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मुश्किल मुकाबले में मैदान मारने को तैयार टीसीएस

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 4:41 PM IST

रामादुरई की खुशी का इस वक्त कोई ठिकाना नहीं होगा।


वह देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ के सीईओ हैं जिसने पिछले वित्तीय वर्ष में तकरीबन 40 अरब रुपये (1 बिलियन डॉलर)का मुनाफा कमाया था और 2008-09 में उसका राजस्व लगभग 280 अरब रुपये (7 बिलियन डॉलर)को पार कर गया है।

इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि यही देश की सबसे बड़ी  सूचना प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाता कंपनी है। नैसकॉम के सॉफ्टवेयर निर्यात के लक्ष्य का लगभग 15 फीसदी में तो इसी कंपनी का योगदान है। लेकिन कंपनी की निगाहें इससे भी बड़े लक्ष्य पर लगी हुई हैं।

रामादुरई इस साल देश की सीमाओं से परे जाकर कारोबार बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं साथ ही वे नैसकॉम के लक्ष्य से आगे निशाना साधना चाहते हैं। वह अच्छी तरह जानते हैं कि भारत की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर और आगे बढ़ने के लिए लंबा रास्ता तय करना है क्योंकि वैश्विक स्तर पर आउससोर्सिंग में आईबीएम (सालाना राजस्व 100 अरब  डॉलर), एक्सेंचर (सालाना 25 अरब डॉलर) और ह्यूलिट पैकर्ड (सालाना राजस्व 100 अरब डॉलर)जैसी कंपनियों का ही दबदबा है।

एचपी ने हाल ही में ईडीएस का अधिग्रहण भी किया है। एक विश्लेषक का कहना है कि जो कंपनियां अभी तक मेट्रो शहरों तक ही सीमित रही हैं, उनको अपना दायरा बढ़ाकर बढ़िया डिलिवरी सिस्टम तैयार करने के लिए अलग-अलग तरह की सेवाएं भी मुहैया करानी चाहिएं। साथ ही इन कंपनियों को यह भी ध्यान देना होगा कि कम लागत में सेवा मुहैया कराने वाले फिलीपींस, चीन और वियतनाम जैसे बाजारों से भी मुकाबले में उन्नीस न पड़ जाएं।

टीसीएस के सीईओ और प्रबंध निदेशक एस रामादुरई कहते हैं, ‘हम अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए नये बाजारों का रुख कर रहे हैं जिसके लिए हमने काफी निवेश किया है। हम नई तरह की सेवाओं को देने के लिए वैश्विक स्तर पर डिलिवरी सेंटर बनाने पर जोर दे रहे हैं। उभरते हुए बाजारों से मिल रहे राजस्व में जो औसतन बढ़ोतरी हो रही है वह हमारी कंपनी की वृद्धि में भी सहायक सिद्ध हो रही है।’

कंपनी के राजस्व में ब्रिटेन की हिस्सेदारी 1 अरब डॉलर की है वहीं यूरोप से कंपनी को 50 करोड़ डॉलर का राजस्व मिलता है तो इसके राजस्व में 50 फीसदी हिस्सा अमेरिकी बाजार का है। इसके अलावा लैटिन अमेरिका, भारत, पश्चिम एशिया  और अफ्रीका की से 1 अरब डॉलर का राजस्व कंपनी की झोली में जाता है जो कंपनी के कुल राजस्व का 20 फीसदी बैठता है।

टीसीएस, सूचना प्रौद्योगिकी की एकमात्र ऐसी भारतीय कंपनी है जिसके पास एक लाख से भी अधिक कर्मचारी हैं। रामादुरई कहते हैं, ‘ हमारी कंपनी लगातार बढ़ने पर है और हमारे पास एक लाख से भी ज्यादा कर्मचारी हैं, हमें एक बढ़िया ढांचा बनाने की जरूरत है जिससे हम अवसरों को बढ़िया तरीके से भुना सकें।’

कंपनी ने हाल ही में एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है जिसमें 5 समूह और 20 अर्ध स्वायत्त इकाइयां हैं और यह मॉडल इसी साल 1 अप्रैल से लागू भी हो चुका है। इस बाबत कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी एन चंद्रशेखरन कहते हैं कि इससे कंपनी के ग्लोबल ऑपरेशंस को एकीकृत किया गया है, ग्राहक-केंद्रित इकाइयों का पूरा जोर ग्राहकों की सहूलियत पर है।

उनके मुताबिक इससे परिचालन में और दक्षता आएगी और अवसरों को आसानी से भुनाया जा सकेगा। नये मॉडल में ग्राहकों के साथ संबंध को बहुत गंभीरता के साथ लिया जा रहा है। यह ढांचा हर स्तर पर नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा दे रहा है ताकि नये लोगों में से कुछ अच्छे नेतृत्वकर्ता तैयार किए जा सकें। इन पांच समूहों में इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस ग्रुप (आईएसजी) भी शामिल है।

बीएफएसआई (बैंकिंग, फाइनैंशियल सर्विस और इंश्योरेंस) सेगमेंट सबसे बड़ा रहा है जिसमें 35,000 हजार से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, इसको चार इकाइयों में बांट दिया गया है। बड़े मार्केट ग्रुप यूके, अमेरिका और यूरोप का काम देखेंगे तो नये ग्रोथ मार्केट ग्रुप भारत, एशिया प्रशांत और उभरते हुए बाजारों पर नजर रखेंगे। नये ग्राहक तैयार करने की जिम्मेदारी भी इसी इकाई की रहेगी।

इसके अलावा ब्रांड बिल्डिंग, ग्राहकों के साथ रिश्तों को बरकरार रखने की का काम भी इसी इकाई के जिम्मे होगा। आईएसजी इकाई देश के बाहर मौजूदा और नये ग्राहकों का खयाल रखेगी। हरेक ग्रुप का दायरा 25 करोड़ से 50 करोड़ डॉलर के कारोबार का है और इनमें से प्रत्येक में कम से कम 5,000 कर्मचारी काम में लगे हैं।

अपने मुनाफे और नुकसान के लिए यही ग्रुप जिम्मेदार हैं साथ ही मानव संसाधन और बाजार रणनीति का काम भी इन्हीं ग्रुपों के पास है। ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप से बड़े ऑर्डर लेने का काम भी आईएसजी ही करेगी। दो अन्य ग्रुप स्ट्रेटिजिक इनिशिएटिव ग्रुप (एसएमई और बीपीओ फर्म्स के लिए) और ऑर्गेनाइजेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर ग्रुप हैं।

ग्लोबल ह्यूमन रिसोर्सेज के प्रमुख अजय मुखर्जी बताते हैं कि हरेक इकाई में एक प्रमुख के साथ 200 से 250 कर्मचारी काम कर रहे हैं। मानव संसाधन (एचआर) विभाग बहुत बढ़िया ढंग से काम कर रहा है और पूरा प्रोसेस डिजिटलाइज कर दिया गया है। मुखर्जी कहते हैं कि  एचआर विभाग कर्मचारियों के ट्रैवल, होटल और रिइंबर्समेंट के दावों का सही तरीके से निपटारा कर रहा है।

उदाहरण के तौर पर एचआर से जुड़े सवाल कॉमन हेल्प डेस्क द्वारा सुलझाए जाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगले दो तीन साल कर्मचारियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं। वैसे अभी तक भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में टीसीएस का जलवा बदस्तूर कायम है लेकिन इन्फोसिस टेक्नोलोजीज भी धीरे-धीरे इसके करीब आती जा रही है।

टीसीएस कई नॉन लीनियर चीजों में संभावनाएं तलाश रही हैं। जिसमें सॉफ्टवेयर उत्पाद, प्लेटफॉर्म बीपीओ, सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (एसएएएस) जैसी चीजें शामिल हैं। साथ ही टीसीएस, इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट सर्विसेज में यूनिट प्राइसिंग और ट्रांजेक्शन बीपीओ में भी रुचि दिखा रही है।

मैक्वायर के विश्लेषकों का कहना है कि टीसीएस के आईएमएस का राजस्व और भारतीय बीपीओ के राजस्व का 10 फीसदी यूनिट प्राइस्ड के जरिये ही आता है। टीसीएस के पास वैसे तो कई उत्पाद हैं खासकर बीएफएसआई क्षेत्र में। बैंकिंग उत्पादों में इसने बहुत बढ़िया काम किया है तभी तो इसने ऑस्ट्रेलिया की फाइनैंशियल नेटवर्क सॉल्यूशंस का अधिगृहण करने में कामयाबी भी हासिल की है।

कंपनी ने हाल ही में नई बिजनेस इकाई (टीसीएस फाइनैंशियल सॉल्यूशंस) गठित की है। समस्त राजस्व में इसकी हिस्सेदारी तकरीबन 3.6 फीसदी है। अपने क्षेत्र में टीसीएस ही एकमात्र ऐसी कंपनी है जो अपने खुद के बीपीओ प्लेटफॉर्म को बनाने के लिए निवेश कर रही है और इसी कंपनी ने सबसे ज्यादा घोषणाएं भी की हैं। इनमें ब्रिटेन के पर्ल समूह के साथ मिलकर काम करने की घोषणा भी शामिल है।

साथ ही टीसीएस, अपने समूह की कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड (टीटीएसएल) को भी सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं मुहैया कराएगी। टीसीएस, टीटीएसएल की साफ्टवेयर और हार्डवेयर संबंधी जरूरतों को पूरा करेगी। कंपनी अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट सेवाओं (आईएमएस) के लिए जानी जाती है। इसी क्षेत्र की सत्यम और एचसीएल टेक्ोलोजीज जैसी कंपनियों की तुलना में टीसीएस इस क्षेत्र में अधिक कमाई करती है।

भारत में आउटसोर्सिंग का घरेलू बाजार 2.2 अरब डॉलर का है। इस क्षेत्र में भी कड़ी प्रतिस्पर्धा है। सीनियर एनालिस्ट सुदीन आप्टे कहते हैं, ‘मुनाफे के दवाब ने बड़ी कंपनियों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।’ विप्रो और एचसीएल भी हार्डवेयर बाजार की प्रमुख खिलाड़ी हैं। वैसे टीसीएस, आईबीएम और एचपी को एंड-टू-एंड (सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, सिस्टम इंटीग्रेशन जैसी) जैसी सेवाओं के लिए साथ मिलकर काम कर रही हैं।

रामादोराई के पास कंपनी को फलक पर पहुंचाने के लिए बहुत सारी योजनाएं हैं और वह उन काम भी कर रहे हैं। और कंपनी का दायरा बढ़ाने के लिए वह आउटसोर्सिंग के दिग्गजों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने को भी तैयार दिख रहे हैं।

First Published : August 11, 2008 | 10:48 PM IST