उत्तर प्रदेश में अगले साल प्रस्तावित वैश्विक निवेश सम्मेलन से पहले योगी सरकार विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीतियां लाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन दिवसीय वैश्विक निवेश सम्मेलन के आयोजन की तारीखों का एलान करते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहन, सहूलियतें व रियायतें देते हुए अलग-अलग 30 से ज्यादा नीतियां इस साल के अंत तक घोषित की जाएंगी। प्रदेश की नई औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति के साथ-साथ ईवी पॉलिसी, टॉय, टेक्सटाइल, फार्मा, स्टार्टअप, डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी सहित 30 से अधिक सेक्टरोल पॉलिसी को निवेश सम्मेलन से पहले तैयार कर प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में वैश्विक निवेश सम्मेलन (जीआईएस) अगले साल 10-11 व 12 फरवरी को राजधानी लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन के जरिए उत्तर प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
वैश्विक निवेश सम्मेलन की तैयारियों को लेकर बुलाई गयी बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक सिंगापुर, फ्रांस, इंग्लैंड और मारीशस ने इसका सहयोगी देश (पार्नर कंट्री) बनने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि लगभग एक दर्जन देश उत्तर प्रदेश में हो रहे निवेश सम्मेलन के पार्टनर कंट्री बन सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सहयोगी देश बनने के लिए नीदरलैंड, कनाडा, यूएसए, जापान, इजराइल व थाईलैंड के रादूतों व उच्चायुक्तों से संपर्क साधा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेश सम्मेलन में भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए दुनिया के डेढ़ दर्जन देशों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे। इन देशों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों को ब्रांड एम्बेसेडर के तौर पर भेजा जाएगा। साथ ही टीम में विषय विशेषज्ञ व अधिकारी भी शामिल होंगे। रोड शो को आयोजन में सीआईआई व फिक्की जैसे बड़े औद्योगिक संगठनों की मदद भी ली जाएगी।
विदेशों में प्रस्तावित रोड शो को अलावा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार देश में भी विभिन्न बड़े शहरों में निवेशकों को आकर्षित करने जाएगी। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में भी रोड शो आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन से पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में लैंड बैंक तैयार करने के काम को तेजी से पूरा किया जाए ताकि उद्यमों के लिए जमीन की समस्या न हो।