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भारतीय फिनटेक स्टार्टअप कंपनियों ने 2023 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में 1.2 अरब डॉलर की रकम जुटाई, जो सालाना आधार पर 55 प्रतिशत की गिरावट है। बढ़ती मुद्रास्फीति और ऊंची ब्याज दरों की वजह से कोष उगाही में कमजोरी आई है।
मार्केट इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्शन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022 की पहली तिमाही में यह निवेश 2.6 अरब डॉलर था। हालांकि कोष उगाही वर्ष 2022 की चौथी तिमाही के मुकाबले तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 126 प्रतिशत तक बढ़ी है। 2022 की चौथी तिमाही में फिनटेक स्टार्टअप में महज 52.3 करोड़ डॉलर निवेश हुआ था।
हालांकि भारत 2023 की पहली तिमाही अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरा सर्वाधिक वित्त पोषित भूभाग बना हुआ है। कुल कोष उगाही गतिविधियों के संदर्भ में भारत शीर्ष-5 देशों में शामिल है।
भारतीय फिनटेक कंपनियों ने 2023 के पहले तीन महीनों में 10 करोड़ डॉलर के 6 फंडिंग राउंड दर्ज किए हैं। फोनपे, मिंटीफाई, इंश्योरेंस देखो और क्रेडिटबी ने इस अवधि के दौरान 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा रकम जुटाई है।
हालांकि यह आईपीओ और यूनिकॉर्न के संदर्भ में असमान तिमाही रही। पहली तिमाही में फिनटेक क्षेत्र की किसी कंपनी का आईपीओ नहीं आया और न ही यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की कंपनी) की जमात में कोई नया नाम जुड़ा।
हालांकि अधिग्रहणों में कुछ तेजी दर्ज की गई। 2023 की पहली तिमाही में फिनटेक क्षेत्र में 11 अधिग्रहण दर्ज किए गए जबकि 2022 की चौथी तिमाही में यह संख्या 6 थी।