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अधिकारी सीख रहे हैं प्रबंधन के नुस्खे

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 2:02 PM IST

भारतीय अर्थव्यवस्था का मिजाज इन दिनों ठीक नहीं चल रहा है। वैसे बिजनेस स्कूलों की सेहत पर इससे कोई खास असर नहीं पड़ रहा है क्योंकि कंपनियां अपने पुराने और वरिष्ठ अधिकारियों को इन स्कूलों में मैनेजमेंट के गुर सिखाने के लिए भेज रही हैं।


ये कंपनियां यह कवायद इसलिए कर रही हैं जिससे इनकी उत्पादकता बढ़ सके और मैनेजमेंट के नुस्खे सीखकर ये अधिकारी अपने मातहतों को प्रेरित कर सकें। वहीं मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमडीपीएस) के जरिये बिजनेस स्कूलों के राजस्व में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है।

जेके ऑर्गेनाइजेशन की पूर्वी डिवीजन से 275 मिड लेवल अधिकारियों को ऐसी ही छोटी अवधि का कोर्स करने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु भेजा जा रहा है। इस कंपनी की योजना अगले दो साल में कॉर्पोरेट ट्रेनिंग पर तकरीबन 4 करोड़ रुपये खर्चने की है। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी ने पिछले साल 250 एक्जीक्यूटिव को बिजनेस स्कूल में भेजा था तो इस साल यह संख्या बढ़कर 350 होने जा रही है।

एनटीपीसी के कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) जी के अग्रवाल कहते हैं, ‘मंदी के दौर में इस तरह की ट्रेनिंग और डेवलपमेंट कार्यक्रम बहुत कारगर साबित होते हैं। ऐसे में एक कंपनी के बेहतर प्रदर्शन करने में इस तरह के कोर्स काफी अहम भूमिका निभाते हैं।’  इस तरह के कार्यक्रमों में ‘केस बेस्ड टर्नअराउंड मैनेजमेंट’, ‘रेसिलिएंस प्रोग्राम्स’, ‘एंटरप्रेनयोरल डेवलपमेंट’, ‘मैनेजिंग पीपल’ और ‘हाऊ टू अवॉइड अनदर स्लोडाउन’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में एक्जीक्यूटिव एजुकेशन सेंटर के डीन दीपक चंद्रा कहते हैं कि जब बाजार में मंदी का दौर है तो उससे निपटने के लिए कुछ नुस्खे सीखना भी तो जरूरी है। इस तरह से कंपनियां भी अपने मानव संसाधन का बेहतर उपयोग कर सकती हैं। इस तरह के मिड मैनेजमेंट प्रोग्राम रियल एस्टेट, विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, निवेश बैंकिंग, बीमा और ब्रोकरेज कारोबार में खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। जे के ऑर्गेनाइनजेशन के अध्यक्ष (मानव संसाधन-पूर्वी क्षेत्र) कहते हैं कि अधिकारियों को इस तरह की ट्रेनिंग करने से उनमें प्रोत्साहन होता है। और कंपनी का प्रदर्शन बेहतर होता है।

कुल मिलाकर यह अच्छे निवेश की तरह ही है। केपीएमजी से जुड़े गणेश शेरमॉन का कहना है कि ताजा आर्थिक रुझानों में नई चीजें सीखना हर लिहाज से अच्छा ही है। क्योंकि कंपनियों की कोशिश हमेशा ही यही होती है उसमें काम करने वाले लोग वक्त के हिसाब से अपने हुनर को बदल लें, यह उनके और कंपनी दोनों के हित में होता है। 

First Published : July 29, 2008 | 11:29 PM IST