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रामेश्वरम के लिए मुनाफे की सौगात बना रामसेतु विवाद

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 1:04 PM IST

सेतुसमुद्रम परियोजना को लेकर राजनीति का बाजार भले ही काफी गर्म हो चुका है, लेकिन इस विवाद का फायदा तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले के होटल कारोबार को जर्बदस्त रूप से मिला है।


इस परियोजना पर राजनीति के हावी हो जाने से अभी तक काम शुरू भी नहीं हो पाया है। लेकिन राजनीति से बेपरवाह और धार्मिक आस्था से ओत-प्रोत लोगों का कारवां तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले की तरफ रुख कर रहे हैं। हाल ही में इस प्रोजेक्ट पर मचे जोरदार हंगामे ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

मान्यता है कि इस 48 किलोमीटर लंबे पौराणिक सेतु को भगवान राम और उनकी वानर सेना ने बनाया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार 17,000 साल पहले श्रीराम जब अपने वानर सेना के साथ रावण से लड़ने के लिए लंका जा रहे थे, उसी दौरान यह पुल बनाया गया था।

यहां के स्थानीय होटल कारोबार से जुड़े कार्ल मार्क्स का कहना है कि यहां आने वाले पर्यटक 17,000 साल पहले बने इस पुल को देखने के वास्ते अच्छी-खासी रकम खर्च करने के लिए भी तैयार रहते हैं। कार्ल मार्क्स की अपनी फिशिंग बोट भी है। एक घंटे के बोट ड्राइव के लिए वह प्रति व्यक्ति 200 रुपये वसूलते हैं। उनके मुताबिक इस पौराणिक पुल को लेकर राजनीतिक विवाद खड़े होने से लोगों का ध्यान इस जगह की ओर गया।

खासतौर पर हिंदू धर्म पर आस्था रखने वाले लोगों ने इस जगह को देखने के प्रति खासा उत्साह दिखाया। हाल के इस विवाद की वजह से इस जगह तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का जमावड़ा बढ़ने लगा है। यहां के स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि इस कारण यहां होटलों का विकास जबरदस्त तरीके से हुआ। विकास भी केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि कई तरह से हुआ। खासतौर पर बुनियादी सुविधाओं और उनके मुनाफे के लिहाज से तो जबरदस्त विकास हुआ है।

पिछले दो सालों में जब से मौजूदा यूपीए सरकार ने इस परियोजना की औपचारिक घोषणा की थी, तब से लेकर आज यहां होटल रूम्स की तादाद में  5,000 का मोटा इजाफा हुआ है। इस साल 20 नए लॉज के अलावा 7,000 कमरे और बनकर तैयार हो जाएंगे। इसी तरह कई धर्मशालाओं का निर्माण हो रहा है। पहले इनकी संख्या केवल दो थी, लेकिन अब यह बढ़कर 20 हो गई है। ये धर्मशालाएं कई ट्रस्टों के सहयोग से चलाई जाती हैं, जहां पर्यटकों के लिए मुफ्त रहने और खाने की व्यवस्था होती है।

इन धर्मशालाओं की कुल क्षमता 3,000 लोगों के रहने की है और उनमें उनकी क्षमता के 80 से 85 प्रतिशत लोग रहते हैं। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि रामेश्वरम में पर्यटकों की आवाजाही में इजाफे की खास वजह तो रामसेतु का विवादित मुद्दा ही है। स्थानीय होटल कारोबार के प्रतिनिधि के. मुरलीधरन का कहना है, ‘यहां होटलों के 8,500 कमरे हैं। लेकिन पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से फिर भी ये कम पड़ रहे हैं।’ यहां 150 कमरों वाले गणेश होटल के मालिक एस. अन्नामलाई कहते हैं, ‘मांग और आपूर्ति में असंतुलन होने के कारण ही यहां के कमरों का किराया लगभग 200 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

दो साल पहले जहां सिंगल बेड के कमरे का किराया 80 से 90 रुपये हुआ करता था वहीं अब इसी कमरे का किराया 300 रुपये है।’ यहां के स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और ऑटो ड्राइवरों की आमदनी भी बढ़ गई है। यहां के स्थानीय ऑटो ड्राइवर एस. परीराजन 15 साल पहले शिवकाशी से रामेश्वरम आकर बस गए। उस वक्त उनके पास सिर्फ अपने पिता का दिया हुआ ऑटो ही था। पिछले 5 सालों में उनकी रोजाना की आमदनी 30 रुपये से बढ़कर 400 रुपये तक हो गई है और आज उसके पास 3 ऑटो है। यहां के रेलवे अधिकारियों का कहना हैं कि चेन्नई से रामेश्वरम आने वाली ट्रेनें 90 फीसदी भरी रहती हैं। यहां आने वाले ज्यादातर यात्री उत्तर भारत के राज्यों से होते हैं।

First Published : July 25, 2008 | 12:17 AM IST