छूट या डिस्काउंट की बात करते ही किसी रिटेल स्टोर या आउटलेट का ध्यान आता है पर अगर कहें कि इन दिनों शिक्षण संस्थान भी रिटेल स्टोर का रूप अख्तियार करने लगे हैं तो यह गलत नहीं होगा।
शिक्षा जगत भी छात्रों और अभिभावकों को रिझाने के लिए कारोबारी जगत से छूट और अन्य ऑफर देने का गुर सीख रहा है। कॉरपोरेट मंत्र को अपनाते हुए अब कुछ शिक्षण संस्थान दाखिले में छूट दे रहे हैं तो कुछ नकद इनाम तक की बौछार कर रहे हैं, वहीं कुछ शिक्षण संस्थान दाखिला के साथ ही कई तरह के तोहफे भी बांट रहे हैं।
इनका मकसद बस एक ही है कि ज्यादा से ज्यादा छात्रों को अपने संस्थानों में दाखिला दिलाया जा सके। प्रिपेरेटरी कक्षाएं चलाने वाली किडजी अपनी विभिन्न शाखाओं में दाखिले पर छूट दे रही है। किडजी की वसुंधरा (गाजियाबाद) शाखा में इन दिनों छात्रों को दाखिले की फीस पर 50 फीसदी तक की छूट दी जा रही है।
स्कूल की प्रधानाचार्य नीतू ने बताया कि आम दिनों में हर बच्चे के दाखिले पर 14,000 रुपये जमा कराए जाते हैं जिसमें एकमुश्त वार्षिक शुल्क भी शामिल है। पर इन दिनों छात्रों को दाखिले की फीस में 4,500 रुपये तक की छूट दी जा रही है। इतना ही नहीं शिक्षण संस्थानों ने कारोबारियों को पीछे छोड़ते हुए अब नकद इनाम का ऑफर भी अभिभावकों के सामने रखा है।
वसुंधरा शाखा में जिन छात्रों ने अगस्त महीने के दौरान दाखिला लिया है उन्हें लॉटरी के जरिए पुरस्कार बांटे जा रहे हैं। पुरस्कार की राशि भी तय कर दी गई है। पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले छात्रों को क्रमश: 5000, 3000 और 2000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। वसुंधरा के अलावा किडजी की कुछ और शाखाएं जो फ्रैंचाइजी के जरिए चलाई जाती हैं उनमें भी कुछ छूट दी जा रही है।
दूसरी ओर देश में प्रिपेरेटरी स्कूलों की ही श्रृंखला चलाने वाले शेमरॉक समूह की ओर से भी कुछ ऐसा ही ऑफर दिया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक छात्र उनके संस्थान में दाखिला ले सकें। समूह अपने विभिन्न शाखाओं में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए ‘स्पिन, प्ले और विन’ कार्यक्रम चला रहा है।
दाखिला लेते समय हर छात्र इस खेल के जरिए 200 से 1,000 रुपये के बीच कोई रकम कमाता है। इस राशि को एक मनी बैंक में डालकर बच्चे को दी जाती है। शेमरॉक समूह के प्रबंध निदेशक अमोल अरोड़ा से जब यह पूछा गया कि शिक्षण संस्थानों में छूट का ट्रेंड कितना सही है तो उन्होंने खुद माना कि शिक्षा जगत में ऐसे प्रलोभनों का कुछ खास असर नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि दाखिला लेने वाले छात्रों को यह पैसे इसलिए दिए जाते हैं ताकि उनमें शुरुआत से ही बचत की आदत डाली जा सके। पर शायद बाजार की तर्ज पर ही शिक्षा जगत में भी ऐसी प्रतियोगिता है कि एक दूसरे की देखादेखी ऑफरों की होड़ सी मची है।
विभिन्न स्कूलों में अधिक से अधिक छात्रों को दाखिल करने के लिए जो नई होड़ मची हुई है और उसके लिए जो रास्ते अपनाए जा रहे हैं उसे खुद शिक्षा जगत भी सही नहीं मानता। शिक्षा जगत के कुछ जानकारों ने कहा कि अगर आप दाखिले में छूट या फिर नकद इनाम की घोषणा कर रहे हैं तो भले ही आप प्रत्यक्ष रूप से उत्पाद नहीं बेच रहे हों, पर आपने अभिभावकों को रिझाने के लिए एक तरह से दुकान तो खोल ही ली है।
उनका मानना है कि भले ही शिक्षण संस्थान इस तरह की प्रमोशनल गतिविधियां चला रहे हैं पर आखिरकार अभिभावक अपने बच्चों को दाखिला दिलाने के पहले इस बात की जांच पड़ताल करते हैं कि संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियां कितनी बेहतर हैं।
क्षेत्र से जुड़े लोगों ने कहा कि भले ही इस तरह के ऑफर एकबारगी अभिभावकों को किसी शिक्षण संस्थान की ओर खींचने में सफल हो जाएं पर बच्चे के दाखिले के समय किसी छूट या तोहफे की जगह पर उस संस्थान की शिक्षा व्यवस्था कैसी है इस पर अधिक ध्यान दिया जाता है।