गत शुक्रवार को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन ने पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के जीडीपी के आंकड़े जारी किए तो इससे कुछ खास हैरानी नहीं हुई।
हालांकि पिछले साल की समान अवधि में विकास दर 9.2 फीसदी थी और इस बार यह घटकर 7.9 फीसदी रह गई है फिर भी मौजूदा हालात को देखते हुए यह अप्रत्याशित नहीं था। यह अलग बात है कि वर्ष 2004 के बाद से यह अब तक की सबसे धीमी विकास दर है।
विश्लेषक भी यह अनुमान लगाते आए हैं कि पूरे वर्ष के लिए विकास दर 7.5 से 8 फीसदी के बीच रहेगी और इसे ध्यान में रखते हुए तिमाही के नतीजे को संतोषजनक कहा जा सकता है। सच्चाई तो यह है कि पूरे वर्ष भर के लिए अनुमानित विकास दर को अगर थोड़ा कम किया जाए तो ही बेहतर रहेगा क्योंकि अगली तीन तिमाहियों के दौरान विकास दर बहुत कुछ पहली तिमाही के जैसी ही रहने की उम्मीद है।
हो सकता है अगली तीन तिमाहियों के दौरान विकास दर का हाल इससे भी बुरा ही रहे क्योंकि आने वाले समय में विकास दर के और कमजोर पड़ने की उम्मीद काफी अधिक है। जहां एक ओर भारतीय अधिकारियों (वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद) को काफी देर से यह एहसास हुआ कि विकास दर 8 फीसदी से भी कम रह सकती है, वहीं अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने पहले ही ताड़ लिया था कि देश में विकास दर धीमी रह सकती है। पर कम से कम इस बात का सुकून तो है कि विकास दर 7.5 फीसदी के आस पास बनी रहेगी।
विकास दर के इस दायरे में बने रहने की संभावना से इस विश्वास को बल मिलता है कि मौजूदा नीतियां देश में निवेश के स्तर को बनाए रखने के लिए कारगर हैं। अगर क्षेत्रवार बात करें तो कृषि क्षेत्र में 3 फीसदी की विकास दर हासिल की गई। हालांकि जुलाई महीने में देश के कई हिस्सों में कम बारिश होने की वजह से हो सकता है कि दूसरी और तीसरी तिमाही में विकास दर का यह ग्राफ कुछ प्रभावित हो।
विनिर्माण क्षेत्र में विकास दर 5.6 फीसदी रही जो पिछले साल के 10.9 फीसदी की तुलना में काफी कम है। हालांकि, इसकी झलक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के मासिक आंकड़ों में ही दिख गई थी। हां, निर्माण क्षेत्र के आंकड़े ने जरूर सबको चौंकाया है। पिछले साल के 11.4 फीसदी की तुलना में इस बार विकास दर 7.7 फीसदी दर्ज की गई।
हालांकि देश में ब्याज दरों के गणित को देखते हुए तो ऐसा लग रहा था कि इस क्षेत्र की विकास दर और धीमी रहेगी। दो प्रमुख सेवा क्षेत्रों ‘कारोबार, परिवहन, होटल और दूरसंचार’ एवं ‘वित्तीय एवं व्यापार सेवाओं’ ने भी दमदार प्रदर्शन किया है और काफी संभावनाएं दिखाई हैं।
जहां पहली श्रेणी में विकास दर पिछले साल के 13.1 फीसदी की तुलना में 11.2 फीसदी रही है, वहीं दूसरी श्रेणी में विकास दर पिछले साल के 12.3 फीसदी की तुलना में 9.3 फीसदी की दर से बढ़ी है। मांग को ध्यान में रखें तो निवेश और जीडीपी का अनुपात 32.3 फीसदी है जो पिछले साल की समान तिमाही से कुछ अधिक है। इसे देखकर कहा जा सकता है कि कारोबार में निवेश अब भी मजबूत बना हुआ है। अगर निवेश और जीडीपी का अनुपात और गिर कर 30 फीसदी तक भी पहुंच जाता है तो भी 7.5 फीसदी के विकास दर को बनाए रखना मुश्किल नहीं होगा।