प्रमुख उपभोक्ता कंपनी मैरिको का प्रदर्शन जून में काफी कमजोर रहा और उसमें 18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जबकि एसऐंडपी बीएसई एफएमसीजी सूचकांक में महज 3 फीसदी की गिरावट आई और बीएसई 100 सूचकांक में इस दौरान 6 फीसदी की गिरावट रही। निकट भविष्य में मार्जिन संबंधी चिंता, तगड़ी प्रतिस्पर्धा और अधिक मूल्यांकन से शेयर को झटका लगा।
हालांकि इस महीने मैरिको के शेयर में कुछ सुधार दिखा है लेकिन जून तिमाही में कमजोर प्रदर्शन का असर भारतीय बाजार में उसके परिचालन प्रदर्शन पर दिख सकता है। कंपनी का परिचालन प्रदर्शन भी उम्मीद से कमतर रहा। भारतीय बाजार में 21 फीसदी के उच्च आधार पर कंपनी के वॉल्यूम में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में 25 फीसदी की ऊंचाई के बाद पिछली छह तिमाहियों के दौरान वॉल्यूम ग्रोथ में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जबकि दिसंबर और मार्च तिमाही के दौरान वॉल्यूम ग्रोथ लगभग स्थिर रहा था। तिमाही के दौरान उच्च आधार के कारण फूड श्रेणी का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। इसके अलावा कोविड के संक्रमण में नरमी के कारण पोषण संबंधी श्रेणियों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अभिजित कुंडू ने कहा कि तीन वर्षीय वार्षिक वृद्धि के आधार पर मैरिको इंडिया का वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी दिखता है जो अन्य कंपनियों के प्रदर्शन के मुकाबले कमजोर है। कंपनी के प्रदर्शन को मुख्य तौर पर सफोला तेल में दो अंकों की गिरावट और पैराशूट तेल श्रेणी में गिरावट से झटका लगा। कंपनी का कहना है कि गिरावट की मुख्य वजह आधार तिमाही के दौरान अधिक घरेलू उपयोग और खाद्य तेल में कमजोर बिक्री रही।
तिमाही-पूर्व समीक्षा के अनुसार, कच्चे माल में अप्रत्याशित महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ग्राहकों के लिहाज से मूल्य वृद्धि में अनपेक्षित प्रभाव के कारण इस ब्रांड ने वॉल्यूम के बजाय मार्जिन को बरकरार रखने पर ध्यान दिया। सफोला तेल को छोड़कर कंपनी के भारतीय कारोबार के वॉल्यूम में मामूली वृद्धि दर्ज की गई।
जिन श्रेणियों का प्रदर्शन अच्छा रहा उनमें पर्सनल केयर और अंतरराष्ट्रीय परिचालन शामिल हैं। हालांकि अधिक आय वाले उपभोक्ताओं पर कम प्रभाव और कम आधार के कारण प्रीमियम श्रेणी का प्रदर्शन बेहतर रहा। सभी वैश्विक बाजारों में कंपनी ने स्थिर मुद्रा आधार पर 15 से 17 फीसदी के दायरे में वृद्धि दर्ज की। तिमाही के दौरान अंतरराष्ट्रीय कारोबार के दमदार प्रदर्शन के बावजूद कुल राजस्व वृद्धि लगभग स्थिर रही।