त्योहारों के दौरान खाद्य तेलों के दाम अधिक रहने की आशंका से केंद्र ने बुधवार को पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की कच्ची किस्मों पर मूल सीमा शुल्क को लगभग खत्म कर दिया और इन पर मार्च 2022 तक कृषि उपकर में भी कटौती कर दी है। कुछ ही दिन पहले केंद्र ने राज्यों को तिलहन और खाद्य तेलों पर स्टॉक सीमा लगाने का अधिकार प्रदान किया था।
हालांकि व्यापारियों और बाजार पर नजर रखने वालों ने कहा है कि कटौती के इस समय का किसानों की प्राप्तियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वे खरीफ की सोयाबीन और मूंगफली की अपनी फसलों की कटाई कर रहे हैं। हालांकि इसके साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि इससे अंतिम उपभोक्ता कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार पहले से ही शुल्क में कमी और इसके असर को कम करने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी कर चुके थे।
अलबत्ता घरेलू तिलहन प्रसंस्करण की प्रमुख संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) को लगता है कि अगले कुछ सप्ताहों के दौरान प्रमुख खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर तक की गिरावट आ सकती है। फरवरी 2021 के बाद से आज आयात शुल्क में पांचवीं बार कमी की गई है। केंद्र ने कीमतों को कम रखने के लिए शुल्क कम किया है।
पिछली बार शुल्क कटौती की घोषणा 11 सितंबर को की गई थी, जब कच्चे तेलों पर मूल शुल्क 2.5 प्रतिशत और रिफाइंड तेलों पर 35.75 प्रतिशत कम कर दिया गया था। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अधिसूचना में कहा है कि शुल्क में यह कटौती 14 अक्टूबर से प्रभावी होगी और 31 मार्च, 2022 तक लागू रहेगी। कच्चे पाम तेल पर अब 7.5 प्रतिशत का कृषि अवसंरचना विकास उपकर (एआईडीसी) लगेगा, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल के लिए यह दर पांच प्रतिशत होगी। आज की इस कटौती से पहले सभी प्रकार के कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर कृषि अवसंरचना उपकर 20 प्रतिशत था। इस कटौती के बाद पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी के तेल की कच्ची किस्मों पर प्रभावी सीमा शुल्क क्रमश: 8.25 प्रतिशत, 5.5 प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत हो जाएगी। इसके अलावा सूरजमुखी, सोयाबीन, पामोलिन और पाम तेल की रिफाइंड किस्मों पर मूल सीमा शुल्क मौजूदा 32.5 प्रतिशत से घटाकर 17.5 प्रतिशत कर दिया गया है।