Categories: लेख

अब नए अवतार में नजर आएगी टाटा इंडिगो

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 11:00 AM IST

जब आप पिंपरी में टाटा मोटर्स के पिंपरी वाले इंजीनियरिंग रिसर्च सेंटर (ईआरसी) में कदम रखेंगे तो आपको बमुश्किल ही खड़े होने के लिए जगह मिल पाएगी।


इस सेंटर में अलग-अलग चरणों में टेस्टिंग के लिए काफी सारी नैनो हैं, इसके अलावा टाटा की आने वाली एमपीवी के प्रोटोटाइप्स भी यहां पर हैं। ऐसा सुनने में आ रहा है कि टाटा ,’इंडिवा’ नाम से एमपीवी बाजार में लाने वाली है जो आकार में टोयोटा की ‘इनोवा’ से बड़ी होगी। इसके अलावा इस सेंटर में और भी कई प्रतिस्पर्द्धी कारों पर काम चल रहा है।

हो-हल्ले के  बावजूद टाटा, इंडिगो सीएस को बनाने में कामयाब रही। हालिया ‘प्रोडक्ट गैप’ के मामलों की जब भी चर्चा होगी तो इसका नाम जरूर लिया जाएगा। जब चार मीटर से छोटे आकार की कारों पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई थी, तब उम्मीद की जा रही थी कि इस कदम से छोटी कार बनाने वालों को फायदा होगा।

लेकिन टाटा ने चतुराई भरा कदम उठाते हुए कार के बूट के आकार को थोड़ा छोटा कर दिया और इस तरह नई इंडिगो सीएस का अवतार हुआ। इस नई छोटी और अलग दिखने वाली कार ने एक ओर जहां इंडिगो सीरिज के लिए नई राहें खोलने का काम किया है तो वहीं दूसरी ओर दूसरे कार निर्माताओं की पेशानी पर बल भी डाल दिए हैं।

उनको लगता है कि टाटा ने तो इस मौके को भुना लिया है और वे इस दौड़ में पीछे छूट गए हैं। इस तरह देखें तो टाटा ने एक और मामले में अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से बाजी मार ली। टाटा ने डिकॉर साल्वो को लॉन्च किया है। मुंबई में इसकी एक्स शोरूम कीमत 4.95 लाख रुपये है। इसकी वजह से मारुति सुजूकी की ‘स्विफ्ट एलडीआई’ और ‘फिएट पालियो मल्टीजेट’ के कई मॉडलों की बिक्री प्रभावित हो सकती है।

बस पुरानी और नई कार में फर्क केवल बूट का है। वैसे नई सीएस डिकॉर, सीएस पेट्रोल और टीडीआई मॉडल से बहुत ज्यादा जुदा नहीं है। और अब बूट पर इसका बैज भी आपकी आंखों को नहीं चुभेगा। अंदर की बात करें तो दो चीजें पहले जैसी ही हैं। आपको काला डैशबोर्ड, वही पुराना स्विचगियर और वैसी ही ड्राइविंग साइड ही मिलेगी। इसके साथ ही आपको अंदर काफी जगह भी मिलेगी। आप इस जगह का भरपूर इस्तेमाल कर गाड़ी में आराम से सफर कर सकते हैं। इस कार में अब आपको गाड़ी में जगह की कमी को लेकर शिकायत करने का मौका नहीं मिलेगा।

इसमें आखिर क्या बदलाव हुए हैं। इंडिगो के लिहाज से इंजन (अगर एक्सएल को भी मिला लें )भी नया  नहीं है। टाटा हमेशा से ही इंजन की जगह के हिसाब से इंजन लगाती आई हैं, इसलिए सीएस डिकॉर में भी इस बात का खयाल रखा गया है। लेकिन इस तथ्य से भी नहीं मुंह चुराया जा सकता कि यह उतना प्रभावी  इंजन नहीं है। इसमें कॉमन रेल हेड के साथ 1405 सीसी का कास्ट आयरन ब्लॉक वाला इंजन लगा है। चौंकाने वाली बात है कि इसमें ज्योमेट्री टर्बोजेटर भी लगा हुआ है।

डेल्फी जैसे पुर्जों से बने इस इंजन से 4000 आरपीएम पर 69 बीएचपी की पावर मिलती है जो टीडीआई मोटर से केवल एक बीएचपी ज्यादा है। इसमें 1800 आरपीएम से शुरू होकर अधिकतम 14.27 किलोग्राम तक का टॉर्क है। टीडीआई की तुलना में यह 0.5 किलोग्राम अधिक है। पता नहीं टाटा ने इस इंजन पर इतना भरोसा क्यों जताया जबकि टीडीआई और डिकॉर  दोनों ही यूरो 3 मानकों पर खरे उतरते हैं। अब ड्राइविंग की बात हो जाए। इसका टर्बोचार्ज डीजल शहर में ड्राइविंग के दौरान तेज रफ्तार नहीं पकड़ता।

शहर की तेज रफ्तार जिंदगी को देखते हुए यह परेशानी भरा लग सकता है। कई बार इस बात की जरुरत होती है कि गाड़ी भीड़ वाले इलाके में भी अपनी सही रफ्तार बनाए रखे। जहां तक डिकॉर की बात करें तो यह बहुत ही लचीला इंजन है। सामान्य रेल डाइरेक्ट इंजेक्शन, कम रफ्तार वाले टॉर्क में सुधार किया गया है, और परिवर्तनीय ज्योमेट्री टरबाइन ने टर्बो लैग को गुडबाय कह दिया है। इसको असल ड्राइविंग परिस्थितियों में भी टेस्ट किया जा सकता है और हमने टाटा के पिंपरी प्लांट से बाहर निकलकर ऐसा किया भी। पुणे से बाहर इसको ड्राइव करना शानदार रहा।

हाइवे पर आकर यह अपने असली रंग में आई और इसने अपनी असली ताकत से हमे रूबरू कराया। जब कार को पांचवे गियर में डाला तो हमने उसी तरह का अनुभव किया जो इससे पहले केवल महिंद्रा रेनो लोगान में किया था। अगर आप खिलंदड़ी पसंद इंसान हैं और आपको रोमांच बहुत पसंद है तो सीएस डिकॉर आपको निराश नहीं करेगी। कार जल्दी ही भाप पकड़ लेती है और इसमें तकाजे के हिसाब से ढलने की खूबी भी मौजूद है। 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार यह 16.7 सेकंड में पकड़ लेती है जो बहुत ज्यादा तेज तो नहीं है तो बहुत सुस्त भी नहीं है।

सीएस डिकॉर 1 सेकंड में अधिकतम 41 मीटर की दूरी तय कर सकती है, दूसरे शब्दों में कहें तो यह अधिक तम 148 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है। यह 80 से 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पकड़ने में 13.2 सेकंड लेती है जो स्विफ्ट डीजल से 2 सेकंड तेज है और फिएट पालियो मल्टीजेट की तुलना में 0.1 सेकंड अधिक है। इसके इंडिकेटर भी बढ़िया काम करते हैं जो हाइवे पर आराम से ओवरटेक करने में मदद करते हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर इस कार ने अपनी पूरी रफ्तार पकड़ ली। कार पर तेज हवा का असर बहुत कम हुआ और गाड़ी पूरी पकड़ में भी बनी रही।

बहुत कम ऐसा वक्त आया जब गाड़ी पर पकड़ थोड़ी कम पड़ी। जब यह कार पहाड़ी इलाके की सड़कों पर से गुजरी तब सीएस की क्षमता का अंदाजा हुआ। गाड़ी को घुमाने में कोई समस्या नहीं आ रही थी। गाड़ी का स्टीयरिंग भी बेहतर तरीके से काम करता है और इसका रैक भी काफी जबरदस्त है। हालांकि स्टीयरिंग व्हील के साथ अपना तालमेल बनाने में थोड़ा समय लेती है। फिर भी यह कहा जा सकता है कि आप जैसे चाहे वैसे इसे चला सकते हैं।

यह कार डीजल इंजन वाली है, फिर भी इसका अगला हिस्सा ज्यादा भारी नहीं दिखता है। वास्तव में आप इस कार को ड्राइव करते हुए बेहद आसानी से इसकी सारी सीमाओं को जान और समझ सकते हैं। इसकी वजह यह है कि यह कार अपनी बहुत सारी सीमाओं को जानने का आपको मौका भी देती है। इस कार में एक और कमी यह है कि इसके ब्रेक ज्यादा पावरफुल नहीं हैं। इसके पैडल में भी उतनी ज्यादा मजबूती नहीं दिखती है। जब आप 0 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चले तो आपको यह पता चलता है कि इसमें 25.9 सेकंड लग जाते हैं।

इसके अलावा इसके पहिए के  घूमते वक्त जो आवाज होती है उसमें भी 9 सेकंड लग जाते हैं। हम यह कह सकते हैं कि यह काफी खूबसूरत गाड़ी है लेकिन इसके ब्रेक उतने उम्दा नहीं हैं। इसका प्लास्टिक भी उतना बेहतर नहीं है और न ही ये बेहतर दिखता है। अगर आप सचमुच कार के बारे में यह ज्यादा नहीं सोचते कि इसका पिछला हिस्सा काफी असंतुलित सा दिखता है हालांकि इसकी बॉडी का पेंट लाल रंग का है जो इसकी सारी खामियों को छुपा लेता है।

अगर आप इसे अपने बजट के लिहाज से देखें तो आप पाएंगे कि आपको कम दाम में ही बढ़िया चीज मिल गई है। जहां तक इंडिगो सीएस की बात है वह भी महंगा साबित हो सकता है। खासतौर पर इन दिनों जब महंगाई की दर तेजी से बढ़ रही है।

लोगों की पसंदीदा कार
इस यूरोपीय कार लोगान को भारत में  कामयाब बनाने के लिए कंपनी अपनी कोशिशों को अंजाम दे रही है।

डेसिया लोगान ने हाल ही में अपना पहला मेकओवर किया। इस नए मेकओवर के जरिए कार की खामियों को दूर करके अपग्रेड करने की कोशिश की गई है। ऐसा नहीं है कि कार को वैसा ही बाजार में उतारा गया है जैसे कि यह कार थी। इस कार को बहुत हद तक बदनले की कोशिश की गई है। कार का कुछ बुनियादी ढांचा समान ही है लेकिन कार की लंबाई 40 एमएम बढ़ गई।

कार का सामने वाला हिस्सा ज्यादा फोकस्ड  है लेकिन जिस चीज पर बरबस ध्यान चला जाता है वह है कार की लाइंस जो पुरानी कारों की तरह ही एक बेहतर रूप है। इस कार में जो चीज बदली हुई नजर आती है वह है इसके सामने वाले हिस्से और पिछले हिस्से में लगी हुई नए तरह की लाइट का इंतजाम। यह बदलाव केवल प्लास्टिक तक ही सीमित नहीं है। रेनो की कार में एयर डैम को काफी जांचा परखा है और इसके बंपर और बोनेट को भी काफी बेहतर बनाया गया है और इसमें क्रोम स्ट्रिप भी लगी हुई है।

यूरोप में इस कार में डेसिया लोगो भी लगा होगा जो पहली बार सांडेरो में लगी थी। सांडेरो लोगान की ही बेहतर गाड़ी है। इस गाड़ी का पिछला गेट काफी फ्लैट है। इसका बंपर भी काफी नया और बेहतर है जो गाड़ी के  लिए अच्छा माना जाएगा। इस कार के अंदरूनी हिस्से की बात करें तो पाएंगे कि लोगान को अपमार्केट बनाने पर ज्यादा जोर दिया गया है। इसीलिए सांडेरो के नए लुक वाली गाड़ी ने बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है वह भी नए डोर पैनल के साथ।

यूरोप में इस कार के लिए भी काफी बदलाव लाए गए हैं। इस कार की सीट भी नई है और अंदर के हिस्से की डिजाइनिंग भी बेहतर ढंग से की गई है। अगर यूरोप की बात करें तो निश्चित तौर पर लोगान का लक्ष्य यूरो एनसीएपी कै श रेटिंग पाने का होगा यानी पुरानी कारों के लिए थ्री स्टार। बॉश के एबीएस की नई कार में इबीडी भी है और उसमें इंमरजेंसी ब्रेकिंग अस्सिटेंस का इंतजाम भी है। अगर इस कार में सेफ्टी कॉलम की बात करें तो पाएंगे कि इसका आगे का हिस्सा 7 एमएम काफी चौड़ा है और इसके पिछले हिस्से का ट्रैक रोड पर संतुलन बनाए रखने के लिए बेहतर है।

कार के  डैशबोर्ड का हिस्सा भी कुछ ऐसा बना हुआ है कि उसके जरिए भी कार में बैठने वाले लोगों के लिए र्कोई परेशानी नहीं होती बल्कि यह गाड़ी के अंदर बैठने वालों को किसी दुर्घटना की स्थिति में आने पर घायल होने से बचाता है। इसका इंजन भी बिल्कुल सुरक्षित होता है। कुछ ऐसा ही इंतजाम हमारे देश में आने वाली कार के लिए भी होना चाहिए।

महिन्द्रा-रेनो के लोगान ने अपनी उम्मीद के मुताबिक ही दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। अपमार्केट में यह महसूस किया जा रहा है कि कार के इस तरह अपग्रेडिंग की बेहद जरूरत थी। इसी वजह से हम ऐसा सोचते हैं कि लोगान भारतीय बाजार में 2009 की शुरूआत से ही अपनी बेहतर मौजूदगी दर्ज कराएगा। उम्मीद है कि कीमतें लगभग समान ही रहेंगी।

First Published : July 13, 2008 | 11:41 PM IST