भारत

असम के छह पारंपरिक शिल्पों को मिला GI टैग, CM हिमंत बिस्वा सरमा ने दी सभी के बारे में जानकारी

प्रमाणित उत्पादों में असम जापी (एक पारंपरिक बांस टोपी) और असम बिहू ढोल (बिहू के दौरान बजाया जाने वाला पारंपरिक ढोल) शामिल हैं।

Published by
भाषा   
Last Updated- March 31, 2024 | 7:36 PM IST

बिहू ढोल, जापी और सार्थेबारी घंटी धातु शिल्प सहित असम के छह पारंपरिक उत्पादों और शिल्पों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग दिए गए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को यह जानकारी दी।

हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि इन उत्पादों से करीब एक लाख लोगों की जीविका जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), आरओ गुवाहाटी के समर्थन से और पद्म श्री डॉ. रजनी कांत, जीआई विशेषज्ञ की सहायता से पारंपरिक शिल्पों को छह प्रतिष्ठित जीआई टैग प्रदान किए गए हैं। इसमें असम बिहू ढोल, जापी, सार्थेबारी धातु शिल्प और कुछ प्रतिष्ठित उत्पाद शामिल हैं। इतिहास में गहरी जड़ें जमा चुके ये उत्पाद लगभग एक लाख लोगों को सीधे जीविका प्रदान करते हैं।’

इन उत्पादों हेतु जीआई टैग के लिए आवेदन 2022 के उत्तरार्ध में दायर किए गए थे और इनके प्रमाणन की पुष्टि शनिवार को की गई थी।

प्रमाणित उत्पादों में असम जापी (एक पारंपरिक बांस टोपी) और असम बिहू ढोल (बिहू के दौरान बजाया जाने वाला पारंपरिक ढोल) शामिल हैं।

असम अशरिकांडी टेराकोटा शिल्प, असम पानी मटेका शिल्प, सार्थेबारी धातु शिल्प और असम मिसिंग हथकरघा उत्पाद कुछ अन्य उत्पाद हैं जिन्हें जीआई टैग प्रदान किया गया है।

First Published : March 31, 2024 | 7:36 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)