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स्पाइक प्रोटीन टीके कोरोनावायरस से बचाव में कारगर

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:46 PM IST

 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (आईआईटी मद्रास) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पता चला है कि स्पाइक प्रोटीन टीके कोरोनावायरस (सार्स कोव-2) के कई स्वरूपों से बचाव में प्रभावी हो सकते हैं।
स्पाइक प्रोटीन कोरोनावायरस में पाए जाने वाले चार प्रमुख प्रोटीनों में से एक है जिससे यह सार्स-कोव-2 वायरस को एक मेजबान कोशिका पर ही रोकने में मदद करता है और इसकी वजह से आखिरकार पूरा शरीर संक्रमित हो जाता है।
 अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि डेल्टा प्लस, गामा, जीटा, मिंक और ओमीक्रोन जैसे चुनिंदा स्वरूप के संक्रमण से टीके और टी-सेल प्रतिक्रिया की मदद से बचा जा सकता है। टी-सेल, श्वेत रक्त कोशिकाएं हैं जो हमें कोविड-19 जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करने के लिए अलग-अलग तरीके से काम करती हैं।
प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि ये कोशिकाएं, बीमारी से बचाव में दीर्घकालिक प्रतिरोधक क्षमता तैयार कर सकती हैं। हालांकि प्रयोगात्मक तरीके से इसकी पुष्टि करने की आवश्यकता है और शोधकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा स्पाइक प्रोटीन टीकाकरण, कोरोनोवायरस (सार्स कोव -2) के संक्रमण फैलाने वाले स्वरूप के खिलाफ अधिक प्रभावी हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि टीकाकरण के बाद भी वायरस के मूल वुहान स्ट्रेन के अलावा भी किसी अन्य स्वरूप से संक्रमित होने की घटना होती है तब उससे भी निपटने की तैयारी की जा रही है।
आईआईटी मद्रास के एक बयान में कहा गया है कि सार्स कोव-2 के स्वरूपों में वायरस के स्पाइक प्रोटीन में आणविक स्तर में बदलाव होते हैं और इन विविधताओं में प्रोटीन अनुक्रम शामिल हो सकते हैं जिन्हें एपिटोप्स नाम की टी-कोशिकाओं द्वारा पहचाना जाता है।
जैसे-जैसे वायरस में रूप परिवर्तन यानी म्यूटेशन होता है, यह मेजबान कोशिका को संक्रमित करने की अपनी क्षमता में सुधार करने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल हो रहा है। यह अपनी विकास की प्रक्रिया में अधिक संक्रामक और कम घातक होता जा रहा है।
इस शोध के प्रमुख निष्कर्षों पर के बारे में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सहायक प्रोफेसर वाणी जानकीरमण, स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज, आईआईटी मद्रास के भूपत और ज्योति मेहता ने कहा, ‘इस मामले में, स्पाइक प्रोटीन आधारित टीकों के विभिन्न रूपों में टीके का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि यह केवल एंटीबॉडी प्रतिक्रिया बल्कि टी सेल प्रतिक्रिया को भी बढ़ावा देता है या नहीं।’
वायरस के कई स्वरूपों से बचाव में प्रभावी रहने का आकलन म्यूटेशन के विभिन्न स्वरूप के एपिटोप सीक्वेंस का विश्लेषण करके किया जा सकता है और यह भी पता लगाया जा सकता है कि टीकाकरण प्रक्रिया से टी-कोशिकाओं पर प्रभावी ढंग से असर डाला जा सकता है या नहीं।

First Published : September 27, 2022 | 11:19 PM IST