पुलिस चुनाव में, यातायात निजी हाथ में

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 12:57 AM IST

उत्तर प्रदेश में 15 वे लोकसभा के लिए पहले चरण का मतदान गुरुवार को ही शुरू हो जाने से सशस्त्र बलों की मांग काफी बढ़ गई है।
चुनावी डयूटी पर लगे होने के कारण राज्य में आम पुलिस गतिविधियों, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बलों की कमी दिखने लगी है। सुरक्षा कर्मियों की इस कमी को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस रोजमर्रा के सुरक्षा व्यवस्था के लिए निजी सुरक्षा एजेंसियों की मदद ले रही है।
इस कड़ी में अगर राजधानी लखनऊ का ही जिक्र करें तो पता चलता है कि शहर के 15 महत्वपूर्ण चौराहों पर यातायात व्यवस्था को मुस्तैद बनाए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के 200 निजी सुरक्षा गार्डों को तैनात किया गया है।
फेडरल सिक्योरिटी सर्विसेज के निदेशक अरमान खान ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि अकेले उनकी एजेंसी से लखनऊ पुलिस को 25 गार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन सुरक्षा कर्मियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से यातायात प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। तीसरे चरण के मतदान के तहत 30 अप्रैल को लखनऊ में मतदान होना है।
उन्होंने बताया कि इसे देखते हुए गार्डों की संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच सकती है। खान ने बताया, ‘हमने 2002 विधानसभा चुनाव और 2004 के आमसभा चुनाव में भी सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए थे। तब हमने इसके लिए कोई शुल्क भी नहीं लिया था।’ ठीक इसी तरह अलीगढ़ और गाजियाबाद समेत राज्य के दूसरे जिलों में भी निजी सुरक्षा कर्मियों की सहायता ली जा रही है।
कुछ जगहों पर तो पुलिस थाने को संभालने का जिम्मा भी निजी गोर्डों को सौंपा गया है। इधर, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) ए पी माहेश्वरी ने बताया कि इस बारे में विभाग की ओर से कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस प्रमुखों को हालांकि इतनी रियायत जरूर दी गई है कि वे अपने स्तर से इस मसले को सुलझा सकें।
माहेश्वरी ने कहा, ‘अगर जरूरत पड़ती है तो जिला पुलिस कुछ गतिविधियों में आम जनता की भागीदारी और उनका सहयोग ले सकती है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग अलग अलग जगहों के लिए अलग अलग तरीके का हो सकता है।’ 
उन्होंने कहा कि आपराधिक जांच और प्रशासन से जुड़ी कुछ ऐसी गतिविधियां हैं जिनके लिए पुलिस के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति या संगठन का सहयोग नहीं लिया जा सकता है।
निजी सुरक्षा एजेंसियां संभाल रही हैं उप्र में यातायात व्यवस्था
चुनाव डयूटी पर लगे होने के कारण सुरक्षा बलों की कमी
कानून व्यवस्था बनाने में भी ली जा रही है निजी गार्डों की सहायता

First Published : April 16, 2009 | 10:03 PM IST