ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन भारत में अपनी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी फ्लिपकार्ट से पिछड़ रही है। अमेरिका के एक शोध समूह बर्नस्टीन की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि भारत में प्रतिकूल रेगुलेटरी वातावरण और देश के छोटे-छोटे शहरों में विस्तार करने की चुनौतियों के चलते 6.5 बिलियन डॉलर के निवेश के बाद भी एमेजॉन सालाना फायदे में पिछड़ रही है।
वैश्विक ऑनलाइन कंपनियों के लिए भारत एक उपयोगी बाजार है लेकिन यहां पर व्यापार जमाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। भारत, एमेजॉन के लिए सबसे बड़ा विदेशी मार्केट है, साथ ही भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्राइम मेंबरशिप के ग्राहक भी एमेजॉन के पास हैं। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक 6.5 बिलियन डॉलर के निवेश के बाद भी कंपनी का मुनाफा घटा है।
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एमेजॉन को भारत में अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा का दबाव अधिक झेलना पड़ रहा है, साथ ही 2 और 3 टियर के शहरों यानी छोटे शहरों में सीमित उपस्थिति भी एमेजॉन के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है।
ई-कॉमर्स के मामले में भारत में तीन कंपनियों का वर्चस्व है- एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और रिलायंस जियो मार्ट। भारतीय बाजार ई-कॉमर्स के मामले में कई भागों में बंटा हुआ है। इसमें प्रोडक्ट की क्वालिटी और डिस्ट्रीबियूशन यानी की वितरण का नेटवर्क सबसे अहम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि एमेजॉन टियर 1 यानी बड़े शहरों में 5 मिलियन प्राइम कस्टमर्स के साथ टॉप पर है।
जबकि फ्लिपकार्ट ने कपड़ो की कैटेगरी में अपनी बढ़त बना कर रखी है। लेकिन छोटे शहरों में नई ई-कॉमर्स कंपनी मीशो इस कैटेगरी में तेजी से आगे बढ़ रही है, खासतौर पर उन जगहों में जहां पर एमेजॉन अपनी पहुंच बनाने में लगभग फेल हुआ है।
बर्नल्टीन की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ई-कॉमर्स में फ्लिपकार्ट 23 बिलियन डॉलर की सालाना बिक्री के साथ पहले नंबर पर है जबकि एमेजॉन पिछले साल 18 से 23 बिलियन डॉलर के ग्रॉस मर्चेंडाइस वैल्यू यानी GMV के साथ दूसरे स्थान पर है और रिलायंस 4.6 बिलियन डॉलर की ई-कॉमर्स बिक्री के साथ तीसरे स्थान पर है।