रहे हैं।


ई-दिशा पहले से ही मेडिकल और इंजिनियरिंग की प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन कोचिंग टयूटोरियल्स का संचालन कर रहा है। कोमॉट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और अध्यक्ष श्रीराम राघवन का कहना है, ‘हम कर्नाटक के कोचिंग संस्थानों से समझौता कर वहां के अपने केंद्रों पर कोचिंग की सुविधा दे रहे हैं।’ छात्रों को कंप्यूटर की शिक्षा के लिए महीने के अंत में 640 रुपये देना होता है। इंगलिश स्पीकिंग के लिए तीन महीने के कोर्स की फीस 2000 रुपये है। 


जाजपुर जिले में 45 छात्र हैं, जबकि इतने ही छात्र रोहतक जिले में भी हैं। कोमॉट के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उत्तर प्रदेश के 300 गावों में कक्षाएं शुरू की जाएंगी। दिल्ली के  करीब हरियाणा के दासा गांव के मनोज कुमार  बारहवीं के छात्र हैं और वे कंप्यूटर की पढ़ाई करना चाहते हैं।  ई-दिशा के एक छात्र कृष्ण का कहना है कि उसके पिता ने अपनी दो एकड़ जमीन रिलायंस को बेंची है।


वह इंजिनियरिंग कॉलेज में शिक्षा ग्रहण करने को इच्छुक है। हजेज अपनी वीसैट सेवा के माध्यम से देश भर में कई अन्य कोर्सेज का संचालन करना चाहती है, इसमें इंजिनियरिंग छात्रों के लिए शिक्षा भी शामिल होगी। कोमॉट और हजेज एक योजना पर काम कर रही हैं, जिसमें इंजिनियरिंग और मेडिकल में प्रवेश परीक्षा की तैयारियों के लिए 24,000 रुपये शुल्क लिया जाएगा। साथ ही हरियाणा के ग्रामीण केंद्रों में जल्द ही रिटेल कारोबार के लिए पाठयक्रम की योजना बन रही है।

First Published : May 13, 2008 | 10:53 PM IST