उड्डयन मंत्रालय ने घरेलू परिचालन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के बाद किराये की सीमा को 31 अगस्त से खत्म करने का फैसला किया है। आज एक आदेश के हिसाब से किराये की सीमा हटाए जाने के बाद विमानन कंपनियों को किराया तय करने की आजादी होगी। विमानन उद्योग के अधिकारियों के अनुसार ईंधन के ऊंचे दाम को देखते हुए विमानन कंपनियां किराये को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकती हैं और कम मांग वाले मार्गों पर किराये में कुछ छूट दे सकती हैं।
कोविड-19 महामारी के कारण दो महीने के लॉकडाउन के बाद 25 मई, 2020 को हवाई सेवाएं फिर शुरू होने पर मंत्रालय ने उड़ान की क्षमता और घरेलू हवाई किराये पर निचली और ऊपरी सीमा लगा दी थी। हालांकि विमानों को 100 फीसदी क्षमता के साथ उड़ान भरने की अनुमति पिछले साल अक्टूबर में दे दी गई थी लेकिन किराये पर नियंत्रण जारी था।नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र कुमार मिश्रा ने आज एक आदेश में कहा कि घरेलू परिचालन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के बाद किराये की सीमा 31 अगस्त से खत्म करने का फैसला किया गया। विमानन क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि किराये की सीमा वापस लिए जाने से अब मांग और आपूर्ति के आधार पर किराया तय करने की सहूलियत होगी। क्षमता में इजाफा और ईंधन के दाम भी किराया निर्धारित करने में भूमिका निभाते हैं। आकाश ने मार्च 2023 तक 18 विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है। इंडिगो ने भी पिछले हफ्ते कहा था कि चालू वित्त वर्ष में उसकी क्षमता में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 70 से 80 फीसदी का इजाफा होगा।
विमानन उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्तमान में लोड फैक्टर (सीटों के भरने की दर) 75 से 80 फीसदी के बीच है। ऐसे में किराया घटाने से यात्रियों की संख्या ज्यादा इजाफा होने की उम्मीद नहीं है। ईंधन के दाम को देखते हुए किराया मौजूदा स्तर पर बना रह सकता है।