रेजर का खयाल आते ही एक तेज धार वाली चीज की शक्ल ध्यान में आती है जिसको अपने फायदे के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है तो उसकी तेज धार नुकसान पहुंचाने में भी कम नहीं है।
बस जरा सी चूक किसी की जिंदगी और मौत के बीच की बेहद बारीक रेखा को तय कर सकती है। चलिए अब तैयार हो जाइए इसी रेजर के जरिये जिंदगी में आने वाली आम दिक्कतों से निपटने के लिए। आपने नारायण पंडित की मशहूर किताब ‘हितोपदेश’ पढ़ी होगी, अगर पढी भी नहीं होगी तो उसका नाम जरूर सुना होगा।
अब ‘हितोपदेश’ का ‘रीमिक्स’ संस्करण ‘हिट उपदेश-द बुक ऑफ रेजर मैनेजमेंट’ आपके सामने है। मशहूर व्यंग्य लेखक यशवंत व्यास की यह किताब आज की कॉर्पोरेट जिंदगी में सही तालमेल बिठाने वाले नुस्खों के बारे में बताती है। यह किताब आम नौकरीपेशे को ध्यान में रखकर लिखी गई है और वह भी बड़े हल्के-फुल्के अंदाज में।
किताब के मुख्य पृष्ठ पर ही छपा है, ‘वैधानिक चेतावनी- यह किताब काम करने वालों के लिहाज से लिखी गई है। काम देने वालों को सलाह दी जाती है कि इसे कड़ी सुरक्षा में रखें।’ इस किताब में ‘रेजर मैनेजमेंट’ के जरिये यह बताने की कोशिश की है कि कॉर्पोरेट जंगल में रेजर का उपयोग अपने फायदे के लिए कैसे किया जा सकता है?
रेजर जैसे धारदार हथियार को संकेत मानकर इस किताब में 10 उपदेश यानी 10 अध्याय दिए गए हैं। किताब के 10 उपदेशों में लेखक ने कई अवधारणाओं के जरिये अपनी बात पुष्ट करने की कोशिश की है। इन उपदेशों में सूक्तियों की भरमार है।
यहां तक कि किताब की शुरुआत भी ‘हितोपदेश’ की एक सूक्ति से होती है जिसका अर्थ कुछ यूं है, ‘जिस गुण के कारण तुमने आजीविका पाई, जिस गुण के कारण सभी तुम्हारी तारीफ करते हैं, ऐसे गुण की रक्षा करो और जतन से करो।’ यह किताब दावा करती है कि इसको आत्मसात करने से उन लोगों को जरूर फायदा होगा जो कॉर्पोरेट जंगल में घबराकर बदहवास भटक रहे हैं और उनको कहीं से भी रोशनी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
दरअसल ‘हितोपदेश’ पर आधारित ‘हिट उपदेश’ दिलचस्प तरीके से कॉर्पोरेट दौर में रेजर नीति के सही इस्तेमाल का सबक देते हैं। आप प्रभावशाली व्यक्तित्व को जिंदगी की असल धार देने के लिए इस कला का कैसे उपयोग कर सकते हैं, यही बात आपको यह किताब सिखाती है। इस किताब में कई दिलचस्प पहलुओं को उठाया गया है जिनको पढ़ते वक्त आपको इस किताब से अपना जुड़ाव महसूस होने लगेगा।
‘हिट उपदेश’ में कंपनी के मुखिया से लेकर उनके मातहतों तक की प्रकृति को अलग-अलग चरित्रों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया है। इसके लिए लेखक ने केंचुआ, सांप, शेर, सियार, हाथी, मेंढक जैसे जीवों और ‘ऊंची नाक’ जैसे प्रतीकों का सहारा लिया है।