चर भारत में एडब्ल्यूएस री/स्टार्ट के जरिये क्लाउड कम्प्यूटिंग में करियर शुरू करने के लिए भारत में बेरोजगार लोगों के लिए मदद एडब्ल्यूएस के साथ भागीदारी कर रही है। कंपनी 12 सप्ताह के इन-पर्सन, स्किल-डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत नि:शुल्क तौर पर सीखने वालों को आईटी परिचालन, साइट रिलायबिलिटी, और इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में तैयारियां करने में मदद करती है।
एक्सेंचर इस प्रोग्राम का वित्त पोषण कर रही है और उन चार गैर-लाभकारी संगठनों के जरिये भारत में इसे पेश कर रही है, जो एक्सेंचर के स्किलिंग इकोसिस्टम का हिस्सा नहीं हैं। इनमें अनुदीप, फाउंडेशन, डॉन बॉस्को टेक सोसायटी, मैजिक बस फाउंडेशन, और होप फाउंडेशन शामिल हैं। एक्सेंचर के स्वयंसेवक भी छात्रों को मार्गदर्शन में मदद करेंगे।
इस कार्यक्रम के पहले 12 बैच 11 शहरों में शुरू किए गए हैं, जिनमें कुरुनूल, त्रिची, कोच्चि, पुनलूर, विजयवाड़ा, नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलूरु, कोलकाता, और हैदराबाद शामिल हैं। अल्फाबीटा द्वारा संचालित और एडब्लयूएस द्वारा शुरू किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि क्लाउड आधारित कौशल के साथ कर्मचारियों के लिए अनुमानित ऊंची मांग के बावजूद करीब भारत में आधे श्रमिक (46 प्रतिशत) अपने करियर को बढ़ाने के लिए पर्याप्त डिजिटल कौशल को लेकर भरोसेमंद नहीं हैं। सर्वे में यह भी पाया गया है कि 95 प्रतिशत कर्मचारी और व्यवसायियों को डिजिटल संबंधित कौशल की राह में व्यावसायिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
भारत में एक्सेंचर के प्रबंध निदेशक (कॉरपोरेट सिटीजनशिप) क्षितिज कृष्णस्वामी ने कहा, ‘एक्सेंचर में हम ऐसी प्रतिभाएं तैयार करने के लिए लंबे समय से प्रतिबद्ध रहे हैं जो लोगों की जिंदगियां सुधारने के लिए कौशल विकास में सक्षम हों। वर्ष 2010 से, हमने भारत में 10 लाख से ज्यादा लोगों को सक्षम बनाया है, जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के युवा और महिलाएं और विकलांगता से जूझ रहे लोग शामिल थे। लर्निंग भागीदारों के सहयोग से कौशल निर्माण के अलावा, हमारे प्रयासों का मुख्य आधार है कुशल और नियोक्ताओं के बीच सेतु तैयार करना और हम क्लाउड टेक्नोलॉजी के जरिये पेश आकर्षक अवसरों के जरिये व्यापक नेटवर्क तैयार कर रहे हैं।’