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सितंबर में श्रम बाजार में स्थिति हुई बेहतर

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:02 PM IST

भारत के श्रम बाजार की स्थिति में सितंबर 2022 में व्यापक रूप से सुधार हुआ। बेरोजगारी की दर अगस्त की 8.3 फीसदी से गिरकर 6.4 फीसदी पर आ गई। यह भारत में बीते चार वर्षों यानी अगस्त 2018 के बाद से सबसे कम दर है। वैसे कई अन्य देशों में भी रोजगार पर दबाव कम हुआ है। लेकिन भारत में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।
भारत ने बेरोजगारी दर में गिरावट प्राप्त करने के साथ-साथ श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) में भी बढ़ोतरी हासिल की है। एलपीआर की दर में थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई। अगस्त में एलपीआर की दर 39.24 फीसदी थी जो सितंबर में बढ़कर 39.32 फीसदी हो गई। एलपीआर की बढ़ोतरी और बेरोजगारी दर में तेजी से गिरावट होने का सीधा सकारात्मक असर रोजगार दर पर पड़ा।
अगस्त 2022 में रोजगार की दर 35.99 फीसदी थी जो बढ़कर सितंबर 2022 में 36.79 फीसदी हो गई। रोजगार दर 15 साल या उससे अधिक आबादी के अनुपात में इसके रोजगार प्राप्त करने का अनुपात है। आर्थिक स्थिति को सबसे अच्छे तरीके से रोजगार दर दर्शाती है।
शहरों और गांवों के रोजगार बाजार की स्थितियों में सुधार हुआ है। लेकिन इसमें कहीं बड़ा योगदान ग्रामीण भारत ने दिया था। इससे श्रम की स्थिति में ही बदलाव आ गया। ग्रामीण श्रम सहभागिता दर में 0.29 फीसदी अंक की बढ़ोतरी हुई।
यह अगस्त में 40.39 फीसदी थी जो बढ़कर 40.68 फीसदी हो गई। महामारी के दौर अप्रैल 2020 के बाद पहली बार जून 2022 में गांवों की एलपीआर की दर 40 फीसदी से नीचे आई। इस दर में अप्रैल 2020 के बाद से हर महीने निरंतर सुधार आया। यह सितंबर के प्रदर्शन से भी उजागर हुआ है।
ग्रामीण श्रम सहभागिता दर में बढ़ोतरी का मतलब यह है कि ज्यादा लोग सक्रिय रूप से रोजगार तलाश  रहे हैं। इस दर का बढ़ना श्रम बल के बढ़ने का प्रतीक है। गांवों में श्रम बल बढ़ा। इसके बावजूद गांवों में सितंबर के दौरान बेरोजगारी दर में तेजी से गिरावट हुई। गांवों में जो श्रम बल बढ़ा था, उसके एक बहुत छोटा से हिस्से को कोई काम नहीं मिला।
बेरोजगारी की दर में 1.18 फीसदी अंकों की गिरावट आई। बेरोजगारी की दर अगस्त में 7.68 फीसदी थी जो सितंबर में गिरकर 5.84 फीसदी हो गई। इसका परिणाम यह हुआ कि गांवों में रोजगार की दर में 1.01 फीसदी अंकों की बढ़ोतरी हुई। गांवों में रोजगार की दर अगस्त के 37.29 फीसदी से बढ़कर 38.8 फीसदी हो गई।
इससे गांवों में सितंबर में 78.6 लाख नौकरियों का सृजन हुआ। गांवों में अगस्त में रोजगार 27.039 करोड़ से बढ़कर सितंबर में 27.825 करोड़ हो गया।
भारत के गांवों में रोजगार बढ़ने में कृषि ने योगदान नहीं दिया। इसके उलट सितंबर में कृषि क्षेत्र में दस लाख रोजगार की कटौती हो गई। गांवों में नौकरियों का सृजन निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र से हुआ। भारत के गांवों में निर्माण क्षेत्र में 70 लाख और विनिर्माण उद्योग में 50 लाख से अधिक अतिरिक्त नौकरियों का  सृजन हुआ।
इसमें खनन और यूटिलिटी क्षेत्रों ने भी योगदान दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के गांवों के औद्योगिक क्षेत्र में 1.3 करोड़ अतिरिक्त नौकरियों का सृजन हुआ। उद्योग क्षेत्र में ग्रामीण रोजगार 7.6 करोड़ को पार कर गया। यह कोविड के बाद सबसे अधिक ग्रामीण औद्योगिक रोजगार स्तर है। कोविड से पहले जनवरी 2020 में ग्रामीण औद्योगिक स्तर 7.9 करोड़ था।
गांवों के उद्योगों में रोजगार की दर में एकदम से बढ़ोतरी नहीं हुई है बल्कि यह दर निरंतर बढ़ती रही है। यह बढ़ोतरी का सिलसिला निरंतर रूप से कम से कम मार्च 2022 के बाद से जारी है। दरअसल सैम्पल हर चार महीने के बाद लिया जाता है। यह उसका भी प्रभाव है। अक्टूबर के अंत में गांवों के रोजगार में थोड़ी गिरावट आ सकती है। लेकिन गांव के रोजगार बढ़ोतरी के दायरे में रहने की उम्मीद है।
भारत के गांवों में सेवा क्षेत्र में सितंबर के दौरान अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई। गांवों के खुदरा कारोबार के क्षेत्र में 50 लाख अतिरिक्त नौकरियों का सृजन हुआ लेकिन व्यक्तिगत गैर-पेशेवर सेवाओं में 60 लाख नौकरियों की कटौती हुई और पर्यटन व यात्रा सेवा क्षेत्र में नौकरियों में 34 लाख नौकरियों की कटौती हुई। गांवों के गैर-पेशेवर सेवाओं में अनौपचारिक रूप से काम करने वाले श्रमिकों ने बेहतर नौकरी के लिए खुदरा कारोबार क्षेत्र की ओर रुख किया।  
हमारा मानना है कि गांवों में बेहतर वेतन वाली नौकरियों के कारण लोगों ने अपने रोजगार में बदलाव किया। इनमें से कई लोगों ने विनिर्माण, खनन क्षेत्र और यूटिलिटी क्षेत्रों की ओर रुख किया लेकिन कुछ रिटेल क्षेत्र में भी आए। इसका अर्थ यह है कि भारत के गांवों में न केवल रोजगार में बढ़ोतरी हुई बल्कि दूर दराज के इन क्षेत्रों में रोजगार की गुणवत्ता भी बढ़ी।  
सितंबर में सेवा क्षेत्र में शुद्ध आधार पर 40 लाख नौकरियां कम हुईं। इसका प्रमुख कारण गैर-पेशेवर सेवाओं में गिरावट होना था। हालांकि इस अवधि में शहरी रोजगार के सेवा क्षेत्र में करीब 30 लाख नौकरियों की बढ़ोतरी हुई। कस्बों में यात्रा व पर्यटन और शिक्षा क्षेत्रों में रोजगार में बढ़ोतरी हुई । हालांकि शहरी उद्योगों में 5.6 लाख नौकरियों की कटौती हुई।
जैसा कि पहले बता चुके हैं कि सितंबर में नौकरियां तेजी से बढ़ीं। भारत के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर में 1.87 फीसदी अंकों की गिरावट दर्ज हुई। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर अगस्त में 9.57 फीसदी से गिरकर सितंबर 2022 को 7.7 फीसदी पर आ गई। 
हालांकि ग्रामीण भारत की तुलना में शहरी भारत में श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) में 0.31 फीसदी अंकों की गिरावट आई जो 36.99 फीसदी से गिरकर 36.68 फीसदी पर आ गई। सितंबर में कम लोग रोजगार ढूंढ़ रहे थे। इससे बरोजगारी की दर की गिरावट में मदद मिली।
हालांकि बेरोजगारी की दर में गिरावट इतनी बढ़ी थी कि इसके लिए श्रम भागीदारी दर को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया नहीं जा सकता। अक्टूबर में शहरी रोजगार की दर में 0.41 फीसदी अंकों की बढ़ोतरी हुई, यह अगस्त के 33.45 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 33.86 फीसदी हो गई।
सितंबर में भारत में श्रम की दशाओं में सुधार होने पर सही मायने में खुशी मनाई जानी चाहिए। यहां पर यह भी महत्त्वपूर्ण है कि अप्रैल व मई, 2022 में दर्ज रोजगार की दर 37.1 फीसदी या 2019-20 के 39.5 फीसदी से कम 36.79 फीसदी है। इससे पहले रोजगार की दर 40 फीसदी से अधिक थी। लिहाजा इस क्षेत्र में भारत को बहुत लंबा रास्ता तय करना है।
(लेखक सीएमआईई प्रा लि के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी हैं)

First Published : October 6, 2022 | 10:46 PM IST