Categories: लेख

आगे बढ़ने के लिए महिलाएं सीख रही हैं नुस्खे

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 11:06 AM IST

देश में महिला उद्यमियों की बढ़ती साख को देखते हुए बिजनेस स्कूलों ने नई महिला उद्यमियों की नई जमात को तैयार करने के इरादे से एक पाठयक्रम की शुरुआत की है।


खासतौर महिला उद्यमियों के लिए इस विशेष पाठयक्रम को भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु (आईआईएम-बी), इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईबीएस) हैदराबाद, नरसी मोन्जी इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एनएमआईएमएस) भी ऑफर कर रहे हैं। सेंटर एक्जीक्यूटिव एजुकेशन, आईएसबी गोल्डमैन सैक्स ग्रुप के साथ मिलकर यह पहल कर रही है।

आईएसबी ने आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं, जो अब तक परंपरागत व्यावसायिक शिक्षा हासिल नहीं कर पाई थी,के लिए शॉर्ट टर्म पाठयक्रम की शुरुआत की है। आईएसबी के शैक्षणिक पाठयक्रमों से जुड़े प्रोफेसर और एसोसिएट डीन कविल रामचंद्रन का कहना है, ‘आर्थिक रूप से थोड़ी कमजोर महिलाओं में प्रबंधन क्षमता को बढ़ाने के लिए और उन्हें सशक्त उद्यमी बनाने के लिए यह पहल की जा रही है। इसकी वजह यह भी है कि महिलाएं चुनौतियों को बहुत सकारात्मक रूप में लेती हैं।’

महिला उद्यमियों के लिए 6 हफ्ते का पाठयक्रम चला रही है जिसमें 2 हफ्त का  बिजनेस प्लान प्रेजेंटेशन भी होगा। आईआईएम बेंगलुरु हर एक साल विजिटिंग और गेस्ट फैकल्टी से इस तरह के  बिजनेस प्रेजेंटेशन के जरिए महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण दिलाता है। आईआईएम-बी में कॉरपोरेट रणनीति और नीति के प्रोफेसर गणेश प्रभु के मुताबिक इस पाठयक्रम से पहले वर्ष 2002-03 में ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी के सहयोग से महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण देने वालों के लिए प्रबंधन पाठयक्रम शुरु किया गया था।

उसके बाद ही वर्ष 2004 में महिला उद्यमियों के लिए एक स्वतंत्र पाठयक्रम की शुरूआत करने की बात सोची गई। इस पाठयक्र म को करने के साथ ही यहां पर काम करने का विकल्प भी मौजूद है। इस पाठयक्रम में अगर कोई छात्रा हॉस्टल की सुविधा नहीं लेती है तो उसे 17,000 रुपये देने पड़ेंगे और जो छात्रा कोर्स के दौरान हॉस्टल में रहती है तो उसे 25,000 रुपये देने पडेंग़े। मुंबई के नरसी मोन्जी इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट ने 3 महीने के लिए ‘इंटरप्राइज ट्रेनिंग फॉर वूमेन’ नाम से विशेष मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू किया है।

इस तरह के शैक्षणिक पाठयक्रमों का उद्देश्य नए व्यवसायिक उद्यमों की शुरुआत करने के लिए व्यवहारिक जानकारी देना है। इसके लिए कई संस्थान लेक्चर, सेमिनार और वर्कशॉप का इंतजाम भी करती हैं ताकि महिला उद्यमियों के विकास से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की जा सके। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (एएमए) का महिला विकास केंद्र नई महिला व्यावसाइयों को प्रेरित करने के लिए नियमित तौर पर इन्फोसिस की रमा बीजापुरकर और केंद्रीय सतर्कता आयोग की सतर्कता आयुक्त रंजना कुमार जैसी जानी-मानी महिला शख्सियतों को बुलाता है।

एएमए की अध्यक्ष जनक पारिख कहती हैं कि हम महिला उद्यमियों को प्रेरित करने के लिए कामयाब महिलाओं को बुलाते हैं और उन्हें यह संदेश देते हैं कि वे कैसे अपने कामकाज और घर के बीच तालमेल बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि आज की महिलाओं के लिए ग्रेजुएशन या फिर शादी के बाद ही बहुत सारी चीजें खत्म नहीं हो जाती हैं, बल्कि अब वे बेहतर करियर संभावनाओं और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करती हैं।

महिलाओं को कारोबार के गुर सिखाने के क्षेत्र में नामी अहमदाबाद के इंटरनेशनल सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड करियर डेवलपमेंट (आईसीईसीडी से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि कारोबार पर अब केवल पुरुषों का ही वर्चस्व नहीं रह गया है और अब महिलाएं इस मामले में भी उनसे आगे निकलने को तैयार हैं। इस इंस्टीटयूट ने हाल ही में एंटरप्राइज मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप (ईएमई) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा शुरू किया है जिसको गुजरात विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है।

आईसीईसीडी की निदेशक हिना शाह का कहना है कि कोर्स में उद्यमिता के साथ-साथ प्रबंधन की बारीकियां भी सिखाई जाती हैं, जिसको करने के बाद महिलाएं छोटा-मोटा कारोबार तो संभाल ही सकती हैं साथ ही पुश्तैनी कारोबार को भी आसानी से संभाल सकती हैं। इस तरह उनको अकादमिक डिग्री के साथ-साथ व्यावहारिक जानकारी भी मिल जाती है। आईआईएम-बेंगलुरु से जुड़े प्रभु कहते हैं कि आत्मनिर्भर महिलाएं पूरे सामाज को प्रभावित करती हैं।

उनके मुताबिक महिलाएं धीरे-धीरे कारोबार में तरक्की करना चाहती हैं और वे कई नई किस्म के कारोबार शुरू कर सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें, अगर वहां महिला आत्मनिर्भर है तो वह अपने बच्चे की अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सजग रहती है। उनका कहना है कि एक संस्थान के तौर पर हम ऐसा करने में सक्षम हैं।

First Published : July 15, 2008 | 11:05 PM IST