सन फार्मा के पक्ष में रहा फैसला

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 7:01 PM IST

दवा बनाने वाली कंपनी सन फार्मा ने बताया कि इजरायल में टारो की खुली पेशकश को लेकर दायर मामले में वहां की अदालत ने सन फार्मा के पक्ष में फैसला दिया है।


सन फार्मा ने बताया कि इजरायली अदालत ने टारो की इस आपत्ति को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि सन फार्मा को इजरायली कानून के तहत एक विशेष निविदा पेशकश लानी चाहिए। पिछले महीने मुंबई स्थित कंपनी सन फार्मा ने टारो के संस्थापकों के शेयरों समेत शेष सभी शेयर खरीदने के लिए 7.75 डॉलर प्रति शेयर के आधार पर एक खुली पेशकश दी थी।

हालांकि  टारो के निदेशकों ने दावा किया कि एक विशेष निविदा पेश करना जरूरी है और इस संबंध में इजरायली अदालत में एक मामला दायर किया गया था। कंपनी ने कहा कि सन फार्मा अपनी सहयोगी कंपनी अल्कालोयडा केमिकल कंपनी एक्सक्लूसिव ग्रुप लिमिटेड  (एल्कालोयडा) के जरिए पूर्व घोषित निविदा पेशकश पूरी करने की स्थिति में होगी।

सन फार्मा ने कहा कि 30 जून को दी जाने वाली खुली पेशकश की समयसीमा अब 2 सितंबर की बजाय 3 सितंबर को खत्म होगी। कंपनी ने बताया कि अदालत ने कहा कि कंपनी के निदेशकों को हस्ताक्षर करने से पहले समझौते का अध्ययन करना चाहिए था और इसके बाद इसकी पुष्टि करनी चाहिए थी कि यह कंपनी के हित में है या नहीं।

सन फार्मा ने बताया कि अदालत ने साफ कह दिया है कि निदेशक अब यह विशेष निविदा पेश करने की आवश्यकता का दावा नहीं कर सकते हैं। सन फार्मा के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी ने कहा, ‘अदालत के फैसले से यह स्पष्ट है कि टारो के स्वतंत्र निदेशकों की ओर से दायर मामला बैरी लीविट की सोची-समझी चाल थी, ताकि विकल्प समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा जा सके।’ 

ऐसे निदेशक जो शेयरधारक भी हैं, उनके बारे में अदालत ने कहा,’ऐसे शेयरधारकों को सन के निवेश से फायदा होगा जिन्होंने टारो को डूबने से बचाया।’ इस बीच सन फार्मा को अमेरिकी संघीय व्यापार आयोग की तरफ से भी इस मामले में खुशखबरी मिली है। कंपनी के मुताबिक आयोग ने टारो के लिए उसकी खुली पेशकश को हरी झंडी दे दी है।

गौरतलब है कि सन फार्मा ने अधिग्रहण के सौदे पर टारो की रजामंदी के बाद उसे बड़ी रकम दी थी, जिससे टारो का कारोबार पटरी पर आ गया। लेकिन वित्तीय स्थिति सुधरने के बाद टारो ने उस सौदे को मानने से इनकार कर  दिया, जिसके बाद मामला अदालत मं पहुंच गया। सन का कहना हैकि अब टारो इससे मुकर नहीं सकती।

अदालती फटकार

कंपनी के निदेशकों को हस्ताक्षर करने से पहले समझौते का अध्ययन करना चाहिए था और इसके बाद इसकी पुष्टि करनी चाहिए थी कि यह कंपनी के हित में है या नहीं

First Published : August 27, 2008 | 11:52 PM IST