खनन समूह वेदांत लिमिटेड (Vedanta Limited) अपने कारोबार के विस्तार के लिए 6 अरब डॉलर निवेश करेगा। निवेशक सम्मेलन में वेदांत के अधिकारियों ने कहा कि समूह एल्युमीनियम से लेकर जिंक और लौह अयस्क से लेकर तेल एवं गैस तक फैले अपने कारोबार का विस्तार करना चाह रहा है ताकि उसके सालाना एबिटा में कम से कम 2.5 अरब डॉलर जुड़ सके।
उन्होंने कहा कि समूह के विकास को गति देने के लिए उसके पास अभी 50 से अधिक सक्रिय परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। उससे 6 अरब डॉलर से अधिक के वृद्धिशील राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है और 31 मार्च को खत्म होने वाले मौजूदा वित्त वर्ष में एबिटा भी 5 अरब डॉलर से बढ़कर 6 अरब डॉलर होने और वित्त वर्ष 2027 तक इसके 7.5 अरब डॉलर उम्मीद है।
निवेशकों की बैठक में दी गई प्रस्तुति के अनुसार, वेदांत के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि हम अगले 25 वर्षों में एक अलग स्तर पर पहुंच जाएंगे। उनके भाई और समूह के उपाध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा, ‘7.5 अरब डॉलर से अधिक की सालाना एबिटा देने वाली परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में 6 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है। इससे संभावित रूप से 6 अरब डॉलर का वृद्धिशील राजस्व मिलेगा और 2.5 से 3 अरब डॉलर की वृद्धि एबिटा भी प्राप्त होगी।’
उन्होंने कहा, ‘हम अपनी सभी साइटों पर अतिरिक्त मूल्य बनाने के लिए लगातार विकल्प तलाश रहे हैं। फिलहाल हमारे सभी कारोबारों में कई उच्च प्रभाव वाली परियोजनाएं हैं, जो अभी निष्पादन के चरण में हैं। ये आगे चलकर हमारी परिचालन क्षमता बढ़ाते हुए लागत नेतृत्व में भी योगदान देंगे। ये हमारे 7.5 अरब डॉलर के सालाना एबिटा के घोषित लक्ष्य को साधने में भी मदद करेंगे।’
तत्काल शुरू होने वाली कुछ महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं में लांजीगढ़ एल्युमीनियम संयंत्र में रिफाइनरी की क्षमता सालाना 20 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख करने, एटीसीओ की क्षमता बढ़ाकर 10 लाख टन करने, एथेना और मीनाक्षी बिजली संयंत्रों की शुरुआत से वाणिज्यिक बिजली पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होकर 5 गीगावॉट करने, जिंक इंटरनैशनल क्षमता को 2,73,000 टन से बढ़ाकर 5,00,000 टन तक ले जाने के लिए गैम्सबर्ग जिंक सुविधा में क्षमता विस्तार करने, लौह अयस्क का उत्पादन 53 लाख टन से बढ़ाकर 1.3 करोड़ टन करने और 5,00,000 टन प्रति वर्ष क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा लौह-मिश्र धातु उत्पादक बनना शामिल है।
समूह के सीएफओ अजय गोयल ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 तक शुद्ध ऋण को 9 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है, जो अभी 13 अरब डॉलर है। उन्होंने कहा कि समूह की मूल कंपनी वेदांत रिसोर्सेज ने पिछले दो वर्षों में अपने बहीखाते में 3.5 अरब डॉलर ऋण चुकाया है, जिससे उसका ऋण बोझ 6 अरब डॉलर रह गया है।
अरबपति अनिल अग्रवाल के स्वामित्व वाली वेदांत लिमिटेड के पास धातु और खनिजों के साथ-साथ भारतीय और वैश्विक कंपनियों के बीच संपत्ति का एक अनूठा पोर्टफोलियो है।
उसमें जिंक, चांदी, सीसा, एल्युमीनियम, क्रोमियम, तांबा, निकल, तेल एवं गैस, लौह अयस्क और स्टील सहित एक पारंपरिक लौह कार्यक्षेत्र तथा बिजली (जिसमें कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा) भी शामिल है। समूह और अब सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले ग्लास के निर्माण क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है।