राजनीतिक गलियारों में गुरुवार का दिन उठा-पटक, बयानबाजी और सरकार गिराने-बचाने की जुगत में बीता।
बुधवार को वामदलों की ओर से समर्थन वापसी की औपचारिक घोषणा के बाद सरकार ने बहुचर्चित परमाणु करार से जुड़े अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के मूल मसौदे को सार्वजनिक कर दिया। वहीं मार्क्सवादी नेता प्रकाश करात का कहना है कि अल्पमत सरकार इस तरह का कदम भला कैसे उठा सकती है?
इस बीच भारत में अमेरिका के राजदूत डेविड सी मल्फोर्ड ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की और भारत अमेरिका परमाणु करार पर हुई प्रगति के बारे में चर्चा की। मल्फोर्ड ने बुधवार को 45 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह देशों के दूतों से मुलाकात कर परमाणु करार पर उनका सहयोग मांगा था।
इस बीच परमाणु करार पर सरकार के पक्ष में मत देने के तमाम अटकलों को विराम देते हुए शिरोमणि अकाली दल ने इस बात को साफ किया वह इस मसले पर एनडीए के साथ है। हालांकि सपा के बागी सांसद राजब्बर ने सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें समर्थन देने की घोषणा की है। राजग ने सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वामदलों के समर्थन वापसी के बाद भी वह ऐसा माहौल तैयार कर रही है, जिससे लगे कि उसके पास बहुमत है, जबकि उसे सदन में बहुमत साबित करना चाहिए।
इधर, यह खबर भी जोरों पर है कि राष्ट्रपति अगर प्रधानमंत्री के इस बात से संतुष्ट हो जाती है कि उसके पास बहुतम का समर्थन है, तो सदन में इसे साबित करने को नहीं भी कहा जा सकता है। वैसे सरकार के रणनीतिकार सदन में बहुमत जुटाने के लिए सपा सहित अन्य छोटी पार्टियों से भी संपर्क साध रहे हैं।