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भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों की बदलती तस्वीर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 5:41 AM IST

लंदन में मेरे 10 दिन के प्रवास के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों की जटिलता और उलझनें साफ हुईं।


पिछले सप्ताह भारत, ब्रिटेन के समाचार पत्रों में छाया था। रस्तोगी बंधुओं का हवाला केस, उसकी सुनवाई और उन्हें 9 वर्ष का कारावास इसका प्रमुख कारण था। ब्रिटेन में अब इस तरह के प्रकरणों में भारतीय मूल के नागरिकों की भूमिका की तहकीकात शुरू हो गई है।

उधर अन्य तथ्य भी सामने आए। भारतीय मूल के नागरिकों का मोहल्ला साउथ हॉल अब कितना बदल गया है और ब्रिटेन में भारतीय अब कितनी इज्जत पाते हैं, यह भी देखने लायक था। और फिर जिस तरह भारत, साम्राज्यवादी शक्तियों पर जीत पाकर एक नए देश के रूप में सामने आया है, उसी तरह ब्रिटेन ने कैसे अपने इतिहास में मूल्यों और संस्कारों के लिए युध्द लडे अौर कैसे विजयी हुआ, यह भी वहां के गली मोहल्लों की दीवारों पर लिखा हुआ है।

पहले रस्तोगी बंधुओं की गौरव गाथा। दो साल से चल रही कानूनी सुनवाई के बाद उन्हें सजा सुनाई गई। तीन या चार भाई हैं रस्तोगी बंधु। और उनका साम्राज्य ब्रिटेन में स्थित है, लेकिन पूरी दुनिया में फैला है। हवाला कैसे किया? बैंक से व्यापार के लिए पैसा उधार लेना है तो आप बैंक को इनवॉइस दिखाएंगे, यह जताने के लिए कि आपके पास ऋण के लिए आधार है और आप उधार चुकाने की स्थिति में हैं।

फिर आप उधार ली गई राशि को व्यापार में लगाकर अपना कर्ज चुकाने की कोशिश करेंगे। लेकिन रस्तोगी बंधुओं ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने इनवॉइस तो दिखाए और बैंक से उधार भी लिया। कुछ बैंकों का पैसा वापस भी कर दिया। इससे इनकी साख बढ़ी। लेकिन कुछ बैंकों का पैसा वापस नहीं दिया। उसे व्यापार के जटिल जाल में उलझाकर आगे किसी और कंपनी में लगा दिया और खुद चंपत हो गए। इस तरह से उन्होंने 30 करोड़ डॉलर कमाए।

शायद ज्यादा भी, क्योंकि घोटाले में कितना पैसा अटका हुआ है, इसका अनुमान किसी को नहीं है। बहरहाल बैंक को शक तब हुआ जब एक ही फैक्स नंबर से तीन भिन्न कंपनियों के इनवॉइस उन्हें प्राप्त हुए। यह एक छोटी सी गलती रस्तोगी बंधुओं के किसी नौकर से हांगकांग में हो गई। बैंक के अधिकारियों का माथा ठनका। तीन कंपनियां और एक ही फैक्स नंबर। उन्होंने उधार देने से इनकार तो नहीं किया लेकिन पूछताछ जरूर की।

उन्होंने पाया कि इन भाइयों की कुछ कंपनियों को ऋण तो दिए गए थे, लेकिन ये कंपनियां थीं ही नहीं। जब तहकीकात की तो पता चला कि एक कंपनी का पता तो सही था, लेकिन वहां कंपनी नहीं, गौशाला थी जहां भैंस और गाय बंधी हुई मिलीं। सुनवाई के दौरान जब यह सब बाहर आया तो जिन बैंकों को इन महानुभावों ने झांसा दिया था, उन्होंने इनकी संपत्ति से अपना हिस्सा वापस चाहा। लेकिन यह पैसा तो कब का जा चुका था।

जेल की सजा हुई है 9 साल की, लेकिन पैसा कहां है यह इन बंधुओं के अलावा किसी को नहीं मालूम। 30 करोड़ गया तो क्या हुआ, बाकी तो है। रस्तोगी बंधु जैसे कई ठग ब्रिटेन में घूम रहे होंगे। वहां के पारदर्शी नियमों की आड़ में। भारत का लाखों-करोड़ों रुपया ब्रिटेन में है- कानूनी और गैर कानूनी, दोनों। अभी पिछले सप्ताह बब्बर खालसा ने अपना एक जुलूस निकाला।

भारत के दूतावास के पास- ऑपरेशन ब्लू स्टार की याद में। खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि पंजाब में खालिस्तान मोर्चे द्वारा नई घटनाएं लंदन में बनी योजना का एक हिस्सा है। लेकिन पता कैसे लगे? लेकिन ब्रिटेन में रह रहे प्रवासी भारतीयों का प्रतिनिधित्व केवल इस श्रेणी के  लोग नहीं कर रहे हैं।

जब शाहरुख खान की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ का प्रीमियर लंदन में हुआ तो यह उसी हॉल में हुआ जहां रविशंकर और एमएस सुब्बालक्ष्मी जैसे दिग्गजों ने रसिक ब्रिटेनवासियों का दिल जीत लिया था। लेकिन अब रसिक दूसरी तरह के हैं। भारतीय मूल के युवा ब्रिटिश नागरिक, जो समृध्द हैं और वे ब्रिटेन की कंपनियां खरीदकर मुनाफा कमाने की सामर्थ्य रखते हैं।

भारतीयता, ब्रिटेन के पोर-पोर में बसी है। नाक पर मक्खी न बैठने देने वाले ब्रिटिश लोग अब भारतीय संस्कारों- पारिवारिक मूल्य और संस्कारों के गुणों का बखान करते नहीं थकते। भारतीय लोगों ने भी ब्रिटिश तौर-तरीके समझकर अपने आप को ढालने का काम किया है। भारतीय मूल के हिंदू और मुसलमान दोनों ही अपने धर्म को राज्य से ऊपर नहीं मानते हैं।

शायद यही कारण है कि लंदन में बम फटने की जितनी घटनाएं हुई हैं, उनमें सिर्फ एक भारतीय पर संदेह था- सबील अहमद जो बरी हो गया। क्योंकि उसका ई-मेल तब भेजा गया था जब बम फट चुका था। इन्हीं ई-मेलों के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया था। एक जमाने में ब्रिटेन, पूरी दुनिया पर राज करता था। विक्टोरिया को विश्व की साम्राज्ञी माना जाता था।

हमारे देश से ब्रिटेन ने बहुत कुछ सीखा, लेकिन उनसे हमें भी कुछ सीखना चाहिए- इतिहास के प्रति आदर। आज ब्रिटिश राज्य जो कुछ भी है, कुछ मूल्यों पर ही टिका है। यह मूल्य उनके दोस्तों पर उतने ही लागू होते हैं, जितना उनके दुश्मनों पर। हाल में जब प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने सुझाव दिया कि कट्टरपंथियों को हिरासत में रखने और कोतवाली में लाने की समय सीमा बढ़ा दी जाए तो अखबारों ने इसका इसका जबरदस्त विरोध किया।

बम विस्फोटों ने शहर को हिला दिया लेकिन प्रतिक्रिया यही थी कि लोगों को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में तब तक नहीं रखा जा सकता, जब तक उनके खिलाफ सबूत न हों। भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों पर किताबें लिखी गई हैं, कविताएं गढ़ी गई हैं, फिल्में बनाई गई हैं। हमारे और उस द्वीप समूह के बीच खून का रिश्ता है, इतिहास और भावना का रिश्ता है, और अब दो परिपक्व राज्यों के बीच का रिश्ता है। भारत, ब्रिटेन के अभिन्न मित्रों में से एक है, हम मानें या न मानें।

First Published : June 13, 2008 | 10:38 PM IST