इसको बनाने में लगभग 2 साल की मेहनत लगी और 80 लाख डॉलर का खर्च आया।
मैं कार्लोस गोज्न के किसी दूसरे आइडिया के बारे में बात नहीं कर रहा हूं जिसमें उन्होंने कुर्दिश बाजार या फिर आर्मेनिया के लिए कार के किसी नये मॉडल के बारे में सोचा है।
दरअसल निसान मोटर्स ने दुनियाभर के ऑटोमोबाइल पत्रकारों को अपने उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला से रूबरू कराने के लिए एक जगह इकट्ठा करने की कड़ी कवायद की। इसे कई मामलों में मैराथन प्रयास ही कहा जाएगा। यह आयोजन निसान 360 के नाम से जाना जाता है, और 4 साल बाद होता है। चार साल पहले यह अमेरिका में हुआ था और इस बार यह पुर्तगाल के समंदर किनारे के शहर कासकेयस में संपन्न हुआ।
माफ कीजिएगा कि आपको अभी तक कार से दूर रखे हुए हूं, लेकिन मुझे लगता है कि उसके बारे में बताने के लिए कुछ पृष्ठभूमि बांधने की जरुरत तो थी। निसान ने शहर भर की उन सारी गाड़ियों को इसमें शिरकत करने का मौका दिया जिन पर कंपनी की मुहर लगी हुई थी। इसमें लगभग तीस पुरानी कारें शामिल हुईं? नहीं इसमें व्यावसायिक वाहन भी शामिल हुए।
अरे, क्या मैंने आपको यह भी बताया है कि वहां और भी कई चीजें मौजूद थीं। इसके बाद उन्होंने दुनियाभर से आए ऑटोमोबाइल पत्रकारों के सामने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया। आपको जिस बारे में बात पूछनी हो उसका जवाब देने के लिए 2 दिन के लिए कंपनी के बड़े से बड़े अधिकारी मौजूद रहे। वैसे अधिकतर कारों ने तो सामान्य सड़कों पर ही दौड़ लगाई लेकिन एलसीवी और क्रेजी 4 गुणा 4 के लिए एस्टोरिल ट्रैक के पास जिमखाना तैयार किया गया था।
हालांकि, हमको सार्वजनिक सड़क पर जीटी-आर को दौड़ाने की इजाजत नहीं थी, इसके चलते हमने ज्यादातर वक्त एस्टोरिल ट्रैक को ही दिया। वास्तव में हमको पूरी लैप के दौरान केवल तीन स्थान ही आवंटित थे, जो इस सुपरकार की पूरी क्षमता को देखने के लिए पर्याप्त नहीं थे। मैंने कई दूसरी कारों को चलाने का अनुभव किया जिसमें वी 6 और वी 8 जैसे एक शब्द वाले नामों वाली कारें भी शामिल थीं।
उनमें से कई कारें आलीशान थीं और उनको देखकर ऐसा लगा कि यह नजारा मानो आज का न होकर 2052 में टोक्यो की सड़क का नजारा है। इसके अलावा मैंने कई एलसीवी की भी टेस्टिंग की। चौंकिएगा नहीं, निसान ने एलसीवी बनाने के लिए अशोक लीलैंड से गठजोड़ कर रखा है।
यह भारत के लिहाज से क्यों महत्त्वपूर्ण है? कारों के अलावा मैंने छोटे और बड़े ट्रकों का भी जायजा लिया। बड़े ट्रकों में एटलियोन और कैबस्टार जैसे नाम शामिल हैं। साथ ही सेडरिक नाम की जापानी टैक्सी की ड्राइविंग का आनंद उठाया जो कि काफी हद तक रेनो कांगू की बहन की जैसी दिखती है। इसका स्टियरिंग बहुत आसान है, साथ ही इसमें 4 एलपीजी सिलेंडर वाला इंजन है, और सबसे बड़ी बात इसका सफर बहुत आरामदायक है।
कुल मिलाकर इसको चलाना बेहद शानदार अनुभव रहा। वैसे निसान ने घरेलू बाजार को देखते हुए इसको बनाया था और यह सिलसिला आज तक बदस्तूर जारी है, इसका सड़कों पर दौड़ना 1987 के टोक्यो शहर की याद दिलाता है। मैंने एकदम नई टिएना को भी चलाया जो कि अगले साल तक भारतीय सड़कों पर दौड़ती हुई नजर आएगी। वैसे भारत में निसान का आधार अभी कम ही है और यह कार बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी को बढ़ा सकती है।
इस लिहाज से यह कार कंपनी के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण हो जाती है। टिएना का नया रूप- रंग भी इसको और भी जानदार और शानदार बना देता है। उम्मीद की जा रही है कि भारत में मार्च 2009 से टिएना की बिक्री शुरू हो जाएगी। और मैं मुरानो कार का ट्रायल करने में भी सफल रहा। वैसे इसमें कुछ नई चीजें भी लगाई गई हैं। बावजूद इसके पुरानी सारी चीजें तो मौजूद हैं हीं। कुल मिलाकर यह शानदार कार है।
त्यौहारों के इस सीजन में इस कार के भारत में लॉन्च होने की उम्मीद की जा रही है। इसके अलावा मुरानो भी अगले साल तक भारत में आ जाएगी। मैं इन दोनों कारों को भारतीय सड़कों पर चलाने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। इस कार का आकार और रूप-रंग भले ही यूरोप में कोई जादू न चला पाए लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि भारत में गोरेगांव से लेकर गुड़गांव तक यह अपना जादू बिखेर पाने में सफल रहेगी।
चाहे वास्तविक जिंदगी की बात करें या फिर मैंने जो इसकी तस्वीरें ली हैं, उनकी समीक्षा करें। मैं इसके वास्तविक आकार के बारे में पूरी तरह से नहीं कह सकता लेकिन लगता है कि यह बीएमडब्ल्यू एक्स-5 के बराबर की है। यह दूसरी पीढ़ी की मुरानो कार है जिसकी इस साल की शुरुआत में ही अमेरिका में बिक्री आरंभ हुई है। अभी इसको जापान और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में लॉन्च किया जाना बाकी है।
मुरानो का पहला मॉडल 2002 में आया था और बहुत ज्यादा सफल भी रहा था। उसकी भी एक वजह थी कि यह दिखने में तो इनफिनिटी जैसी थी कि लेकिन फिर भी ‘निसान की कीमतों’ पर उपलब्ध थी। इसका डिजाइन बेहद शानदार है और इसकी डाउनराइट भी बहुत शालीन है। इसकी कई चीजें ऐसी हैं जो सुकून पहुंचाती हैं। इसमें लगा बोस का स्टीरियो सिस्टम बेहतरीन साउंड क्वालिटी वाला है।
बस जरा सा बटन दबाने की जरुरज है और एक स्वर्गिक आनंद का लुत्फ उठाने के लिए तैयार हो जाइए। वी-6 में निसान का नामी 3500 सीसी का डीओएचसी 24 वॉल्व इंजन लगा हुआ है जो कि जेड में भी लगा रहता है। यह इंजन 6000 रेव्स पर 265 बीएचपी की शक्ति प्रदान करता है तो 4400 रेव्स पर 34.28 किलोग्राम की शक्ति देता है। इसके अलावा मोटर को नवीनतम तकनीक से भी जोड़ा गया है जिस पर एक्सट्रोनिक की मुहर भी लगी हुई है।
मुरानो और टिएना में कुछ समानताएं हैं, दोनों ही कारों में इंजन आगे ही लगा हुआ है। लेकिन निसान में और भी कई विकल्प मौजूद हैं। दरअसल मुड़ने की वजह से मुरानो का बल्क बढ़िया ढ़ंग से छुप जाता है। वी-6 में और भी कई ऐसी चीजें हैं जो आपके सफर को और भी आसान बना देती हैं, जैसे कि इसका बढ़िया सस्पेंशन सिस्टम वगैरह-वगैरह। मुझे इसमें जो चीज पसंद नहीं आई वह है इसका स्टियरिंग सिस्टम जो बेहद हल्का और आसान है।
यह उनके लिए तो बढ़िया है जो गाड़ी चलाते वक्त कुछ और चीजों में मशगूल रहते हैं, लेकिन टेढ़ी-मेढ़ी सड़कों के लिए यह अच्छा नहीं है। जब अगले साल यह भारत में भी आ जाएगी तब मुरानो को 40 लाख से ऊपर की श्रेणी की एसयूवी गाड़ियों से कड़ी टक्कर मिलेगी। वैसे यह कुछ महंगी जरूर लग सकती है, लेकिन जो उत्सुकता इसने जगाई है उसके बारे में भी तो जरा सोचिए।
आइए मिले नए स्कीरोक्को से
फॉक्सवैगन ने 2006 में पेरिस मोटर शो के दौरान अपना प्रदर्शन किया। कई लोगों ने इसी आधार पर यह अनुमान लगा लिया कि यह स्कीरोक्को की वापसी है।
क्या आपको नहीं लगता कि यह एक बेहद खूबसूरत कार है। जी हां हम बात कर रहे हैं फॉक्सवैगन स्कीरोक्को जीटी24 की। हाल ही में आस्ट्रिया के वर्दरसी में फॉक्सवैगन जीटीआई मीट के दौरान इस कार के बारे में सबसे पहले बात सामने आई। सबसे पहले हम बात करते हैं स्कीरोक्को की।
फॉक्सवैगन ने इस कार के जरिए अपनी एक खास छवि को बरकरार रखा। कार की बॉडी बनाने वालों में एक बड़ा नाम था कारमन का जिन्होंने इस कार को बनाया। यह स्कीरोक्को कार गोल्फ कार के जैसा ही था। गुइजियारो की बनाई हुई कार भी गोल्फ पर आधारित था।
किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यहकार खरीदारों के बीच इतनी ज्यादा मशहूर होगी। हालांकि सच्चाई यह है कि फॉक्सवैगन कार को अपने पूराने जमाने से पीछा छुड़ाने में काफी दिन लगे। स्कीरोक्को में 1500 सीसी का इंजन लगा था जिसकी क्षमता 70 या 80 बीएचपी थी। आमतौर कारों के इंजन में जो रेडिएटर लगे होते है जिसके पंखे कार को हवा देते हैं।
वही इस कार में वाटर कूल्ड की व्यवस्था थी। इसके जरिए यह कार अपने समय के लिहाज से काफी मशहूर हो गई। यह कार बेहद खूबसूरत दिखता था और इसकी बिक्री भी बेहतर थी इसी वजह से स्कीरोक्को, फॉक्सवैगन कार के इतिहास में बेहतर मिसाल के रूप में उभरी। इस कार का पहला मॉडल 1974 में आया और तब से हमने एक लंबा सफर तय किया है।
फॉक्सवैगन ने इंटरनेशनल रेस ऑफ चैंपियंस जैसे कॉन्सेप्ट के तर्ज पर ही 2006 में पेरिस मोटर शो के दौरान अपना प्रदर्शन किया। कई लोगों ने इसी आधार पर यह अनुमान लगा लिया कि यह स्कीरोक्को की वापसी है। यह कार जब इस साल मार्च में जेनेवा में प्रदर्शित की गई तब इस शो के दौरान लोगों ने यह समझा की यह कितनी उम्दा और बेहतरीन कार है।
स्कीरोक्को गोल्फ की तरह तो है ही इसकी साइज भी इसी के बराबर है और इसका लुक भी काफी स्पोर्टी है। फिलहाल इसके 122, 160 और 200 बीएचपी क्षमता वाले चार पेट्रोल इंजन मौजूद हैं। इसमें डायरेक्ट इंजेक्शन की सुविधा तो है ही साथ ही 140 बीचपी का एक सीआरडी (कॉमन रेल डीजल) भी है। इसके अलावा भी इसमें कई खूबियां हैं। इसमें सेवेन स्पीड इलेक्ट्रानिक गियर भी है और इसका शेसे भी काफी उम्दा है जिसकी वजह से कार चलाने वाले को काफी मजा आएगा।
ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जब कार भीड़भाड़ वाले इलाके से गुजरे या किसी ऐसी स्थिति में आए जब कार डांवाडोल हो तब संस्पेशन और स्टीयरिंग एक संतुलन बना दें। ऐसी खूबियां अगर किसी कार में आपको नजर आए तो समझिए कि यह कार एक रेस कार की तरह है और आप उस पर जरूरतों के मुताबिक रास्ते पर एक क्रू जर की तरह ड्राइव कर सक ते हैं। स्कीरोक्को का जीटी24 वर्जन रोड पर चलाने के लिए बेहद उम्दा और दमदार है। इस कार का हेडलैंप भी इतना आकर्षक है कि आप का ध्यान इस पर बरबस ही चला जाएगा।