बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी-50 में जुलाई 2022 से अब तक करीब 15 फीसदी की तेजी के बाद विश्लेषक अब इक्विटी बाजारों पर सतर्क रुख अपना रहे हैं। क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट ने अल्पावधि में गिरावट का अनुमान जताया है। क्रेडिट सुइस वेल्थ मैनेजमेंट में इंडिया इक्विटी रिसर्च के प्रमुख जितेंद्र गोहिल ने प्रेमल कामदार के साथ मिलकर तैयार की गई रिपोर्ट में लिखा है, ‘भारतीय इक्विटी में तेज सुधार से उसका मूल्यांकन सर्वाधिक ऊंचे स्तरों पर पहुंच गया है। एमएससीआई इंडिया सूचकांक प्रदर्शन के लिहाज से एमएससीआई वर्ल्ड और एमएससीआई ईएम के मुकाबले 37 फीसदी और 96 फीसदी ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है। भारत का 12 महीने का पीई बढ़कर 19.5 गुना पर पहुंच गया है और यह मौजूदा समय में ‘10-ईयर मीन’ से एक स्टैंडर्ड डेविएशन (एसटीडी) ऊपर कारोबार कर रहा है। जैसे ही अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी आनी शुरू हुई है, और मंदी का जोखिम गहराया है, भारतीय इक्विटी बाजारों में कुछ गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।’
गोहिल और कामदार ने इस रिपोर्ट में कहा है कि यदि बड़ी गिरावट आती है तो यह भारत के मजबूत बुनियादी आधार और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर विकास संभावनाओं को देखते हुए दीर्घावधि निवेशकों के लिए खरीदारी का अच्छा अवसर साबित हो सकती है।
उन्होंने लिखा है, ‘हम पोर्टफोलियो के संदर्भ में मिडकैप कंपनियों में अपने ‘ओवरवेट’ नजरिये पर कायम हैं। अल्पावधि में हम बैंकों और फार्मा के साथ साथ उन क्षेत्रों को पसंद कर रहे हैं जिन्हें त्योहारी सीजन से पहले ऊंचे उपभोक्ता खर्च का लाभ मिल सकता है।’
भारतीय इक्विटी बाजारों में ताजा आशाजनक तेजी को मुख्य तौर पर इस उम्मीद से बल मिला कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व कैलेंडर वर्ष 2022 के शेष समय में दर वृद्धि को लेकर नरमी बरत सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति में सुस्ती आई है। भारतीय शेयरों के शुद्ध बिकवाल बनने के बाद विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों की ओर केंद्रित हुए हैं और जुलाई से अगस्त के बीच उन्होंने 40,000 करोड़ रुपये मूल्य से ज्यादा के शेयरों की खरीदारी की। पिछले एक महीने में निफ्टी-50 सूचकांक 8.7 फीसदी चढ़ा और उसका प्रदर्शन एमएससीआई वर्ल्ड सूचकांक (+6.1 फीसदी) और एमएससीआई एशिया-एक्स जापान सूचकांक (+ 0.7 फीसदी), दोनों के मुकाबले इस अवधि में अच्छा रहा।
एंटीक ब्रोकिंग के विश्लेषकों को भी बाजार कुछ समय तक एकतरफा रहने का अनुमान है, क्योंकि मूल्यांकन दीर्घावधि औसत से ऊपर है। इसके अलावा, वैश्विक वृद्धि धीमी पड़ी है और अमेरिका एवं जर्मनी में मंदी का जोखिम बढ़ा है और घरेलू तथा वैश्विक, दोनों के संदर्भ में मौद्रिक तथा वित्तीय हालात को लेकर सख्ती बढ़ी है। इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान समेत कई अन्य कारक भी हैं जिनसे मौजूदा धारणा पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी।
ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग में अर्थशास्त्री पंकज छाओछरिया ने एक ताजा रिपोर्ट में लिखा है, ‘कुल मिलाकर, कॉरपोरेट आय हमारे अनुमानों से काफी ऊपर रही और मांग के संदर्भ में यह प्रबंधन द्वारा जताई गई संभावना से बेहतर रही। निफ्टी सूचकांक के लिए मार्च 2023 तक का हमारा लक्ष्य 18,000 का है।’