ईमेल के आ जाने से अब चिठ्ठी-पत्री के दिन बीत चुके हैं। इससे आप जब चाहें, तब किसी को भी, कोई भी संदेश भेज सकते हैं। वह मेल तुरंत उस शख्स तक पहुंच भी जाता है।
साथ ही, इसमें पासवर्ड की भी जरूरत होती है, इसलिए यह सुरक्षित भी था। जो चाहे, वो इसे खोलकर नहीं पढ़ सकता था। इसलिए शुरुआत में लगा कि जैसे ब्रह्मास्त्र मिल गया हो। अब यह सारी दिक्कतों से मुक्ति दिला देगा। लेकिन जैसे कि ज्यादातर तकनीकों के साथ होता, इसके भी जल्दी गलत इस्तेमाल होने लगा।
अपने स्वार्थ या फिर लोगों को परेशान करने के लिए लोगों ने इसका दुरुपयोग शुरू कर दिया। आज पासवर्ड का पता लगाना, तो बाएं हाथ का खेल बन गया। नवी मुंबई में रहने वाला एक अमेरिकी नागरिक, केन हेववुड आजकल इसी तरह के कुछ लोगों की कारस्तानी का खामियाजा चुका है।
दरअसल, अहमदाबाद में शनिवार को हुए धमाकों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों ने मीडिया संस्थानों को जो ईमेल भेजा था, उसके लिए उन्होंने उसी अमेरिकी नागरिक के ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल किया था, वो भी केन की जानकारी के बिना। मतलब, उन्होंने केन के ईमेल को हैक किया था। इसलिए इन ईमेल हैकरों से बचके रहने रे बाबा।
कैसे होती है हैकिंग?
आज की तारीख में कोई भी ईमेल अकाउंट सुरक्षित नहीं है। अब तो इसके लिए कोई बड़ा कंप्यूटर एक्सपर्ट होना भी जरूरी नहीं है। इसे तो कंप्यूटर की थोड़ी सी जानकारी रखने वाला शख्स भी बड़ी आसानी के साथ अंजाम दे सकता है। अब तो किसी के ईमेल को हैक करने की जानकारी बड़ी आसानी से इंटरनेट के विशाल भंडार में मिल सकती है।
इंटरनेट पर कोई भी आधे-एक घंटे तक बिताकर बड़े आराम से हैकिंग में महारत हासिल कर सकता है। वैसे इंटरनेट पर आपके ईमेल ही क्या, कुछ भी सुरक्षित नहीं है। लेकिन ईमेल के साथ दिक्कत यह है कि उसमें आपके सारी निजी जानकारियां स्टोर होती हैं। इसलिए कोई भी उन जानकारियों को हासिल करके उनका गलत इस्तेमाल कर सकता है। वैसे, कई इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर इसके बारे में लोगों को बताते रहते हैं, लेकिन बदकिस्मती से ज्यादातर लोग-बाग इस पर ध्यान नहीं देते। इसलिए वे बड़ी आसानी से हैकरों के शिकार हो जाते हैं।
पहले तो हैकर अलग-अलग पासवर्ड डालकर असल पासवर्ड का पता लगाने की कोशिश करते थे। साथ ही, उन्होंने नकली वेबपेज का इस्तेमाल भी किया। लेकिन जल्द ही कंपनियों को इसका पता लग गया और उन्होंने इसके खिलाफ कई सिक्योरिटी मेजर्स डाल दिए। वैसे, बदलते वक्त के साथ हैकरों ने अपनी रणनीति भी बदल डाली। आज की तारीख में हैकिंग का सबसे आसान तरीका है सोशल इंजिनियरिंग का। इसमें हैकर आपसे फोन या ईमेल करके आपके ईमेल अकाउंट की सारी जानकारियां हासिल कर लेते हैं।
इसके लिए वे आपसे कुछ बेहद मासूम से सवाल पूछेंगे और जैसे ही आप उनका जवाब देंगे, आप हैकरों के जंजाल में फंस जाएंगे। इसलिए ऐसे किसी भी ईमेल या फोन कॉल का जवाब नहीं दें। यहां तक कि अगर आपने यह तक बता दिया कि आपने आखिरी बार अपने ईमेल का पासवर्ड कब बदला था, तो आप उनके गिरफ्तार में आ जाएंगे। कितना आसान रास्ता है न! इसलिए तो कई लोग इस जाल में फंस भी जाते हैं। अगर इस छलावे में न भी आएं तो उनके पास दूसरे रास्ते भी हैं।
यह रास्ता है बग, वायरस और ट्रोजन का। एक बार ये या इनमें से कोई एक भी आपके कंप्यूटर में घुस गया तो आपका कंप्यूटर आपका नहीं, उस हैकर के कहे के मुताबिक काम करेगा। वह बड़े आराम से उन फाइलों में घुस सकता है, जिनमें संवेदशील जानकारियां रहती हैं। वह आपके कंप्यूटर के जरिये कई लोगों का जीना मुहाल कर सकता है। हालांकि, इस गुनाह के लिए वह पकड़ा भी नहीं जा सकता। दरअसल, एक अच्छा हैकर हैकिंग के लिए प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करता है, जिसके जरिये उसे पकड़ काफी मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा, एक और तरीका है कीलॉर्गस का। ये कीलॉर्गस असल में ट्रोजन ही होते हैं। इसमें एक बार ये आपके कंप्यूटर में आ गए तो ये अपने आप एक्टिवेट हो जाते हैं। इसके बाद ये आपके कंप्यूटर के कीबोर्ड की हर हरकत को रिकॉर्ड करने लगते हैं। एक निश्चित अवधि के बाद ये कीलॉर्गस हैकर के पास कीबोर्ड की हरकतों की पूरी फाइल भेज देती है। इसके आधार वह बड़ी आसानी के साथ आपके ईमेल तो क्या, इंटरनेट बैंकिंग अकांउट तक भी पहुंच सकता है। यह तो एक बानगी भर है, ऐसे तो हजारों सॉफ्टवेयर मौजूद हैं, जिसके जरिये लोग आपके ईमेल तक पहुंच सकते हैं।
कैसे बचें हैकिंग से?
इस सवाल का जवाब काफी आसान भी है और बहुत मुश्किल भी। आसान इसलिए क्योंकि आप कुछ बेहद छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर हैकरों के चक्कर में बच सकते हैं। मुश्किल इसलिए क्योंकि हैकर हमेशा आपकी और हमारी सोच से आगे चलते हैं। जरूरी यह है कि आप अपने ईमेल अकाउंट के पासवर्ड में ज्यादा से ज्यादा अंकों और स्पेशल करैक्टर्स का इस्तेमाल करें। साथ ही, अनजान ईमेल्स को न खोलें।
एक शोध का कहना है कि आज की तारीख में भेजे जाने ईमेल्स में से 65 फीसदी स्पैम होते हैं। साथ ही, हर 30 में से एक ईमेल में वायरस होता है। इसलिए हैकरों के चंगुल में आने से बचने के लिए एक अच्छे एंटी वायरस और स्पाईवेयर रिमूवर की जरूरत होती है। साथ ही, जरूरत होती है एक अच्छे फायरवॉल की। अनजान कंप्यूटरों का इस्तेमाल करने से भी बचें। अगर वहां अपने ईमेल अकाउंट को एक्सेस करते भी हैं, तो ईमेल अकाउंट के विंडो को सीधे बंद करके की जगह साइन आउट करके बंद करें।
क्या कहता है कानून?
पहले हैकिंग को छोटी-मोटी बात मानकर उसके बारे में ज्यादा जांच पड़ताल नहीं की जाती थी। लेकिन जैसे-जैसे अब हमारी जिंदगी में तकनीक का स्थान अहम होता जा रहा है, इसपर सरकारी शिंकाजा भी कसता जा रहा है। अब अमेरिका को ही ले लीजिए। वहां तो अब इसे काफी संजीदगी के साथ लिया जाता है। वहां एक हैकर केविन मेटनिक कुछ दिनों पहले एफबीआई के हत्थे चढ़ा था।
एफबीआई ने उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए, जिससे उसका जिंदगी भर के लिए कंप्यूटर छूना तक बंद हो सकता है। वैसे विशेषज्ञों की मानें तो हैकर कुछ लोगों को तंग करने के बजाए लाखों को तंग करने के लिए करते हैं। वैसे, अपने मुल्क में इंटरनेट हैकिंग को गुनाह माना जाता है, जिसके लिए हैकरों को सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। हिंदुस्तान में अब भी इसे लेकर ज्यादा संजीदगी नहीं है।
साइबर क्राइम सेल का गठन होने के बावजूद भारतीय पुलिस में अच्छी तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों की अच्छी खासी कमी है। इसलिए अगर आपके ईमेल को हैक करके कोई उसका गलत इस्तेमाल करता है, तो अदालत में कानून और पुलिस आपकी मदद नहीं कर सकते। यहां आपको यह साबित करना होगा कि आपके ईमेल अकाउंट को हैक किया गया था। इसलिए इतने मुसीबतों का सामना करने अच्छा है कि पहले से सुरक्षित रहा जाए।