दिल्ली में इन दिनों सिने प्रेमियों पर फिल्मों की खुमारी चढ़ी हुई है। दरअसल दिल्ली के सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम में चल रहे 10वें ‘ओसियान सिनेफैन फिल्मोत्सव’ ने फिल्मों के चाहने वालों को सिनेमा के अलग-अलग रंगों से सराबोर कर रखा है।
न तो फिल्मकार इसमें शिरकत करने का मौका गंवाना चाहते हैं और न ही फिल्मों के प्रशंसक, सब इसकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं। वैसे फिल्मोत्सव 10 जुलाई से हांगकांग के निर्देशक जॉनी टो की फिल्म ‘स्पैरो’ से शुरू हो चुका है लेकिन इसका असली रंग तो अब चढ़ रहा है।’
ओसियान’ द्वारा हर साल जुलाई में आयोजित होने वाले एशियाई और अरब सिनेमा के सबसे बड़े फिल्मोत्सव का सिनेप्रेमियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस बार के फिल्मोत्सव की थीम है ‘रिक्रिएटिंग सिनेमैटिक कल्चर’। इस बाबत ओसियान से जुड़े एक वॉलंटियर कहते हैं कि कहने को तो पूरी दुनिया में हर साल भारत में सबसे ज्यादा फिल्में बनती हैं, लेकिन आप देखिए कि उनमें से कितनी फिल्में याद रखने लायक होती हैं। वह कहते हैं कि भारत में फिल्मों का सीधा सा मतलब है, ‘बॉलीवुड’ जो कि पूरी तरह से व्यावसायिक सिनेमा है।
ओसियान के जरिये हम लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के बढ़िया सिनेमा से रूबरू कराना चाहते हैं। हमारा ऐसा मानना है कि वे फिल्में जिनको समीक्षकों और फिल्मकारों का तो दुलार मिलता है, उनको लोगों का प्यार भी मिलना चाहिए। एक तरह से देखा जाए तो ओसियान एक समर्पित फिल्म संस्कृति गढ़ने की कोशिशों में लगा है। पिछले 10 सालों से यह फिल्मोत्सव हर साल लोकप्रिय होता जा रहा है और इसकी सफलता में जो सबसे खास नाम है वो है ओसियान के संस्थापक अध्यक्ष नेविल तूली का, जिनके प्रयासों से ओसियान ने लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई है।
बकौल तूली, ‘हम अधिक से अधिक लोगों को बढ़िया और सार्थक सिनेमा से रूबरू कराना चाहते हैं।’ पिछले साल फिल्मोत्सव में तकरीबन 40,000 लोगों ने शिरकत की थी। इस बार इस संख्या के दोगुने होने का अनुमान लगाया जा रहा है। क्योंकि इस दफा फिल्मोत्सव के प्रचार पर भी खासा ध्यान दिया जा रहा है। आप दक्षिण दिल्ली में कई डीटीसी बस स्टॉप के साइनबोर्डों पर इसका प्रचार देख सकते हैं। इसके अलावा हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में भी विज्ञापन दिए जा रहे हैं।
इस बार फिल्मोत्सव में 40 देशों की 190 फिल्में दिखाई जाएंगी। इनमें 20 पाकिस्तानी फिल्में भी शामिल हैं। ओसियान से जुड़े एक वॉलंटियर कहते हैं कि 190 में से 20 पाकिस्तानी फिल्में होना इस बात को पुष्ट करता है कि पाकिस्तानी सिनेमा का हाल उतना बुरा नहीं है जितना प्रचारित किया जाता है। इसी कड़ी में चर्चित पाकिस्तानी फिल्म ‘रामचंद पाकिस्तानी’ का भी दो बार प्रदर्शन हो चुका है। फिल्म की निर्देशक महरीन जब्बार का ओसियान का अनुभव बहुत ही बढ़िया रहा।
नोबल पुरस्कार विजेता नगीब महफूज के उपन्यासों पर आधारित तौफिक सालेह की फिल्म ‘फूल्स एली’ और यूसुफ शाहीन की ‘द च्वाइस’ के अलावा जोसेफ सेदार की ऑस्कर के लिए गई बहुचर्चित युद्ध विरोधी फिल्म ‘ब्यूफोर्ट’ इस बार के फिल्म समारोह की बड़ी आकर्षण हैं। लेकिन 10वें ओसियान सिनेफैन फिल्मोत्सव में जिस फिल्म के प्रदर्शन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है वह है 130 मिनट की ‘मुंबई कटिंग’ जिसको समकालीन हिंदी सिनेमा के 11 बेहतरीन निर्देशकों ने निर्देशित किया है।
अब आप ही बताइए कि जिस फिल्म के निर्देशक के तौर पर सुधीर मिश्रा, जॉनु बरूआ, राहुल ढोलकिया, रितुपर्णो घोष, शशांक घोष, मनीष झा, अनुराग कश्यप, रुचि नारायण, आयुष राणा, रेवती और कुंदन शाह के नाम जुड़े हैं तो उस फिल्म की चर्चा होना स्वाभाविक ही है। इसी फिल्म के साथ ही फिल्मोत्सव का समापन भी होना है। इस फिल्म में मॉर्डन मुंबई की जिंदगी को बेहद करीब से दिखाया गया है। इस फिल्म के जरिये कई रंगों को उकेरा गया है।
इसमें एक स्त्री और पुरुष की कहानी है जो अपने बेहद करीबियों को खोने के बाद मिलते हैं, इसमें एक लेखक की कहानी है, फर्जी पासपोर्ट हासिल करने की कोशिशों में लगी मुस्लिम औरत की कहानी के अलावा इसमें आपको बेहद खास ऑडिशन के लिए सड़कों पर दौड़ लगाता हुआ एक्टर भी मिल जाएगा। इस मर्तबा ‘इन-टॉलरेंस’ नाम से नई कैटेगरी शुरू की है जिसके तहत मोहम्मद अल दारादजी की इराकी फिल्म ‘वार, लव, गॉड एंड मैडनेस’ के अलावा बसाम हदाद की ‘अरब्स एंड टैरेरिज्म’ दिखाई जाएगी। इस फिल्मोत्सव के जरिये ओसियान एडवर्ड यंग,नगीब महफूज, विजय तेंदुलकर, क्रिस्टीन हकीम और एलेन रॉब ग्रिलेट को श्रंद्धांजलि दे रहा है।
पिछले फिल्मोत्सव से इस बार का आयोजन कुछ मामलों में जुदा है। पिछले साल तक फिल्म का टिकट 20 रुपये था जबकि इस साल पहले तो 50 रुपये रजिस्ट्रेशन के तौर पर लिए जा रहे हैं और फिल्म का टिकट 30 रुपये का कर दिया गया है। एक बात और कि पिछली बार ओसियान का अजय बिजली के पीवीआर सिनेमाज के साथ गठजोड़ था जिसके चलते कुछ फिल्में पीवीआर साकेत में दिखाई गई थीं जबकि इस साल पीवीआर के साथ ऐसा कोई गठजोड़ नहीं है और फिल्में सीरी फोर्ट ऑडिटोरियम और लोधी रोड स्थित एलायंस फ्रेंकाइस में ही दिखाई जा रही हैं।
अब आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं, अब न तो आईपीएल के पल हैं और एकता कपूर की ‘कहानी आज के महाभारत की’ बासी लग रही है। साथ ही ‘बॉलीवुड’ की भी कोई पटाखा फिल्म भी नहीं आई हुई है, ऐसे में निकल पड़िए ओसियान की ओर और महसूस कीजिए ‘असली सिनेमा’ को।