सीएचबी की राह में अटके रोड़े

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:20 AM IST

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने चंडीगढ़ को झुग्गी झोपड़ी मुक्त बनाने की जो योजना तैयार की थी, उसमें अब रुकावटें साफ दिखने लगी हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर पार्श्वनाथ डेवलपर लिमिटेड के बीच मतभेद का खामियाजा बोर्ड की इस परियोजना पर पड़ सकता है। सीएचबी ने पार्श्वनाथ के साथ हुए समझौते के जरिए जो रकम उगाही थी उसका इस्तेमाल शहर में झुग्गी झोपड़ी में रहने वालों के लिए फ्लैट्स बनाने के लिए करने की तैयारी में थी।
हाउसिंग बोर्ड ने 2007 में पार्श्वनाथ के साथ जमीन के लिए 821 करोड़ रुपये का समझौता किया था। इस समझौते के तहत पाश्वर्ननाथ प्राइड एशिया परियोजना में फ्लैट्स की बिक्री से जो कमाई होती उसका 30 फीसदी हाउसिंग बोर्ड के कब्जे में जाती।
इसी पैसे का इस्तेमाल हाउसिंग बोर्ड चंडीगढ़ में झुग्गी झोपड़ी वालों के लिए मकान बनाने में करने वाला था। पर अब पार्श्वनाथ डेवलपर यह आरोप लगा रहा है कि हाउसिंग बोर्ड अतिक्रमण मुक्त जमीन जमीन उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि मियाद पूरी हो जाने के दो साल बाद तक जमीन उपलब्ध नहीं कराने के कारण अब पार्श्वनाथ को भी अपनी ओर से इस परियोजना को पूरा करने के लिए कुछ शर्तें रखनी पड़ी हैं।
पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने चंडीगढ़ प्रशासन को एक पत्र लिख कर यह मांग की है कि या तो पार्श्वनाथ प्राइड एशिया परियोजना के लिए किए गए करार की फिर से समीक्षा की जाए या फिर परियोजना को आनुपातिक आधार पर आगे बढ़ाया जाए या फिर दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को रद्द कर दिया जाए।
यूटी वित्त सचिव संजय कुमार ने बताया कि पार्श्वनाथ की ओर से रखे गए तीन में से किसी भी शर्त पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्श्वनाथ प्राइड एशिया परियोजना के काम में देरी होने का असर हाउसिंग बोर्ड की परियोजना पर भी पड़ सकता है। पार्श्वनाथ की इस परियोजना के तहत एक कमरे का फ्लैट 52 लाख रुपये और विला का निर्माण 6 करोड़ रुपये में किया जा रहा था।

First Published : April 20, 2009 | 10:15 AM IST