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हम हैं नये तो अंदाज क्यूं हो पुराना?

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 2:43 PM IST

दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो बने बनाए रास्ते के बजाए अपने लिए एक अनोखा रास्ता बनाते हैं। ऐसे लोग लीक से हटकर चलने वाले लोग कहे जाते हैं, जो अपने विचारों के मुताबिक सपने को पूरा करने में यकीन रखते हैं।


आनंद प्रकाश
हैंडमेड पेपर से बने डिजाइनदार सामान के जरिए बने सफल कारोबारी

आनंद प्रकाश ने आठ साल पहले दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र विषय में स्नातक किया था लेकिन आज वह बड़े सफल कारोबारी है। इस साल उनका कारोबार 75 लाख रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। वह अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं, ‘मेरे पहले सैंपल कार्ड को जो केवल 100 रुपये का था उसे पूरी तरह से नापसंद कर दिया गया था।’

दिल्ली के एक व्यस्ततम इलाके शाहपुर जट में उनका दफ्तर है। प्रकाश पेशे से डिजाइनर और उद्यमी माने जा सकते हैं। हाल ही में उनको यंग इंडियन ब्रिटिश काउंसिल अवार्ड के लिए नामांकित किया गया है, ‘मेरी अगली कोशिश है कि मैं स्पाईस पेपर बनाऊं जो पिसे हुए दालचीन के साथ पेपर को मिला कर बनाया जाता है।

ग्रीटिंग कार्ड आज के दौर में भले ही पुराने पड़ चुके हैं लेकिन मेरे काम का पूरा जोर पेपर को ही लेकर होगा।’ हालांकि प्रकाश ने अपना काम ग्रीटिंग कार्ड से ही शुरू किया लेकिन बहुत जल्द ही उन्होंने और भी दूसरे पेपर प्रोडक्ट बनाने शुरू किए मसलन डिजाइन किए हुए पेपर बैग, जर्नल, रेसिपी बुक, स्कै्रपबुक्स और फोटो एलबम।

प्रकाश हंसते हुए कहते है, ‘ग्रीटिंग कार्ड तो मेरे लिए एक कैनवास की तरह है जहां मैं पूरे मन से अपनी रचनात्मकता को जाहिर करता हूं।’ बुटिक स्टोर जैसे फुल सर्किल, हैंडपेपर वर्ल्ड, टेंपल ट्री और आइदर ऑर स्टॉक और प्रकाश क्रिएशन अब अपने सामान को यूएस, यूरोप, यूके, सिंगापुर और स्पेन भी भेजते हैं। उनका दावा है कि उन्हें अपने काम के लिए पहले ही 100 फीसदी एडवांस मिल जाता है।

प्रकाश का ग्रीटिंग कार्ड बिजनेस झारखंड के लोगों का भी सहारा बन गया है। उनका कहना है, ‘झारखंड का डाल्टनगंज देश का सबसे गरीब इलाका है। हालांकि यह क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछड़ा है लेकिन प्राकृतिक संपदा के लिहाज से काफी संपन्न है।’ वे इस साल 30 लोगों को ट्रेनिंग देने वाले हैं जो उनके लिए काम करें। इसके साथ ही वे झारखंड के प्राकृतिक संपदा का इस्तेमाल भी अपने काम में करना चाहते हैं। वे चुटकी लेते हुए कहते हैं कि उनके इस पेपर बिजनेस ने उनके परिवार के एल्यूमिनियम बिजनेस को बहुत नुकसान पहुंचाया है।

रुचि चोपड़ा
बेहद खूबसूरत दिखने वाली रुचि ने लोगों को हैरान करने वाला करियर चुना


रुचि चोपड़ा इतनी अच्छी दिखती हैं कि वह फिल्मों में भी काम कर सकती हैं। उन्हें इस सलाह पर हंसी आती है। वह केवल 24 साल की हैं और उन्होंने निफ्ट से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। उन्होंने कुछ साल कपड़े की एक कंपनी के लिए भी काम किया। लेकिन हसरतें तो कुछ और थीं कुछ अलग करने की। लोगों को हैरान करने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी बनाई हैं, ‘ऐनी सरप्राइज’, ‘ऐनी प्लेस’ और ‘एएसएपी’ जो अब काफी मशहूर हो रही है।

वह साबुन की टिकिया से लेकर ग्रीटिंग कार्ड, चादर, गलीचा, कैंडल होल्डर, गोल्फ के सामान, लैंप, बैलून, ट्रावेल किट्स, शराब की बोतलें और काफी टेबल बुक्स के जरिए अपना हुनर दिखाती हैं। बहुत पहले उन्होंने अपनी एक दोस्त को जिसे पिज्जा बहुत पसंद था उसे पिज्जा भेजकर हैरान किया था। इसी बात से उन्हें एक आइडिया मिला था और उन्होंने यह काम महज 50,000 रुपये की पूंजी से शुरू किया था और वेबसाइट थी- एएसएपी डॉट को डॉट इन। दो साल के अंदर ही उनका कारोबार 20 लाख रुपये का हो गया।

वह अपनी खूबसूरत मुस्कान बिखेरते हुए कहती हैं, ‘लोग पैसे खर्च करने के लिए तो तैयार हैं लेकिन उनके पास समय का अभाव है। ऐसे ही कामों के लिए एएसएपी मौजूद है।’ रुचि का कहना है कि उनका काम ऐसा है कि उन्हें अपने क्लाइंट के  लिए 24 घंटे मौजूद रहना पड़ता है। फिलहाल वे 670 ग्राहकों और 30 वेंडरों के लिए काम कर रही हैं। हालांकि यह युवाव्यवसायी अपनी 24 घंटे की व्यस्तता के बावजूद कोई शिकायत नहीं करती।

उनका कहना है, ‘मैं फिल्में देखती हूं और शापिंग भी करती हूं लेकिन मेरा दिमाग हमेशा नए डिजाइन और नए आइडिया के बारे में सोचता रहता है।’ उनके सबसे खर्चीले पैकेज जो लगभग 1.6 लाख रुपये का सरप्राइज पैकेज है उसमें एक जोड़े के लिए दो दिन महरौली के फार्महाउस में ठहरने का इंतजाम होता है। इसके अलावा बेहतर बाथ, स्टेशनरी, चादरें, ट्रैवल पैक, अच्छा खाना बनाने के लिए एक शेफ और गर्म हवा वाले बैलून पर सवारी करने का शौक भी पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा विशेष रूप से शाही गाड़ी, सिगरेट होल्डर और आपके लिए विशेष रूप से बना हुआ अखबार भी मौजूद होगा।

रुचि कहती हैं, ‘मेरी कोशिश ये होती है कि लोग खुद को खास समझें और इसी का अहसास दिलाने के लिए जरूरी है कि सारी चीजें उनके मनमुताबिक हों और मैं अपने काम में इसी विशेषता को कायम रखती हूं।’ उनके मुताबिक कॉरपोरेट हाउस और मल्टीनेशनल कंपनी भी उनके काम में खासी रुचि दिखा रही हैं।

वर्षा भावनानी
लोगों का मेकओवर करके अनोखा बदलाव लाने के लिए मशहूर हैं वर्षा

जिन लोगों ने कभी ऐसा कहा कि युवा लोग अपने युवापन के दौर में कुछ खास नहीं कर पाते और उनका यह वक्त यूं ही गुजर जाता है वे शायद 28 साल की वर्षा भावनानी को नहीं जानते होंगे जो इमेज और वार्डरोब कंसल्टेंट और गारमेंट एक्सपोर्टर हैं। वे लोगों को यह सलाह देती हैं कि क्या पहना जाए। उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत 6 ग्राहकों के साथ की थी जो अपने वार्डरोब और अपने इमेज को बेहतर बनाने के लिए सही सलाह चाहती थीं।

मुमकिन है कि वह इमेज मेकओवर शोज जैसे ओपरा या टायरा बैंक्स शो से प्रेरित हुई हों लेकिन उन्होंने इस काम को बेहद गंभीरता से लिया और लोगों को यह अहसास दिलाया कि उनका काम लोगों की अपनी छवि में बदलाव लाने के लिए किस तरह खास है। वर्षा कहती हैं, ‘इमेज कंसल्टेंट और स्टाइलिस्ट के तौर पर अपने क्लाइंट के लिए नए वार्डरोब के साथ ही हेयर स्टाइल और मेकअप के लिए भी सलाह देते हैं ताकि वे अपने इमेज को थोड़ा बदल सकें। इसके लिए ही मुझे पैसे मिलते हैं और लोग अपने इमेज को बेहतर बनाने के लिए ऐसा करते भी है।

अगर लोगों को अपने इमेज में ऐसे बदलाव की कोई ख्वाहिश ना होती तो शायद मैं आज यह काम इतनी सफलता से नहीं कर रही होती।’ लोगों के लुक को बेहतर बनाने के लिए उनकी टीम में हेयरस्टाइलिस्ट, डिजाइनर्स, मेकअप आर्टिस्ट, फिटनेस ट्रेनर्स और डेनटिस्ट भी हैं। वर्षा आईएसबी से ग्रेजुएट हैं। उनका एक स्टोर मुंबई में हैं और उन्हें उम्मीद है कि इस साल तक उनका एक स्टोर दिल्ली में भी खुल जाएगा और उसके बाद दुबई में भी स्टोर खोलने की उनकी तमन्ना है। इन स्टोर्स में वार्डरोब कंसल्टेंशन का काम किया जाता है।

वर्षा ने एक प्राइवेट इक्विटी फर्म की नौकरी छोड़ दी क्योंकि उन्हें लगता था कि वे किसी और के लिए काम नहीं कर सकतीं बल्कि उन्हें लगता था कि वे अपने काम के लिए खुद ही बॉस हों। उन्होंने बहुत कम पैसे से कपडे निर्यात करने का काम शुरू किया। उस वक्त उनके पास केवल 5 मशीन थी। आज उनके पास 100 मशीन हैं और 6 फ्रीलांस डिजाइनर्स भी हैं जो फै शनेबल कपड़े यूएस, स्पेन, रूस और डोमिनिक रिपब्लिक तक भेजने में उनकी मदद करते हैं। इस साल उनका कारोबार 6 करोड़ रुपये तक है और उम्मीदें अभी कायम है।

अविनाश भरवानी
परंपरागत कारोबार से अलग जूस बार के जरिए आजमाई किस्मत

जब किसी को कारोबारी समझ विरासत में मिली हो तब अपना खुद का दूसरा कारोबार शुरू करना आसान होता है? ऐसा सोचना सही नहीं है, 22 साल के अविनाश भरवानी एक हेल्थ जूस बार खोलना चाहते थे लेकिन इसके लिए उन्हें अपने पिता को समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वैसे उनके लिए अपने पुश्तैनी कारोबार को चलाना आसान राह साबित हो सकता था।

अविनाश बताते हैं कि उन्होंने परिवार के पहले से चल रहे कंप्यूटर हार्डवेयर, नेटवर्किंग के कारोबार से ही शुरूआत की थी लेकिन एक विदेशी यात्रा ने मेरी सोच को बदल दिया। वह बताते हैं कि उन्होंने पश्चिमी देशों में देखा कि वहां हेल्थ जूस बार बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं और भारत में अभी तक इस बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं है। उनके मुताबिक भारत आकर उन्होंने इस कारोबार में हाथ आजमाना तय कर लिया।

मुंबई के जय हिंद कॉलेज के इस पूर्व छात्र ने अपनी खुद की किचन में कुछ प्रोटीन शेक और दूसरे हेल्थ ड्रिंक्स के साथ शुरुआत की। उन्होंने 25 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से इस कारोबार को शुरू किया था जिससे उन्होंने अमेरिका से कुछ बेहतरीन मशीनें और जर्मनी से कुछ खास सामग्री मंगाई। वह कहते हैं, ‘मैंने अपने रिटेल स्टोर को ऐसी जगह पर खोला जहां पर काफी सारे जिम थे। इस तरह एक साल के अंदर ही मैंने अपनी लगाई हुई रकम वसूल कर ली।’ 

लेकिन एक साल के दौरान इन हेल्थ ड्रिंक्स को बनाने वाली सामग्री की कीमतों में बहुत तेजी आई है इसलिए कई ग्राहकों की जेब पर यह भारी भी पड़ता जा रहा है। भरवानी कहते हैं कि हम अपने ग्राहकों को यह अहसास कराना चाहते हैं कि हमारे हेल्थ ड्रिंक्स केवल प्यास बुझाने के ही काम नहीं आते बल्कि यह ड्रिंक्स संतुलित भोजन की तरह हैं। इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए उनके जूस बार में ठंड और खांसी से पीड़ित लोगों को विशेष सलाह दी जाती है।

इस बाबत भरवानी कहते हैं कि कुछ फलों और हर्ब्स में बीमारी से लड़ने की खास क्षमता होती है, इसलिए हम इन बीमारियों से प्रभावित लोगों के लिए खास तरह का जूस बनाते हैं। और यह जूस इन लोगों का जायका भी नहीं बिगाड़ता है। अब वह पांच कॉल सेंटरों के पास में अपना जूस बार खोलने जा रहे हैं, साथ ही फ्रेंचाइजी देने पर भी विचार चल रहा है और 12 फ्रेंचाइजी पहले ही तय हो चुके हैं। वह बताते हैं कि अगले महीने में पुणे और नागपुर जैसे शहरों में कंपनी के जूस बार खुलने जा रहे हैं जबकि मुंबई में तीन और जूस बार जल्दी ही खुलेंगे।

गौरव गुप्ता
स्पेशल इफेक्ट से दिखाते हैं अपना जलवा

गौरव गुप्ता के पास 29 साल की उम्र में एक शानदार रिज्यूमे है। वह तकरीबन एक साल पुराने पोस्ट प्रोडक्शन हाउस ‘फ्यूचर वर्क्स’ को प्रतिस्पर्धा से डरे बिना बहुत बढ़िया ढंग से चलाया है। गुप्ता बताते हैं कि हमारे लगभग हर निर्माता से बढ़िया कामकाजी रिश्ते हैं। वह कहते हैं कि एक नई टीम होने के बावजूद भी फ्यूचर वर्क्स को नौसिखुआ नहीं समझा जा रहा है। इसकी वजह यही है कि उनकी टीम बहुत प्रोफेशनल अंदाज में अपने बेहतरीन नतीजे देती है।

अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से जब उन्होंने अर्थशास्त्र में डिग्री हासिल की थी तभी अपना खुद का कारोबार शुरू करने की ठान ली थी। उन्होंने 60 तकनीशियनों को लेकर 2007 में ‘फ्यूचर वर्क्स’ की नींव डाली जहां पर फिल्मों की सबटाइटलिंग, साउंड मिक्सिंग और विजुअल इफेक्ट पर काम किया जाता है। गुप्ता बताते हैं कि ‘आवारापन’ फिल्म उनके लिए एक बड़ा ब्रेक थी। हमें 15 दिनों में फिल्म तैयार करके देनी थी वह भी तब जब फिल्म के एडीटर के सामने कुछ मुश्किलें आन खड़ी हुई थीं।

तब गुप्ता ने एडिटिंग में काम आने वाले उपकरण दूसरे ऑफिस में शिफ्ट कर दिए जिससे एडिटर को कुछ सहूलियत हो और  उसमें विजुअल इफेक्ट्स डालकर फिल्म तय समय पर थियेटरों में दिखाई जा सके। वह अपनी पोस्ट प्रोडक्शन कंपनी का दायरा और बढ़ाना चाहते हैं, और इस तरह के संकेत भी मिलने लगे हैं। सफलता की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए ऐसी कवायद तो करनी ही पड़ती हैं न।

प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस ने अपनी 10 फिल्मों में तकनीकी सुधार, कलर इफेक्ट्स जैसे काम की जिम्मेदारी इस कंपनी को दी है। गुप्ता कहते हैं कि पैरामाउंट और डिज्नी जैसे स्टूडियों की फिल्मों को भारतीय भाषाओं में रिलीज करने के लिए वह बातचीत कर रहे हैं। फिलहाल वह अभिषेक बच्चन और प्रियंका चोपड़ा स्टारर ‘द्रोण’ में नायाब विजुअल इफेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इस फिल्म में जान डालने के लिए उनकी टीम जी जान से जुटी हुई है। देखते हैं अपने मकसद में ये कितना कामयाब हो पाते हैं।

वासिफ खान
पालतू जानवरों के प्रोसेस्ड फूड बनाने के लिए हैं मशहूर

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हमारे पालतू जानवरों के लिए प्रोसेस्ड फूड बनाते हैं। लेकिन आप ऐसे किसी शख्स को नहीं जानते होंगे जिसने खासतौर से आपके प्यारे कुत्ते के लिए ‘गुरमीत डॉग फूड’ बनाया होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 27 साल के वासिफ खान ने ऐसा किया है।

कुछ लोगों को उनके भविष्य को लेकर संदेह था, लेकिन अब उनका यह अनोखा खाना पूरी मुंबई में उपलब्ध है। इस बाबत खान कहते हैं कि मुंबई में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कुत्तों से बेहद प्यार करते हैं। गौरतलब है कि उन्होंने 2004 में बिना किसी बड़े निवेश के अपना कारोबार शुरू किया था। खान बताते हैं कि पालतू जानवरों के लिए बाजार में कई तरह के प्रोसेस्ड फूड पहले से ही उपलब्ध थे लेकिन उनके लिए ताजा खाने की कमी बनी हुई थी। खान ने इस कमी का फायदा उठाते हुए अपने कारोबार को आगे बढ़ाया।

उनकी डॉगी ट्रीट्स 30 से 120 रुपये प्रति ट्रीट में मिलती है तो अपने तकरीबन 500 ग्राहकों के लिए वह स्पेशल डॉग केक भी तैयार कराते हैं। पालतू कुत्तों के लिए बेहतर खाना उपलब्ध कराने के लिए वह विशेषज्ञों से सलाह मशविरा भी लेते रहते हैं। मसलन कि कुत्तों के किस तरह का भोजन मुफीद रहता है। वह हर छोटी-छोटी बात का खयाल रखते हैं, रखे भी क्यों न आखिरकार ग्राहकों को खुश भी तो रखना है और खान इस बात को कैसे भूल सकते हैं कि ऐसे ग्राहकों की वजह से ही तो वह सफल हैं।

First Published : August 1, 2008 | 11:35 PM IST